स्कूल फीस के लिए क्रेडिट कार्ड यूज करना सही या गलत, समझें फायदे और जोखिम
स्कूल फीस के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए. समय पर पूरा बिल चुकाने की स्थिति में यह एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है. लेकिन अगर भुगतान में देरी होती है तो ब्याज का बोझ इसे महंगा बना सकता है. इसलिए फीस जैसे बड़े खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने से पहले अपनी वित्तीय योजना जरूर तय कर लें.
Credit Card For School Fees: आज के समय में बच्चों की पढ़ाई परिवार के सबसे बड़े खर्चों में से एक बन चुकी है. खासकर बड़े शहरों में पिछले कुछ सालों में स्कूल फीस तेजी से बढ़ी है. ऐसे में कई परिवारों के लिए हर टर्म या सेमेस्टर में एक साथ बड़ी रकम जमा करना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है. अधिकतर लोगों को पता होता है कि फीस कितनी देनी है, लेकिन उसका समय कई बार दूसरी वित्तीय जिम्मेदारियों के साथ टकरा जाता है. जैसे घर का किराया, ईएमआई, इंश्योरेंस प्रीमियम या यात्रा से जुड़े खर्च. ऐसी स्थिति में कुछ माता-पिता स्कूल फीस भरने के लिए क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते हैं.
आजकल कई स्कूल सीधे क्रेडिट कार्ड से फीस स्वीकार करते हैं या फिर ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए कार्ड से पेमेंट किया जा सकता है. लेकिन यह फैसला सही है या नहीं, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्रेडिट कार्ड का बिल कब और कैसे चुकाते हैं.
क्यों स्कूल फीस के लिए लोग क्रेडिट कार्ड का यूज करते हैं?
कभी-कभी क्रेडिट कार्ड अस्थायी राहत का जरिया बन सकता है. उदाहरण के लिए अगर आपकी सैलरी कुछ दिनों में आने वाली है या किसी दूसरे सोर्स से पैसे मिलने वाले हैं, तो क्रेडिट कार्ड से फीस भरकर थोड़ी राहत मिल सकती है. अधिकतर क्रेडिट कार्ड में 40 से 50 दिनों तक का इंटरेस्ट फ्री समय मिलता है. यह अवधि कार्ड की बिलिंग साइकिल पर निर्भर करती है. अगर इस अवधि के भीतर पूरा बकाया चुका दिया जाए तो किसी तरह का ब्याज नहीं देना पड़ता. इस स्थिति में क्रेडिट कार्ड केवल भुगतान को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाने का साधन बन जाता है.
समय पर बिल न चुकाने पर बढ़ सकता है खर्च
क्रेडिट कार्ड का असली जोखिम तब शुरू होता है जब उसका पूरा बिल समय पर नहीं चुकाया जाता. क्रेडिट कार्ड पर लगने वाली ब्याज दरें आमतौर पर कंज्यूमर क्रेडिट में सबसे अधिक होती हैं. अगर बकाया रकम अगले बिलिंग साइकिल में चली जाती है तो उस पर ब्याज तेजी से बढ़ने लगता है. ऐसे में जो भुगतान केवल स्कूल फीस के लिए किया गया था, वह धीरे-धीरे महंगे कर्ज में बदल सकता है.
कन्वीनियंस फीस भी बढ़ा सकती है लागत
कई स्कूल या ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म क्रेडिट कार्ड से फीस भरने पर अतिरिक्त सुविधा शुल्क लेते हैं. यह शुल्क देखने में छोटा लग सकता है, लेकिन इससे कुल भुगतान की राशि बढ़ जाती है. अगर इस पर क्रेडिट कार्ड का ब्याज भी जुड़ जाए तो खर्च और ज्यादा बढ़ सकता है. इसलिए फीस जमा करने से पहले पेमेंट पेज पर दिए गए चार्ज को ध्यान से देखना जरूरी है.
रिवॉर्ड प्वाइंट का आकर्षण
क्रेडिट कार्ड से बड़े पेमेंट करने पर कई कार्ड कंपनियां रिवॉर्ड प्वाइंट या कैशबैक देती हैं. चूंकि स्कूल फीस अक्सर हजारों या कभी-कभी लाखों रुपये तक होती है, इसलिए मिलने वाले प्वाइंट कई लोगों को आकर्षित करते हैं. लेकिन कई वित्तीय जानकारों का मानना है कि रिवॉर्ड प्वाइंट को मुख्य कारण नहीं बनाना चाहिए. अगर कार्ड का बिल समय पर नहीं चुकाया गया तो ब्याज का खर्च इन रिवॉर्ड के फायदे को खत्म कर सकता है.
क्या होना चाहिए सही तरीका ?
अगर आप स्कूल फीस के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं तो एक साधारण नियम याद रखें. केवल तभी कार्ड का उपयोग करें जब आपको पूरा भरोसा हो कि आप ब्याज-मुक्त अवधि के भीतर पूरा बिल चुका सकते हैं. ऐसा करने पर क्रेडिट कार्ड पेमेंट में थोड़ी लचीलापन देता है और साथ ही कुछ छोटे रिवॉर्ड भी मिल सकते हैं. लेकिन पेमेंट आगे बढ़ने की संभावना है तो यह फैसला महंगा साबित हो सकता है.
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