14 परमाणु रिएक्टर बना चुकी ये इंफ्रा कंपनी, दिग्गज निवेशक धड़ाधड़ खरीद रहे शेयर, 1 महीने में 40% रिटर्न
भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में तेजी के बीच Hindustan Construction Company (HCC) एक बार फिर निवेशकों की रडार पर है. देश के 24 में से 14 परमाणु रिएक्टर बनाने वाली इस कंपनी की ऑर्डर बुक, कर्ज में कमी और बड़े निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी इसे संभावित टर्नअराउंड स्टोरी बना रही है.
भारत के न्यूक्लियर पावर सेक्टर में आने वाली बड़ी तेजी ने एक पुराने दिग्गज हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) को निवेशकों की रडार पर ला दिया है. 1926 में स्थापित यह कंपनी केवल सड़कें या पुल ही नहीं बना रही, बल्कि भारत की परमाणु क्षमता में इसका योगदान बेजोड़ है. देश के कुल 24 परमाणु रिएक्टरों में से 14 को HCC ने बनाए हैं. अब जबकि भारत 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य लेकर चल रहा है, HCC इस सेक्टर में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
क्यों सुर्खियों में है HCC?
स्टॉक में दिलचस्पी बढ़ने की बड़ी वजह इसकी न्यूक्लियर क्रेडेंशियल्स हैं. भारत अब ‘प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर्स’ (PHWR) के साथ-साथ ‘लाइट वॉटर रिएक्टर्स’ (LWR) की ओर बढ़ रहा है. HCC ने साफ किया है कि वह LWR और विदेशी टेक्नोलॉजी (EPR-type) के प्रोजेक्ट्स में भी उतरने की तैयारी में है.
इस कंपनी में बड़े दिग्गजों ने दांव लगाया है:
- वेनगार्ड (Vanguard): 2.29% हिस्सेदारी.
- ब्लैकरॉक (iShares MSCI ETF): 1.08% नई हिस्सेदारी.
- मुकुल अग्रवाल (Ace Investor): मार्च तिमाही तक अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 1.91% की.
ऑर्डर बुक और कमाई का गणित
दिसंबर 2025 तक कंपनी की स्थिति काफी मजबूत दिख रही है. हालांकि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स से बड़ी कमाई 2027-28 के बाद आने की उम्मीद है, लेकिन वर्तमान पोर्टफोलियो भी बहुत विविध है.
| मुख्य आंकड़े | विवरण |
| कुल ऑर्डर बुक | ₹13,148 करोड़ |
| वर्तमान मार्केट कैप | ~₹6,105.98 करोड़ |
| शेयर की कीमत | ₹23.31 |
| पाइपलाइन (भावी अवसर) | ₹53,820 करोड़ |
| EBITDA मार्जिन | 15.2% (Q3FY26) |
बैलेंस शीट में सुधार
HCC की सबसे बड़ी जीत उसकी वित्तीय हालत में सुधार है. कंपनी ने राइट्स इश्यू और आर्बिट्रेशन रिकवरी के जरिए अपना कर्ज काफी घटाया है.
- कर्ज में कटौती: मार्च 2025 में कर्ज ₹3,279 करोड़ था, जो मार्च 2026 तक घटकर ₹2,016 करोड़ (करीब 38% की कमी) रह गया है.
- कॉर्पोरेट गारंटी: प्रोलीफिक रेजोल्यूशन के लिए दी गई गारंटी 100% से घटाकर 20% कर दी गई है, जिससे जोखिम कम हुआ है.
चुनौतियां और भविष्य की राह
मैनेजमेंट का लक्ष्य हर तीन साल में टर्नओवर को दोगुना करना है. लेकिन राह इतनी आसान भी नहीं है:
- रेवेन्यू में सुस्ती: पुराने प्रोजेक्ट्स खत्म होने और नए प्रोजेक्ट्स शुरुआती चरण में होने के कारण रेवेन्यू अभी भी दबाव में है.
- वर्किंग कैपिटल: कंपनी के पास अभी फंड-आधारित लिमिट की कमी है और वह कस्टमर एडवांस पर निर्भर है.
- न्यूक्लियर टाइमलाइन: परमाणु ऊर्जा के बड़े टेंडर मिलने में 2-3 साल का समय लग सकता है.
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1 महीने में 40 फीसदी के करीब रिटर्न दे चुकी है. HCC अब एक ‘टर्नअराउंड स्टोरी’ बन रही है. अगर भारत का न्यूक्लियर रोडमैप रफ्तार पकड़ता है, तो HCC लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकती है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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