2020 के बाद पहली बार ₹1,000 के नीचे फिसला इंफोसिस का शेयर, 2026 में 39% तक टूटा; क्या बता रहे हैं आंकडे़
देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी Infosys के शेयरों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार को कंपनी का शेयर करीब पांच साल में पहली बार 1,000 रुपये के नीचे फिसल गया. लगातार बिकवाली के चलते कंपनी का मार्केट कैप भी घटकर करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक रह गया है.
Infosys Share Price: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Infosys के शेयरों में लगातार दबाव बना हुआ है. 1 जुलाई के कारोबार में कंपनी का शेयर 1.51 फीसदी गिरकर 985.30 रुपये पर पहुंच गया. सितंबर 2020 के बाद यह पहला मौका है, जब Infosys का शेयर 1,000 रुपये के नीचे आया है.
साल 2026 में 39% तक टूटा शेयर
Infosys के शेयर फरवरी से लगातार गिरावट में हैं और पिछले पांच महीनों से हर महीने लाल निशान में बंद हुए हैं. साल 2026 में अब तक शेयर करीब 39 फीसदी टूट तक चुका है. पिछले साल भी इसमें 14 फीसदी की गिरावट आई थी. यानी पिछले 18 महीनों में यह शेयर कुल 47 फीसदी कमजोर हो चुका है. ऐसे में अपने रिकॉर्ड हाई 1,728 रुपये से यह शेयर 41 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है, जो किसी ब्लू-चिप कंपनी के लिए बड़ी गिरावट मानी जा रही है.
₹2.53 लाख करोड़ घटा मार्केट कैप
लगातार गिरावट की वजह से 2026 में Infosys के मार्केट कैप से करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं. कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 जुलाई 2026 को घटकर 3,99,774 करोड़ रह गया है. खास बात ये है कि एक समय कंपनी का मार्केट कैप 7.987 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. इस गिरावट का असर घरेलू म्यूचुअल फंड्स पर भी पड़ा है, क्योंकि वे कंपनी के बड़े निवेशकों में शामिल हैं.
क्यों टूट रहे हैं IT शेयर?
आईटी सेक्टर पर कई वजहों से दबाव बना हुआ है. सबसे बड़ी चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर है. निवेशकों को डर है कि AI आधारित नई तकनीकें पारंपरिक आईटी सर्विसेज और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट बिजनेस पर असर डाल सकती हैं. फरवरी में Anthropic के Claude Code लॉन्च होने के बाद यह चिंता और बढ़ गई कि AI आधारित कोडिंग टूल्स आईटी इंडस्ट्री का स्वरूप बदल सकते हैं.
इसके अलावा मार्च तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे और कई आईटी कंपनियों ने FY27 के लिए सतर्क आउटलुक दिया. इससे विदेशी निवेशकों ने भी आईटी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की.
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की चिंता भी बनी वजह
अमेरिका में महंगाई और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका भी आईटी कंपनियों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. अगर अमेरिका में कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च कम करती हैं, तो भारतीय आईटी कंपनियों के नए ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं. वहीं Accenture के कमजोर आउटलुक ने भी पूरे आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है. यही वजह है कि 2026 में अब तक Nifty IT Index करीब 32 फीसदी टूट चुका है, जबकि इसी अवधि में Nifty 50 में करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है.
अब निवेशकों की नजर जून तिमाही के नतीजों और कंपनियों के FY27 आउटलुक पर रहेगी. अगर डील विन, क्लाइंट खर्च और AI से जुड़ी कमाई में सुधार के संकेत मिलते हैं, तो आईटी शेयरों में निवेशकों का भरोसा फिर लौट सकता है.
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