AI के दौर में क्यों अलग नजर आ रहा है यह IT शेयर? Affle 3i का बिजनेस मॉडल बना ताकत, एक हफ्ते में भागे शेयर
हालिया तेजी के बाद भी पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 0.78 फीसदी नीचे है, लेकिन पिछले एक साल में इसमें करीब 8.26 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. हालिया तेजी के बाद भी पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 0.78 फीसदी नीचे है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने पारंपरिक IT कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ा दिया है. जहां कई IT कंपनियां अब भी लोगों के काम के घंटों, बड़े प्रोजेक्ट्स और बिलिंग मॉडल पर निर्भर हैं, वहीं Affle 3i का मॉडल इससे काफी अलग नजर आता है. यही वजह है कि बाजार में इस कंपनी को संभावित “AI-Proof” टेक स्टॉक के तौर पर देखा जा रहा है. सोमवार को कंपनी के शेयर में भी जोरदार तेजी देखने को मिली और स्टॉक 8.71 फीसदी चढ़कर 1,637.5 रुपये पर पहुंच गया. पिछले एक हफ्ते में शेयर करीब 15.32 फीसदी उछल चुका है.
क्या करती है कंपनी?
Affle 3i पहले Affle India के नाम से जानी जाती थी और खुद को कंज्यूमर इंटेलिजेंस आधारित ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी बताती है. कंपनी AI आधारित डिजिटल विज्ञापन समाधान उपलब्ध कराती है और ब्रांड्स को मोबाइल विज्ञापन के जरिए नए यूजर्स जोड़ने, उन्हें एंगेज करने और कन्वर्जन बढ़ाने में मदद करती है. Q3FY26 तक कंपनी का प्लेटफॉर्म करीब 3.9 बिलियन कनेक्टेड डिवाइसेज तक पहुंच बना चुका है. इसके अलावा कंपनी के पास 39 पेटेंट फाइल हैं, जिनमें से 16 पेटेंट मंजूर हो चुके हैं.
पारंपरिक IT मॉडल से क्यों अलग है Affle?
Affle और बाकी IT सर्विस कंपनियों के बीच सबसे बड़ा फर्क इसके कमाई मॉडल में है. जहां पारंपरिक IT कंपनियां क्लाइंट कॉन्ट्रैक्ट, कर्मचारियों की संख्या और बिलिंग रेट्स पर निर्भर रहती हैं, वहीं Affle का बिजनेस “CPCU” यानी Cost Per Converted User मॉडल पर चलता है. आसान भाषा में कहें तो विज्ञापनदाता तभी भुगतान करता है जब प्लेटफॉर्म किसी यूजर से जरूरी काम करवाने में सफल होता है, जैसे खरीदारी, रजिस्ट्रेशन, ऐप डाउनलोड, ट्रांजैक्शन या दोबारा खरीदारी. यानी कंपनी केवल सॉफ्टवेयर या मैनपावर नहीं बेच रही, बल्कि रिजल्ट आधारित मॉडल पर काम कर रही है. Q3FY26 में कंपनी की 99.5 फीसदी कमाई CPCU मॉडल से आई, जिससे साफ है कि कंपनी का लगभग पूरा कारोबार परफॉर्मेंस आधारित विज्ञापन पर टिका है.
AI यहां खतरा नहीं, ग्रोथ का मौका
जहां कई IT कंपनियों के लिए AI लागत और नौकरियों पर दबाव का कारण बन सकता है, वहीं Affle के लिए यही AI एक बड़ा ग्रोथ इंजन बनता दिख रहा है. कंपनी AI की मदद से कैंपेन मैनेजमेंट को ऑटोमेट कर रही है, लागत को नियंत्रित रख रही है और प्रोडक्टिविटी बढ़ा रही है. इसी वजह से कंपनी बिना ज्यादा खर्च बढ़ाए ग्रोथ हासिल कर पा रही है. Q3FY26 में कंपनी के कर्मचारी खर्च लगभग स्थिर रहे, जबकि रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 10.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी AI और ऑटोमेशन के जरिए बेहतर ऑपरेटिंग लीवरेज हासिल कर रही है.
Q3FY26 के नतीजों में मजबूत ग्रोथ
कंपनी ने Q3FY26 में 7 बिलियन रुपये से ज्यादा का तिमाही रेवेन्यू रनरेट पार किया. ग्राहकों से रेवेन्यू बढ़कर 7,175 मिलियन रुपये पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 19.2 फीसदी ज्यादा है. EBITDA 24.1 फीसदी बढ़कर 1,630 मिलियन रुपये रहा, जबकि PAT 19.1 फीसदी बढ़कर 1,193 मिलियन रुपये तक पहुंच गया. FY26 के पहले 9 महीनों में कंपनी का रेवेन्यू 19.3 फीसदी, EBITDA 28.5 फीसदी और PAT 20.3 फीसदी बढ़ा. खास बात यह रही कि EBITDA ग्रोथ रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा रही, जो मजबूत मार्जिन और बेहतर ऑपरेटिंग कंट्रोल का संकेत देती है.
लगातार बढ़ रहा EBITDA मार्जिन
Q3FY26 में कंपनी का EBITDA मार्जिन 22.7 फीसदी रहा, जो Q2FY26 के 22.6 फीसदी और Q3FY25 के 21.8 फीसदी से बेहतर है. मैनेजमेंट के मुताबिक यह लगातार सातवीं तिमाही रही, जब कंपनी के EBITDA मार्जिन में क्रमिक सुधार देखने को मिला. इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी ग्रोथ के साथ-साथ अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को भी मजबूत बनाए रखने में सफल रही है.
CPCU मॉडल क्यों है कंपनी की असली ताकत?
Q3FY26 में कंपनी ने 119.7 मिलियन कन्वर्जन हासिल किए, जबकि औसत CPCU रेट 59.6 रुपये रहा. इससे CPCU रेवेन्यू बढ़कर 7,136 मिलियन रुपये तक पहुंच गया. वहीं FY26 के पहले 9 महीनों में कंपनी के कन्वर्जन 335.7 मिलियन रहे, जो पिछले साल के 288.8 मिलियन से काफी ज्यादा हैं. साथ ही औसत CPCU रेट भी 57.3 रुपये से बढ़कर 58.5 रुपये हो गया. इसका मतलब है कि कंपनी केवल ज्यादा यूजर्स नहीं जोड़ रही, बल्कि हर कन्वर्टेड यूजर से ज्यादा कमाई भी कर रही है.
किन यूजर्स पर फोकस कर रही कंपनी?
कंपनी अब ज्यादा वैल्यू वाले यूजर्स पर फोकस कर रही है, जिनमें प्रीमियम iOS यूजर्स, गेमर्स, ऑनलाइन खरीदार, सब्सक्राइबर्स, मरीज और छात्रों के अभिभावक शामिल हैं. यानी कंपनी अलग-अलग इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से हाई वैल्यू यूजर कन्वर्जन पर काम कर रही है, जिससे विज्ञापनदाताओं को बेहतर रिटर्न मिल सके.
शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा?
हालिया तेजी के बाद भी पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 0.78 फीसदी नीचे है, लेकिन पिछले एक साल में इसमें करीब 8.26 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. हालिया तेजी के बाद भी पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 0.78 फीसदी नीचे है, लेकिन पिछले एक साल में इसमें करीब 8.26 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. वहीं, पिछले एक हफ्ते में इसमें 15 फीसदी की तेजी देखने को मिली है.
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