भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों का भरोसा टूटा, मार्च में निकाले ₹88,180 करोड़, इस सेक्टर से हुई 36% बिकवाली

मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से ₹88,180 करोड़ की बड़ी रकम निकाल ली है. पश्चिम एशिया तनाव, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है. सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सेक्टर में हुई, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा हुआ है.

विदेशी निवेशक बिकवाली Image Credit: AI Generated

FPI outflow India: वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है. मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने भारी बिकवाली करते हुए बाजार से हजारों करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ है और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है.

2026 में आउटफ्लो ₹1 लाख करोड़ पार

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च (20 मार्च तक) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹88,180 करोड़ निकाल लिए हैं. चिंता की बात यह है कि इस महीने हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक बिकवाली करते दिखे. हालांकि, फरवरी में तस्वीर बिल्कुल अलग थी, जब FPIs ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. यह आंकड़ा 17 महीनों में सबसे ज्यादा था.

मार्च की इस बिकवाली के बाद 2026 में अब तक कुल FPI आउटफ्लो ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है. यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं.

क्यों हो रही है बिकवाली

मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इससे निवेशकों में डर का माहौल बना है.

इसके अलावा, रुपये की कमजोरी (₹92 प्रति डॉलर के करीब), अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और फरवरी की तेजी के बाद मुनाफावसूली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है. उच्च तेल कीमतों से भारत की ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका भी निवेशकों को सतर्क कर रही है.

किन सेक्टर पर ज्यादा असर

इस बिकवाली का सबसे ज्यादा असर फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ा है. 15 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, इस सेक्टर में ₹31,831 करोड़ की बिकवाली हुई है, यानी 36 फीसदी से ज्यादा.

विशेषज्ञ मानते हैं कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. अगर पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है या तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो बाजार में सुधार आ सकता है. साथ ही, घरेलू निवेशकों (DII) का समर्थन और बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे बाजार को संभालने में मदद कर सकते हैं. फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय है.