2026 में 8% तक टूटा Sensex, क्या आ गया SIP बढ़ाने का सही मौका? पोर्टफोलियो बदलें या करें इंतजार
साल 2026 में अब तक सेंसेक्स करीब 8% टूट चुका है. ऐसे में कई निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या अब SIP बढ़ाने का सही समय है. बाजार की इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है. लंबी अवधि के निवेशकों को SIP जारी रखने के साथ जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए.
भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच कई म्यूचुअल फंड निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब अपनी SIP की रकम बढ़ा देनी चाहिए या पहले की तरह निवेश जारी रखना चाहिए. Economic Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार जानकारो का मानना है कि मौजूदा गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है. यह बाजार का सामान्य उतार-चढ़ाव है और लंबी अवधि के निवेशकों को अपनी SIP बिना रोके जारी रखनी चाहिए.
2026 में कितना गिरा सेंसेक्स?
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 को BSE Sensex 85188 के स्तर पर था. वहीं 6 अगस्त 2026 तक यह करीब 6607 अंक यानी 7.79 फीसदी गिरकर 78,581 पर आ गया.
इसके अलावा,
- पिछले 6 महीनों में सेंसेक्स 5.68% गिरा है.
- पिछले 1 साल में इसमें 2.64% की गिरावट दर्ज की गई है.
गिरावट की वजह क्या है?
बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजहें हैं—
- वैश्विक अनिश्चितता (Global Uncertainty)
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
- विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली
- कंपनियों की आय (Earnings) में सुस्ती
- ऊंचे वैल्यूएशन के बाद मुनाफावसूली
क्या SIP बढ़ाने का सही समय है?
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 8% की गिरावट बाजार का सामान्य व्यवहार है. लंबी अवधि के निवेशकों को SIP बंद नहीं करनी चाहिए. बाजार में गिरावट के दौरान SIP के जरिए कम कीमत पर ज्यादा यूनिट मिलती हैं. बाजार का सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय नियमित निवेश जारी रखना बेहतर रणनीति है.
क्या पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए?
रिपोर्ट में बताया गया है कि, निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे बाजार की गिरावट देखकर घबराने के बजाय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें. अगर इक्विटी में निवेश तय लक्ष्य से कम हो गया है, तो इस मौके पर पोर्टफोलियो को दोबारा संतुलित किया जा सकता है.
खासकर उन निवेशकों के लिए जो कम जोखिम लेना चाहते हैं. हालांकि, निवेश का फैसला केवल बाजार की चाल देखकर नहीं बल्कि अपनी वित्तीय जरूरतों और एसेट एलोकेशन के आधार पर करना चाहिए.
किन सेक्टरों पर रखें नजर?
अगर अर्थव्यवस्था में सुधार जारी रहता है तो आने वाले समय में बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. वहीं 2026 में अब तक इंटरनेशनल फंड्स ने 18.34% का औसत रिटर्न दिया है. घरेलू कैटेगरी में ऑटो सेक्टर फंड्स ने 17.99%, फार्मा एवं हेल्थकेयर फंड्स ने 17.49% और स्मॉल कैप फंड्स ने 13.01% का औसत रिटर्न दिया है.
आगे किन बातों पर रखें नजर?
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 6 से 12 महीनों में निवेशकों को इन प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए—
- कच्चे तेल की कीमतें
- भू-राजनीतिक घटनाक्रम
- FII की निवेश रणनीति
- RBI और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी नीतियां
- कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे
- महंगाई, GDP ग्रोथ और खपत (Consumption) के आंकड़े
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