एक बंद दुकान, तीन फर्जी कंपनियां और करोड़ों का खेल… कानपुर से रचा गया ₹3000 करोड़ का बैंक लोन स्कैम?
उत्तर प्रदेश के कानपुर से जुड़े इस कथित बैंक घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI कर रही है. आरोप है कि शहर के बिरहाना रोड पर स्थित एक लगभग बंद दुकान को कई कंपनियों का रजिस्टर्ड ऑफिस दिखाया गया. इसी पते के आधार पर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किए गए.
Kanpur Loan Scam: कानपुर से जुड़ा एक बड़ा बैंक घोटाला सामने आया है. इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम और जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. आरोप है कि एक बंद पड़ी दुकान को फर्जी कंपनियों का पता दिखाकर हजारों करोड़ रुपये के लोन लेने की कोशिश की गई. इस पूरे मामले में कारोबारी राजेश बोथरा का नाम सामने आया है, जो फिलहाल CBI की गिरफ्त में है.
जांच एजेंसियों का कहना है कि कागजों पर चल रही कंपनियों के जरिए बैंकों को गुमराह किया गया. यह कहानी सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जहां कागजों की चालाकी से बड़े-बड़े लोन लेने की साजिश रची गई. आइए, समझते हैं इस पूरे कथित घोटाले की कहानी.
कानपुर से शुरू हुआ लोन घोटाला
उत्तर प्रदेश के कानपुर से जुड़े इस कथित बैंक घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI कर रही है. आरोप है कि शहर के बिरहाना रोड पर स्थित एक लगभग बंद दुकान को कई कंपनियों का रजिस्टर्ड ऑफिस दिखाया गया. इसी पते के आधार पर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किए गए.
जांच तेज तब हुई जब इस दुकान का लिंक कारोबारी राजेश बोथरा से जुड़ा पाया गया. राजेश बोथरा सिंगापुर में रहता है. उसे नवंबर महीने में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक होटल से गिरफ्तार किया गया. यह गिरफ्तारी करीब 32 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में हुई. जनवरी में लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने मुख्य आरोपी की जमानत याचिका भी खारिज कर दी.
तीन कंपनियों के जरिए खेल
जांच में सामने आया कि बोथरा ग्रुप तीन कंपनियों के जरिए काम कर रहा था. इनमें फ्रॉस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी लिमिटेड, फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड और फ्रॉस्ट ग्लोबल लिमिटेड शामिल हैं. इनमें से फ्रॉस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी लिमिटेड का रजिस्टर्ड पता वही बिरहाना रोड की दुकान था. रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुकान ज्यादातर समय बंद रहती थी और वहां किसी तरह का कारोबार नजर नहीं आता था.
हजारों करोड़ के लोन की कोशिश
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन कंपनियों ने करीब 3,000 करोड़ रुपये तक के लोन के लिए कई सरकारी बैंकों से संपर्क किया. इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और अन्य सरकारी बैंक शामिल बताए जा रहे हैं. कागजों में ये कंपनियां अलग-अलग थीं, लेकिन असल में इन्हें एक ही group कंट्रोंल कर रहा था.
PNB शिकायत से खुला मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत से हुई. PNB ने आरोप लगाया कि फ्रॉस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों और कुछ अज्ञात अधिकारियों ने मिलकर लगभग 31.60 करोड़ रुपये का गबन किया. इस शिकायत के आधार पर मार्च 2021 में एफआईआर दर्ज की गई.
CBI के अनुसार, कंपनी ने जाली बिल ऑफ लैडिंग दिखाकर लेटर ऑफ क्रेडिट की रकम का गलत इस्तेमाल किया. इन दस्तावेजों के जरिए फर्जी इंपोर्ट और एक्सपोर्ट दिखाया गया. आरोप है कि इसी तरीके से बैंक से पैसा निकाला गया और पीएनबी को करीब 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
अन्य मामलों में भी नाम
CBI का कहना है कि राजेश बोथरा पहले भी कई बैंक धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध के मामलों में आरोपी रहा है. कुछ मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद वह न जांच में शामिल हुआ और न ही अदालत में पेश हुआ. एजेंसियों के मुताबिक, वह अभी भी कई मामलों में वांछित है. फिलहाल सीबीआई इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. सवाल यह है कि क्या हजारों करोड़ का यह कथित घोटाला सिर्फ कागजों तक सीमित था या इसके पीछे और भी बड़े खिलाड़ी शामिल थे. जांच के नतीजों का सभी को इंतजार है.
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