Stocks vs Cash vs Gold: क्या है 25/25 रूल, निवेश के लिए क्यों जरुरी है ‘ड्राई पाउडर’ और आपके लिए कौन सा एसेट सबसे बेहतर?
स्टॉक्स, कैश और गोल्ड में निवेश के लिए संतुलन जरूरी है. एक्सपर्ट्स 25/25 नियम के तहत कैश और स्टॉक्स में बराबर हिस्सेदारी रखने और बाकी को बाजार के अनुसार बदलने की सलाह देते हैं. गोल्ड को सिर्फ सुरक्षा के लिए सीमित रखें, जबकि ग्रोथ के लिए स्टॉक्स और स्थिरता के लिए कैश बेहतर विकल्प हैं.
बाजार की उठापटक के बीच निवेशकों के मन में एक सवाल आता है कि पैसा कहाँ लगाया जाए कि सुरक्षा भी बनी रहे और कमाई भी हो? उनके मन में यह सवाल उठता है कि स्टॉक्स, कैश और गोल्ड में से किस एसेट में पैसा लगाना सबसे सही है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों के अपने फायदे हैं लेकिन सही खेल है बैलेंस का यानी बेहतर रिटर्न के लिए संतुलित रणनीति अपनाना जरूरी है, सिर्फ एक विकल्प पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स निवेश के लिए 25/25 रूल फॉलो करने की सलाह देते हैं. आइये जानते हैं कि यह कैसा काम करता है.
हमेशा तैयार रखना चाहिए ‘ड्राई पाउडर’
एक्सपर्ट्स के अनुसार, निवेशकों को ‘ड्राई पाउडर’ हमेशा तैयार रखना चाहिए. फाइनेंस की दुनिया में ‘ड्राई पाउडर’ उस कैश या नकदी भंडार को कहा जाता है जिसे कंपनियां, निवेशक या फंड्स जानबूझकर अलग रखकर रखते हैं. ताकि बाजार में गिरावट आने पर अच्छे शेयर सस्ते में खरीदे जा सकें. इसके लिए 25/25 नियम अपनाने की सलाह दी जाती है.
क्या है 25/25 नियम?
- 25% पैसा कैश में रखें, ताकि सुरक्षा बनी रहे
- 25% स्टॉक्स में निवेश करें, ताकि ग्रोथ मिलती रहे
- बाकी 50% को बाजार की स्थिति के अनुसार एडजस्ट करें
इसका मतलब है कि जब बाजार में तेजी हो, तो कैश बढ़ाएं और जब गिरावट का माहौल हो तो स्टॉक्स में निवेश बढ़ाना बेहतर माना जाता है.
गोल्ड को कैश की जगह रखना सही है?
हाल के दिनों में सोने की कीमतों में तेजी के चलते कई निवेशक इसे कैश के विकल्प के रूप में देख रहे हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स इसे सही रणनीति नहीं मानते. उनका कहना है कि गोल्ड का प्रदर्शन हमेशा स्थिर नहीं रहता. 2012 से 2019 के बीच सोना लगभग स्थिर रहा, जबकि उसी दौरान फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे सुरक्षित विकल्पों ने बेहतर रिटर्न दिया.
कैश और गोल्ड में अंतर
कैश एक स्थिर और भरोसेमंद विकल्प है जहां निवेशक को पता होता है कि उसका पैसा सुरक्षित रहेगा. वहीं गोल्ड की कीमतें वैश्विक परिस्थितियों और करेंसी के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बाजार में बड़ी गिरावट आती है और अच्छे शेयर सस्ते मिलते हैं, तो निवेशकों के पास तुरंत इस्तेमाल के लिए लिक्विड कैश होना चाहिए. ऐसे समय में गोल्ड भी गिर सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है.
स्टॉक्स देते हैं ग्रोथ
स्टॉक्स को निवेश का सबसे मजबूत ग्रोथ इंजन माना जाता है, क्योंकि कंपनियां मुनाफा कमाती हैं और निवेशकों को डिविडेंड भी देती हैं. वहीं गोल्ड कोई इनकम नहीं देता और इसकी कीमत पूरी तरह मांग और सप्लाई पर निर्भर करती है.
पोर्टफोलियो में गोल्ड की भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक, गोल्ड को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसे एक ‘इंश्योरेंस’ के रूप में पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है.
- कुल निवेश का 5% से 10% हिस्सा गोल्ड में रखना उचित
- ज्यादा अनिश्चितता के समय इसे थोड़ा बढ़ाया जा सकता है
- स्टॉक्स से ग्रोथ मिलती है
- कैश से सुरक्षा मिलती है गोल्ड जोखिम के समय सुरक्षा कवच का काम करता है
- सही बैलेंस बनाकर निवेश करने से लंबे समय में बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है।
यानी सही बैलेंस बनाकर निवेश करने से लंबे समय में बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है.
इसे भी पढ़ें: क्या FD से गए हैं ऊब! कम रिस्क वाले ये हैं टॉप 5 इन्वेस्टमेंट ऑप्शन, देंगे बेहतर रिटर्न
