फरवरी में इकोनॉमी की रफ्तार तेज, कंपोजिट PMI 59.3 पर पहुंचा, लेकिन महंगाई के बढ़ते संकेतों से RBI सतर्क

फरवरी में आर्थिक गतिविधियों से जुड़े ताजा आंकड़ों ने बाजार और नीति निर्माताओं का ध्यान खींचा है. मजबूत मांग के संकेतों के साथ-साथ लागत और कीमतों में बढ़ोतरी के इशारे भी सामने आए हैं. यह स्थिति आगे मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर चर्चा को तेज कर सकती है.

मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स Image Credit:

India Composite PMI February: फरवरी महीने में भारत की निजी क्षेत्र की गतिविधियों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है. मजबूत मांग के दम पर खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि सर्विस सेक्टर की रफ्तार लगभग स्थिर रही. हालांकि, इस तेजी के साथ महंगाई से जुड़ा दबाव भी बढ़ता दिखा है, जिसने नीति निर्धारकों की चिंता बढ़ा दी है.

PMI तीन महीने के उच्च स्तर पर

HSBC की फ्लैश इंडिया कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) फरवरी में बढ़कर 59.3 पर पहुंच गई, जो जनवरी में 58.4 थी. यह बीते तीन महीनों का सबसे मजबूत स्तर है. यह आंकड़ा रॉयटर्स सर्वे के अनुमान 59.0 से भी थोड़ा ऊपर रहा. PMI का 50 से ऊपर रहना यह दर्शाता है कि आर्थिक गतिविधियां विस्तार के दौर में हैं.

सर्वे के मुताबिक, वस्तुओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों ने बिक्री में ज्यादा तेजी दर्ज की, जिससे उत्पादन वृद्धि चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. मैन्युफैक्चरिंग PMI फरवरी में बढ़कर 57.5 हो गई, जो जनवरी में 55.4 थी. दूसरी ओर, सर्विस सेक्टर में नए कारोबार की रफ्तार 13 महीने के निचले स्तर पर आ गई. हालांकि, सर्विसेज PMI लगभग स्थिर रहकर 58.4 पर बना रहा, जो जनवरी में 58.5 था.

नए ऑर्डर से मिली रफ्तार

इस सुधार के पीछे सबसे बड़ी वजह नए ऑर्डर में तेज बढ़ोतरी रही. कुल नए ऑर्डर नवंबर के बाद सबसे तेज गति से बढ़े. कंपनियों ने इसके लिए मजबूत घरेलू मांग, स्थानीय पर्यटन और बेहतर मार्केटिंग प्रयासों को जिम्मेदार ठहराया. अंतरराष्ट्रीय बिक्री में भी बीते पांच महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल मांग को और सहारा मिला.

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बेहतर बिक्री का असर रोजगार पर भी दिखा. कंपनियों ने तेज गति से नई भर्तियां कीं और आने वाले एक साल को लेकर कारोबारी भरोसा भी मजबूत हुआ. सर्वे में यह भरोसा पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.

महंगाई का दबाव बढ़ा

तेजी के साथ लागत भी बढ़ी है. इनपुट कॉस्ट पिछले 15 महीनों की सबसे तेज दर से बढ़ी, जिससे आउटपुट चार्ज महंगाई छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. खासकर सर्विस सेक्टर में इनपुट कीमतों में ढाई साल की सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई.

मजबूत ग्रोथ और बढ़ती महंगाई का यह मिश्रण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को सतर्क रख सकता है. हाल ही में खुदरा महंगाई बढ़कर 2.75 फीसदी हो गई है. रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, RBI के इस साल अपनी नीतिगत ब्याज दर 5.25 फीसदी पर बनाए रखने की उम्मीद है.

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