Closing Bell: सेंसेक्स 700 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 24,000 के नीचे बंद, FMCG के शेयर चमके
Closing Bell: बुधवार, 22 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ार में हर तरफ़ बिकवाली देखी गई, जिसमें बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग 1% की गिरावट आई, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट का प्रदर्शन कमजोर रहा.
Closing Bell: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के कारण, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी रही और बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स व निफ्टी लाल निशान में कारोबार करते दिखे. 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ.
सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 फीसदी गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 फीसदी गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ. लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल थे, जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल थे.
सेक्टोरल इंडेक्स
सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रही. निफ्टी FMCG सबसे अधिक बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65 फीसदी की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18 फीसदी की बढ़त हुई.
गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई. इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे.
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 फीसदी की गिरावट आई.
अमेरिका-ईरान संघर्ष
इस क्षेत्र में अमेरिका-ईरान संघर्ष बढ़ रहा है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत जैसे प्रमुख तेल आयातकों के लिए मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियां बढ़ रही हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की सेना ने कुवैत के अल-दोहा में अमेरिकी गोला-बारूद भंडारण और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं पर एक बड़ा ड्रोन हमला किया.
तेल की कीमतें अब $92 प्रति बैरल से ऊपर
तेल की कीमतों में लगातार चौथे सत्र में वृद्धि हुई, जिससे महंगाई बढ़ने और उसके परिणामस्वरूप मौद्रिक सख्ती का जोखिम बढ़ गया. अमेरिका-ईरान संघर्ष और एनर्जी सप्लाई में और व्यवधान की चिंताओं के कारण कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड $92.67 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो इस साल 11 जून के बाद का उच्चतम स्तर है.
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