पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, फिर भी BPCL-HPCL-IOC में बिकवाली; जानिए किन वजहों से निवेशक अलर्ट?

15 मई को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की. पिछले चार वर्षों में यह पहला बड़ा संशोधन है. सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से ऊंचे क्रूड ऑयल के दामों की वजह से दबाव झेल रही थीं. हालांकि बाजार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए यह बढ़ोतरी कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है.

ऑयल स्टॉक Image Credit: FreePik

अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने के बावजूद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को दबाव देखने को मिला. शुक्रवार के कारोबार में Bharat Petroleum Corporation Limited यानी BPCL का शेयर करीब 2.02 प्रतिशत टूटकर 289.05 रुपये पर पहुंच गया. वहीं Hindustan Petroleum Corporation Limited यानी HPCL का शेयर 2.17 प्रतिशत गिरकर 369.35 रुपये पर आ गया. इसके अलावा Indian Oil Corporation Limited यानी IOC का शेयर भी 1.65 प्रतिशत फिसलकर 137.94 रुपये पर कारोबार करता दिखा.

चार साल बाद बढ़े ईंधन के दाम

15 मई को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की. पिछले चार वर्षों में यह पहला बड़ा संशोधन है. सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से ऊंचे क्रूड ऑयल के दामों की वजह से दबाव झेल रही थीं.

हालांकि बाजार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए यह बढ़ोतरी कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है. यही वजह रही कि शेयरों में खरीदारी की जगह बिकवाली देखने को मिली.

रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने हाल ही में CII Annual Summit में कहा था कि भारतीय तेल कंपनियों को फिलहाल रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि कुल अंडर-रिकवरी करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.

ब्रोकरेज ने पहले ही जताई थी चिंता

Kotak Institutional Equities ने पिछले महीने जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि लगातार ऊंचे क्रूड ऑयल दामों की वजह से रिफाइनिंग कंपनियों पर हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

US-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए वैश्विक सप्लाई संकट का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ता है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष और Strait of Hormuz को लेकर सप्लाई चिंताओं की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल कीमतें तेजी से बढ़ी हैं.

फिलहाल ग्लोबल क्रूड ऑयल कीमतें करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. इससे पहले तनाव बढ़ने के दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गया था.

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