Jaypee Wish Town: 17000 होमबायर्स को दोहरी चपत, फिर अटका करोड़ों का प्रोजेक्ट?
एनसीआर का एक समय का सबसे बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट माना जाने वाला Jaypee Wish Town आज भी हजारों होमबायर्स के लिए चिंता और संघर्ष की कहानी बना हुआ है. करीब 10 साल बीत जाने के बाद भी लगभग 17,000 फ्लैट्स का कब्जा नहीं मिल पाया है. सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े प्रोजेक्ट में गड़बड़ी कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी है?
Jaypee Group के दिवालिया होने के बाद Jaypee Infratech को IBC प्रक्रिया के तहत Suraksha Group ने टेकओवर किया था. उम्मीद जताई गई थी कि नए प्रबंधन के आने से निर्माण कार्य तेज होगा और फंसे खरीदारों को राहत मिलेगी. हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अब भी बड़ी संख्या में खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं.
इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री ने मामले को और गंभीर बना दिया है. एजेंसी Jaypee Group से जुड़े फंड डायवर्जन के आरोपों की जांच कर रही है. आरोप है कि घर खरीदारों से ली गई रकम का इस्तेमाल प्रोजेक्ट के बजाय अन्य जगहों पर किया गया. आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और कानूनी लड़ाइयों के चलते परियोजना की रफ्तार और धीमी हो गई है.
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है- क्या होमबायर्स को उनके फ्लैट मिलेंगे या फिर उनका पैसा वापस होगा? कानूनी पेच, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अधूरी निर्माण प्रक्रिया ने खरीदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. Jaypee Wish Town आज देश में रियल एस्टेट संकट और बिल्डर-बायर विवाद की सबसे बड़ी मिसाल बन चुका है.
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