₹1.37 लाख के पार निकला सोना! इस हफ्ते गोल्ड प्राइस ने क्यों बदली चाल, चांदी ने आखिरी दिनों में कैसे की रिकवरी

इस हफ्ते कीमती धातुओं के बाजार में हलचल रही. कभी दाम उछले, कभी अचानक संभले. अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, निवेशकों की सोच और वैश्विक संकेतों ने बाजार की दिशा तय की. सप्ताह के अंत तक तस्वीर कुछ बदली हुई दिखी, जिसने आगे के रुझानों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी.

गोल्ड और सिल्वर प्राइस Image Credit: @Canva/Money9live

Gold and Silver this week: इस सप्ताह सोने के भाव में बहुत अनिश्चितता देखने को मिली, सप्ताह की शुरुआत में सोने के दाम में तेजी रही फिर दाम लुढ़के और आखिर में सप्ताह के अंत में उछाल दर्ज हुआ. निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए यह एक यादगार सप्ताह रहा, जब भाव में रोज बदलाव के कारण खरीदार और निवेशक दोनों को ही सोने की बाजार दिशाओं पर ध्यान देना पड़ा. सोना एक वैश्विक कमोडिटी है और इसके दाम अंतरराष्ट्रीय बाजारों, डॉलर की मजबूती-कमजोरी, निवेशकों की धारणा, और घरेलू मांग-आपूर्ति जैसे कई कारणों से बदलते हैं. इन सब कारकों ने इस सप्ताह के दौरान सोने के भाव को प्रभावित किया.

सोने के दाम में गिरावट

IBJA की रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताह की शुरुआत 5 जनवरी (सोमवार) को सोना बीते बंद भाव से 1386 रुपये उछल कर ₹1,36,168 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. अगले दो दिनों में 6 और 7 जनवरी को भी भाव में तेजी आई, मंगलवार को कीमत 1,36,660 रुपये और 7 जनवरी यानी बुधवार को यह कीमत ₹1,36,675 रुपये रही. तीन दिनों की ये तेजी अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हुए घटनाक्रम का नतीजा माना गया.

8 जनवरी को सोना थोड़े गिरावट के साथ ₹1,35,773 के आसपास रहा. यह दिन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि उतार-चढ़ाव की दर कम रही और बाजार ने रीडायरेक्शन का इंतजार किया. ट्रेडर्स ने वैश्विक आर्थिक डेटा और फेडरल रिजर्व के संभावित नीतिगत संकेतों का इंतजार किया, जिससे उछाल नहीं बल्कि स्थिरता देखने को मिली.

सप्ताह के अंत में उछाल

9 जनवरी को सोने ने फिर तेजी दिखाई और लगभग ₹1,37,197 पर खुला. इस उछाल के पीछे निवेशकों का सुरक्षित एसेट की ओर रुख और वैश्विक स्तर पर सोने की बढ़ती मांग रही. सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता देने के कारण, जैसे जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने की मांग बढ़ती है और दाम उछलते हैं.

सोने के दाम कई कारणों से बदलते हैं:

  • वैश्विक आर्थिक घटनाएं और अनिश्चितताएं: जब आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित एसेट की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने की कीमत बढ़ सकती है.
  • डॉलर और मुद्रा विनिमय दर: डॉलर की मजबूती सोने के दामों को दबा सकती है, जबकि डॉलर कमजोर होने पर सोना महंगा होता है.
  • आपूर्ति-मांग का संतुलन: यदि मांग में वृद्धि होती है लेकिन उपलब्धता कम रहती है, तो सोने की कीमतें ऊपर जाती हैं.
  • निवेशक धारणा: निवेशकों का विश्वास और बाजार भावना भी दामों को प्रभावित करते हैं, जैसे अगर निवेशक जोखिम से बचना चाहते हैं तो सोने में निवेश बढ़ता है.

सिल्वर की कीमतों में बदलाव

सप्ताह में सिल्वर (चांदी) के भाव में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. 5 जनवरी को सिल्वर लगभग ₹2,37,063 प्रति किलो था, यह कीमत पिछले बंद भाव से 2513 रुपये ज्यादा रहा. 6 जनवरी को यह कीमत घटकर ₹2,43,150 पर पहुंचा और फिर 7 जनवरी को ₹2,48,000 तक उछल गया.

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इसके बाद 8 जनवरी को यह थोड़ा गिरकर ₹2,35,826 और 9 जनवरी को ₹2,39,994 पर बंद हुआ. सिल्वर की कीमतें सोने की तरह वैश्विक मांग-आपूर्ति, औद्योगिक उपयोग और निवेश धारणा से प्रभावित होती हैं. इस सप्ताह में खास तौर पर औद्योगिक और निवेश से जुड़ी डिमांड ने सिल्वर के भाव में उतार-चढ़ाव पैदा किया.