घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर, रॉयल्टी दरों में बड़ी कटौती, ONGC के शेयरों में बंपर रैली!

नई व्यवस्था के तहत ऑनशोर क्रूड ऑयल उत्पादन पर प्रभावी रॉयल्टी दर घटाकर 10 फीसदी कर दी गई है, जबकि ऑफशोर क्रूड उत्पादन पर यह दर 8 फीसदी कर दी गई है. सरकार ने इसके लिए नया कैलकुलेशन सिस्टम लागू किया है, जिससे कंपनियों पर रॉयल्टी का बोझ कम होगा और प्रोजेक्ट्स की प्रॉफिट बेहतर हो सकती है.

गैस सेक्टर शेयर Image Credit: AI/canva

केंद्र सरकार ने घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन पर लगने वाली रॉयल्टी दरों में कटौती कर दी है. यह फैसला खास तौर पर डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर जैसे मुश्किल और ज्यादा निवेश वाले क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है. संशोधित दरों को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 8 मई को अधिसूचित किया गया था. इसका असर ONGC के शेयरों में देखने को मिला. 12 मई को गिरते बाजार में भी कंपनी के शेयरों में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली.

तेल कंपनियों की लागत घटाने पर फोकस

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. नई रॉयल्टी व्यवस्था से उन कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो मुश्किल भौगोलिक क्षेत्रों में बड़े निवेश के साथ तेल और गैस खोज का काम कर रही हैं. इससे एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन सेक्टर में निवेश गतिविधियां बढ़ सकती हैं और कंपनियों की लागत में कमी आ सकती है.

कच्चे तेल पर कितनी हुई रॉयल्टी?

CLSA के मुताबिक, सरकार के इस फैसले से घरेलू क्रूड ऑयल प्रोडक्शन करने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है. ऑनशोर क्रूड प्रोडक्शन पर प्रभावी रॉयल्टी दर 16.66 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दी गई है, जबकि ऑफशोर प्रोडक्शन पर रॉयल्टी 9.09 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी कर दी गई है. वहीं, नैचुरल गैस पर रॉयल्टी भी 10 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी कर दी गई है.

प्राकृतिक गैस पर भी मिली राहत

सरकार ने प्राकृतिक गैस उत्पादन पर भी राहत दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद गैस पर प्रभावी रॉयल्टी दर घटकर 8 फीसदी रह गई है. सरकार ने “वेल हेड प्राइस” निकालने के लिए नया फ्लैट डिडक्शन फॉर्मूला लागू किया है, जिसके आधार पर अब रॉयल्टी की गणना की जाएगी.

क्या बदला नए फॉर्मूले में?

नई अधिसूचना के मुताबिक अब रॉयल्टी की गणना “वेल हेड प्राइस” के आधार पर होगी, जिसमें पोस्ट वेल-हेड लागत के लिए तय कटौती दी जाएगी. नई व्यवस्था के तहत नॉमिनेशन रिजीम ब्लॉक्स के लिए बिक्री मूल्य का 20 फीसदी और बाकी सभी रिजीम के लिए 15 फीसदी की कटौती की जाएगी. पहले रॉयल्टी की गणना वास्तविक पोस्ट-प्रोडक्शन लागत के आधार पर होती थी, जिससे कंपनियों पर ज्यादा प्रभावी रॉयल्टी का बोझ पड़ता था.

डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर प्रोजेक्ट्स को बड़ा फायदा

सरकार ने मुश्किल क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए रियायती रॉयल्टी दरें जारी रखी हैं. नई व्यवस्था के तहत DSF और HELP पॉलिसी के तहत दिए गए डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक्स में पहले 7 साल तक कच्चे तेल और कंडेनसेट उत्पादन पर कोई रॉयल्टी नहीं लगेगी. इसके बाद डीपवॉटर ब्लॉक्स पर 5 फीसदी और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक्स पर 2 फीसदी रॉयल्टी लागू होगी. इससे हाई-रिस्क और हाई-कॉस्ट प्रोजेक्ट्स में निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है.

प्राकृतिक गैस प्रोजेक्ट्स को भी समान राहत

सरकार ने यही राहत प्राकृतिक गैस उत्पादन पर भी लागू की है. नई व्यवस्था के तहत पहले 7 साल तक कोई रॉयल्टी नहीं देनी होगी. इसके बाद डीपवॉटर क्षेत्रों में 5 फीसदी और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में 2 फीसदी रॉयल्टी लागू होगी. इससे गैस उत्पादन बढ़ाने वाली कंपनियों को भी लंबी अवधि में फायदा मिलने की उम्मीद है.

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