IT-बैंकिंग नहीं… गिरते बाजार के सिकंदर हैं ये डिफेंस कंपनी; शेयरों में 8% तक तेजी, USA-ईरान युद्ध के बीच फोकस में स्टॉक
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, लेकिन इस माहौल में डिफेंस सेक्टर के कुछ स्टॉक्स निवेशकों के लिए चमकते सितारे बनकर उभरे. मिसाइल, ड्रोन और कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में 3% से 8% तक तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार की कमजोरी के बीच भी इन शेयरों पर निवेशकों का फोकस बढ़ गया.
Defence Stocks: बुधवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद डिफेंस सेक्टर के कई शेयरों में जोरदार खरीदारी देखी गई. खासतौर पर वे कंपनियां जो सेना के लिए मिसाइल, ड्रोन और कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे युद्ध से जुड़े उपकरण बनाती हैं, उनके शेयर तेजी के साथ कारोबार करते दिखे. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निवेशकों का रुख इन स्टॉक्स की ओर बढ़ा है.
इन डिफेंस शेयरों में दिखी तेज बढ़त
बाजार में कमजोरी के बावजूद कई डिफेंस कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई. Tejas Networks का शेयर सुबह के कारोबार में करीब 8% तक चढ़ गया. वहीं Paras Defence के शेयर में भी करीब 8% की तेजी देखी गई. इसके अलावा Zen Technologies के शेयर में 4% से ज्यादा, Solar Industries India के शेयर में करीब 3%, और ideaForge Technology के शेयर में 5% से अधिक की बढ़त देखने को मिली.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी डिफेंस स्टॉक्स की मांग
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशक अब ऐसे शेयरों की ओर ध्यान दे रहे हैं जो सीधे तौर पर युद्ध से जुड़े उपकरण बनाते हैं. ये कंपनियां बड़ी डिफेंस कंपनियों को ड्रोन, मिसाइल, फाइटर जेट और कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स सप्लाई करती हैं. इसी वजह से निवेशक कमजोर बाजार के बावजूद इन स्टॉक्स में निवेश कर रहे हैं.
शेयर बाजार में भारी गिरावट
दूसरी ओर, 4 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. अमेरिका-ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी. इस दौरान Sensex करीब 1,800 अंक गिरकर 78,443 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 550 अंक गिरकर 24,305 तक फिसल गया.
वहीं BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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