UPI फ्री रहेगा या लगेगा पैसा? PCI ने दिया यहां आपके हर सवाल का जवाब

UPI चार्ज को लेकर चल रही चर्चा के बीच तस्वीर साफ हो गई है. ग्राहकों को UPI इस्तेमाल करने के लिए पैसे नहीं देने होंगे. छोटे दुकानदारों पर भी MDR का बोझ नहीं होगा. डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने पर चर्चा जारी है.

यूपीआई

UPI और मर्चेंट चार्ज को लेकर इन दिनों काफी चर्चा हो रही है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इसका आम लोगों, दुकानदारों और देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा. आइए आसान भाषा में जानते हैं इससे जुड़े जरूरी सवालों के जवाब.

सवाल- क्या UPI इस्तेमाल करने के लिए मुझे पैसे देने होंगे?

जवाब- नहीं. साल 2016 में UPI शुरू होने के बाद से ही ग्राहकों के लिए इसका इस्तेमाल मुफ्त रहा है. यानी आम लोग बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के तुरंत डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं.

सवाल- क्या छोटे दुकानदार या किराना स्टोर UPI लेने पर चार्ज देंगे?

जवाब- नहीं. छोटे दुकानदारों और किराना स्टोर को UPI पेमेंट स्वीकार करने के लिए कोई MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट नहीं देना पड़ता. UPI को इस तरह तैयार किया गया है कि देश के छोटे से छोटे कारोबार को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा आसानी से मिल सके. छोटे दुकानदारों को किसी अतिरिक्त खर्च से बचाना इस सिस्टम का अहम हिस्सा है.

सवाल- फिर अभी UPI चार्ज को लेकर चर्चा क्यों हो रही है?

जवाब- UPI अब सिर्फ एक नया पेमेंट प्लेटफॉर्म नहीं रहा है, बल्कि यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है. जैसे-जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हर महीने अरबों सुरक्षित ट्रांजैक्शन को संभालने वाले सिस्टम के इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने पर चर्चा हो रही है. इसका मकसद यह है कि डिजिटल पेमेंट का सिस्टम टिकाऊ बना रहे और ग्राहकों व छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े.

सवाल- UPI को किसने बनाया और इसमें निवेश कौन कर रहा है?

जवाब- करीब 10 साल से बैंक, पेमेंट कंपनियां, फिनटेक कंपनियां, NPCI और RBI मिलकर UPI के सिस्टम को मजबूत बनाने में निवेश कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने, नए फीचर्स और ग्राहकों की मदद के लिए लगातार निवेश किया जाता है. यह निवेश आज भी जारी है, ताकि UPI सुरक्षित, भरोसेमंद और 24 घंटे उपलब्ध रहे.

सवाल- अगर UPI मुफ्त है तो इसका खर्च कौन उठाता है?

जवाब- इतने बड़े राष्ट्रीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने के लिए लगातार टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने, नियमों का पालन, कस्टमर सपोर्ट और नए फीचर्स पर खर्च करना पड़ता है. फिलहाल यह खर्च UPI के पूरे इकोसिस्टम में शामिल बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर जैसी कंपनियां उठाती हैं. इनका निवेश इसलिए जारी है, ताकि ग्राहक सुरक्षित और आसानी से डिजिटल पेमेंट कर सकें.

सवाल- अगर बड़े दुकानदार पेमेंट स्वीकार करने का चार्ज देते हैं तो क्या ग्राहक को भी पैसे देने होंगे?

जवाब- नहीं. जहां लागू हो, मर्चेंट सर्विस चार्ज दुकानदार और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच होने वाली व्यावसायिक व्यवस्था है. इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को डिजिटल पेमेंट करने के लिए अलग से पैसे देने होंगे. दुनिया के कई देशों में डिजिटल पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट सर्विस चार्ज एक सामान्य व्यवस्था है. वहीं ग्राहक डिजिटल पेमेंट की सुविधा का इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं.

सवाल- UPI सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखना क्यों जरूरी है?

जवाब- UPI अब भारत के लिए एक बेहद जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है. हर दिन करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल पेमेंट करने के लिए करते हैं. जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ती जाएगी, UPI को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आने वाले वर्षों में भी UPI आम लोगों और कारोबारियों को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट की सुविधा देता रहे.

यह भी पढ़ें- UPI Payment पर देना होगा पैसा? FM निर्मला सीतारमण ने किया साफ