बैटरी स्टोरेज में कौन बनेगा किंग? इन 3 कंपनियों पर टिकी बाजार की नजर; रखें रडार पर

भारत में बैटरी स्टोरेज सेक्टर तेजी से उभर रहा है और वर्ष 2032 तक 236 GWh क्षमता की जरूरत का अनुमान है. इस बढ़ती मांग के बीच Waaree Energies, Pace Digitek और Acme Solar बड़े निवेश और क्षमता विस्तार पर जोर दे रही हैं.

बैटरी एनर्जी स्टोरेज विस्तार से इन कंपनियों को हो सकता है फायदा Image Credit: Canva

Battery Storage Stocks: भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि, अब केवल सोलर और विंड पावर क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है. सबसे बड़ी चुनौती उस बिजली को स्टोर करना है, जिसे सूरज ढलने या हवा की रफ्तार कम होने के बाद भी इस्तेमाल किया जा सके. यही वजह है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) देश के ऊर्जा क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार, वित्त वर्ष 2032 तक भारत को 236 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता की आवश्यकता होगी.

इसके साथ देश की कुल एनर्जी स्टोरेज जरूरत बढ़कर 411 GWh तक पहुंच सकती है. सरकार भी ग्रिड-स्केल BESS परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग, ट्रांसमिशन चार्ज में छूट और नई रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के साथ कम से कम 2 घंटे की एनर्जी स्टोरेज क्षमता अनिवार्य करने जैसे कदम उठा रही है.

Waaree Energies सबसे आगे

Battery Storage सेक्टर में सबसे मजबूत दावेदार Waaree Energies दिखाई देती है. कंपनी गुजरात में भारत की पहली इंटीग्रेटेड एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री गीगाफैक्टरी बना रही है. इस परियोजना में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028 तक 20 GWh BESS क्षमता तैयार करना है. पहले चरण में 3.5 GWh क्षमता चालू होगी, जबकि शेष 16.5 GWh क्षमता बाद में जोड़ी जाएगी.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का ऑर्डर बुक करीब 53,000 करोड़ रुपये का है. पिछले वित्त वर्ष में रेवेन्यू 83.7 फीसदी बढ़कर 26,536.8 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 101 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 3,884.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.71 फीसदी गिरकर 2,859 रुपये पर बंद हुआ.

Pace Digitek तेजी से बढ़ा रही क्षमता

दूसरी प्रमुख कंपनी Pace Digitek है. कंपनी कर्नाटक के बिदादी स्थित प्लांट में अपनी BESS निर्माण क्षमता 2.5 GWh से बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक 10 GWh करने की तैयारी कर रही है. कंपनी का कहना है कि इन-हाउस कंटेनर फैब्रिकेशन शुरू होने से इंपोर्ट कॉस्ट में करीब 30 फीसदी तक कमी आएगी और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बेहतर होगी. कंपनी के कुल 11,338 करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक में एनर्जी और BESS कारोबार की हिस्सेदारी सबसे अधिक है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.71 फीसदी बढ़कर 214 रुपये पर बंद हुआ.

Acme Solar भी मजबूत दावेदार

Acme Solar भी Battery Storage सेक्टर में तेजी से विस्तार कर रही है. कंपनी के पास फिलहाल लगभग 2.3 GWh BESS क्षमता है और वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर 20 GWh करने की योजना है. कंपनी की रणनीति कम कीमत पर बिजली खरीदकर पीक आवर्स में ऊंची कीमत पर बेचने की है. इससे प्रति यूनिट लगभग 6 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है. पिछले वित्त वर्ष में नेट प्रॉफिट बढ़कर 498 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 2.54 फीसदी की गिरावट के साथ 383 रुपये पर बंद हुआ.

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