Solar Ind, Data Patterns, Astra Microwave समेत 5 डिफेंस स्टॉक्स पर Goldman Sachs बुलिश, बता दिया इनका दमदार प्लान
डिफेंस सेक्टर में हो रहे बदलाव अब सिर्फ सरकारी खर्च तक सीमित नहीं दिखते. कुछ नई तकनीकी क्षमताएं, वैश्विक साझेदारियां और निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका इस सेक्टर को अलग दिशा में ले जा रही हैं. आने वाले वर्षों में रक्षा उद्योग की तस्वीर पहले से काफी बदल सकती है.
Defense Stock in News: भारत की डिफेंस स्टोरी को अक्सर बढ़ते बजट और बड़े सरकारी ऑर्डर तक सीमित करके देखा जाता है. लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. एक हालिया गोल्डमैन सैक्स रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर सिर्फ सरकारी खर्च पर नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में गहरी हिस्सेदारी की ओर बढ़ रहा है. ब्रोकरेज ने प्रैट एंड व्हिटनी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और कंट्री हेड आशीष सराफ के साथ एक्सपर्ट कॉल के बाद इस सेक्टर के अगले ग्रोथ फेज को फोकस में रखा.
किन डिफेंस शेयरों पर नजर
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट डिफेंस कंपनियां जो एडवांस्ड मटीरियल, जटिल मशीनरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम में काम कर रही हैं, वे बेहतर स्थिति में हैं. PTC इंडस्ट्रीज को गोल्डमैन सैक्स ने एक उभरते हुए प्रोसेस्ड मटीरियल सप्लायर के रूप में देखा है. एयरो इंजन और हाई-परफॉर्मेंस डिफेंस इक्विपमेंट में इस्तेमाल होने वाले स्पेशल एलॉय और मटेरियल इसकी ताकत हैं.
सोलर इंडस्ट्रीज को अब सिर्फ विस्फोटक बनाने वाली कंपनी नहीं माना जा रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, गोला-बारूद और ड्रोन से जुड़े इसके काम को देखते हुए इसे एक डिफेंस कंपनी के तौर पर देखना चाहिए. अजाद इंजीनियरिंग को भारत में कॉम्प्लेक्स कंपोनेंट मशिनरिंग का बड़ा खिलाड़ी बताया गया है, जो एयरोस्पेस ग्रेड पार्ट्स के लिए बेहद जरूरी है. वहीं डेटा पैटर्न्स को रडार इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अहम कंपनी माना गया है.
गोल्डमैन सैक्स ने सोलर इंडस्ट्रीज, डेटा पैटर्न्स, एस्ट्रा माइक्रोवेव, अजाद इंजीनियरिंग और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स पर ‘बाय’ रेटिंग दी है.
डिफेंस ग्रोथ के तीन बड़े ड्राइवर
रिपोर्ट में एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर के लिए तीन लंबे समय तक चलने वाले ग्रोथ फैक्टर बताए गए हैं.
- पहला है यूनियन डिफेंस बजट. FY27 के बजट अनुमान में कैपिटल प्रोक्योरमेंट को FY26 के मुकाबले 18 फीसदी बढ़ाया गया है, जिससे घरेलू कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.
- दूसरा फैक्टर प्रस्तावित यूरोपियन यूनियन–भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है.
- तीसरा अमेरिका-भारत ट्रेड डील.
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, ये समझौते भारतीय डिफेंस कंपनियों को विदेशों में अपने पांव फैलाने का मौका देंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया भर में कमर्शियल एयरोस्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है. इंजन सप्लायर कंपनियों के पास 2035 तक का ऑर्डर विजिबिलिटी है, जो लंबी अवधि के लिए पॉजिटिव संकेत है.
मौके के साथ जोखिम भी
हालांकि गोल्डमैन सैक्स ने कुछ जोखिम भी गिनाए हैं. इनमें सरकार की कैपिटल एलोकेशन में बदलाव, प्रोडक्ट डेवलपमेंट में देरी और ग्लोबल कंपनियों का दूसरे देशों से सोर्सिंग करना शामिल है. इसके अलावा, बिल्ड-टू-प्रिंट से बिल्ड-टू-स्पेसिफिकेशन मॉडल में बदलाव में भी समय लग सकता है.
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