SEBI के बड़े फैसले! InvIT-REIT नियमों में बदलाव, 10% ग्रीनफील्ड निवेश की छूट, क्या खुलेंगे नए मौके?
SEBI के नए नियमों ने REIT और InvIT निवेश को और आसान बना दिया है. SPV होल्डिंग से लेकर ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट और उधारी के इस्तेमाल तक बड़े बदलाव किए गए हैं. इन फैसलों से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ने और निवेशकों को बेहतर मौके मिलने की उम्मीद है.
देश में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ावा देने और निवेशकों के लिए ज्यादा लचीलापन देने की दिशा में सेबी (SEBI) ने बड़ा कदम उठाया है. रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिससे इन संस्थाओं के लिए निवेश, उधारी और एसेट मैनेजमेंट आसान होगा. इन फैसलों का सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर और उससे जुड़े निवेशकों पर देखने को मिल सकता है.
SPV होल्डिंग पर नई राहत
सेबी ने InvITs को यह छूट दी है कि वे कंसेशन पीरियड खत्म होने के बाद भी स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) को कुछ समय तक अपने पास रख सकें. आमतौर पर कंसेशन खत्म होते ही SPV की वैल्यू 90% इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में नहीं रह पाती, जिससे नियमों का पालन मुश्किल हो जाता है.
अब यदि किसी SPV पर कानूनी मामला, टैक्स से जुड़ी जांच या अन्य जिम्मेदारियां बाकी हैं, तो InvIT उसे अधिकतम एक साल तक होल्ड कर सकता है. हालांकि इस दौरान निवेश प्रबंधकों को या तो उस SPV से बाहर निकलना होगा या नया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जोड़ना होगा. साथ ही, उन्हें सभी लंबित देनदारियों और मामलों की पूरी जानकारी भी देनी होगी.
म्यूचुअल फंड निवेश में बढ़े विकल्प
सेबी ने REITs और InvITs के लिए लिक्विड म्यूचुअल फंड में निवेश के नियम भी आसान किए हैं. पहले निवेश केवल सीमित कैटेगरी के फंड्स तक ही सीमित था, जिससे विकल्प कम थे और जोखिम बढ़ जाता था.
अब क्रेडिट रिस्क वैल्यू (CRV) की सीमा घटाकर 12 से 10 कर दी गई है और निवेश को A-I के साथ-साथ B-I कैटेगरी के फंड्स में भी अनुमति दी गई है. इससे निवेश के विकल्प बढ़ेंगे और फंड्स में बेहतर विविधता (diversification) मिल सकेगी.
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में निवेश की अनुमति
सेबी ने निजी तौर पर सूचीबद्ध (privately listed) InvITs को भी अब ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में निवेश की अनुमति दे दी है. ये InvITs अब अपनी कुल एसेट वैल्यू का 10% तक ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश कर सकेंगे जो अभी निर्माणाधीन हैं या पूरी तरह नए हैं.
पहले ऐसे InvITs के लिए यह संभव नहीं था, जबकि सार्वजनिक InvITs को पहले से यह सुविधा मिलती थी. इस बदलाव से निवेश के नए रास्ते खुलेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में फंडिंग बढ़ सकती है.
उधारी के उपयोग में भी मिली छूट
InvITs के लिए उधारी (borrowings) के उपयोग को लेकर भी नियमों में ढील दी गई है. अब अगर किसी InvIT की नेट उधारी 49% से ज्यादा है, तब भी वह इन पैसों का उपयोग कई नए कामों में कर सकेगा. इनमें शामिल हैं:
- एसेट्स को बेहतर बनाने या उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए कैपेक्स
- सड़क परियोजनाओं के लिए बड़े रखरखाव खर्च
- पुराने कर्ज का रीफाइनेंस (बिना कुल उधारी बढ़ाए)
पहले यह उधारी केवल नए प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण या विकास तक सीमित थी. अब इस बदलाव से ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करना आसान होगा.
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क्या है इसका मतलब?
सेबी के ये फैसले इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं. इससे न सिर्फ निवेश के नए मौके मिलेंगे, बल्कि जोखिम को संतुलित करते हुए बेहतर रिटर्न की संभावना भी बढ़ेगी. साथ ही, InvITs और REITs को अपने एसेट्स और फंड्स को ज्यादा प्रभावी तरीके से मैनेज करने की आजादी मिलेगी.
