2025 में ₹1.66 लाख करोड़ की रिकॉर्ड निकासी के बाद भी दबाव बरकरार, 2 हफ्ते में FIIs ने निकाले ₹11,789 करोड़, क्या है वजह?

जनवरी के पहले हिस्से में शेयर बाजार की चाल निवेशकों को सतर्क करती दिखी. विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक घटनाएं और मुद्रा से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करते रहे. सूचकांकों में उतार-चढ़ाव ने यह संकेत दिया कि आगे का रुख कई अहम फैसलों और संकेतों पर निर्भर करेगा.

FPI छोड़ रहे हैं भारतीय बाजार Image Credit:

FPI selling India January: इस साल की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जिससे निफ्टी 50 जैसे प्रमुख इंडेक्स कमजोर रुख दिखा रहे हैं. जनवरी की शुरुआती सत्रों में FPIs लगातार नेट सेलर्स रहे हैं, और साल 2025 में रिकॉर्ड निकासी के बाद इस साल भी उनका रुख बहुत बदलता नहीं दिख रहा है.

FPI बिकवाली का आंकड़ा और उसका असर

NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी के अब तक के सत्रों में FPIs ने करीब ₹11,789 करोड़ के भारतीय इक्विटीज बेचे हैं, और यह बिकवाली 7 में से 5 सत्रों में नजर आई है. इस निरंतर बिकवाली का असर बाजार पर साफ दिखा, निफ्टी 50 जनवरी में अब तक लगभग 1.71% नीचे चल रहा है.

क्या कारण हैं FPIs के भारत से वापस हटने के?

विश्लेषकों के अनुसार, FPIs का रुख बदलने के पीछे कई वैश्विक और व्यापारिक वजहें हैं:

इन सब कारणों ने मिलकर एफपीआई निवेशकों की रूचि को सीमित कर दिया है, जिससे भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ा है.

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घरेलू निवेशकों का सपोर्ट

हालांकि विदेशी बिकवाली जारी है, घरेलू आर्थिक आधार (domestic macro) मजबूत ही बना हुआ है, और कुछ निवेशक मानते हैं कि अगर संयुक्त बजट 2026 से सकारात्मक संकेत आएं, या भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत में प्रगति होती है, तो FPIs वापस आ सकते हैं.

इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा मुद्रा स्थिरता के संकेत और भारतीय कंपनियों की मजबूत कमाई से भी निवेशक विश्वास में सुधार हो सकता है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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