LIC OFS: निवेशकों के लिए मौका या टेंशन, क्या आपकी पॉलिसी पर भी पड़ेगा असर? समझें हर एक जरूरी बात
LIC OFS: निवेशकों के मन में कई सवाल है. जैसे- क्या शेयर पर दबाव आएगा? क्या यह खरीदारी का मौका होगा? और सबसे अहम, जिन लोगों के पास LIC की पॉलिसी है, क्या उन पर इसका कोई असर पड़ेगा? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
Highlights
- LIC में सरकार एक बार फिर अपनी हिस्सेदारी बेच रही है.
- सरकार के पास LIC में अभी भी बहुत बड़ी हिस्सेदारी है.
- बाजार में अधिक शेयर उपलब्ध होने से ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ सकता है.
देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार एक बार फिर अपनी हिस्सेदारी बेच रही है. सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए LIC के कुछ शेयर मार्केट में लेकर आई है. ऐसे में निवेशकों के मन में कई सवाल है. जैसे- क्या शेयर पर दबाव आएगा? क्या यह खरीदारी का मौका होगा? और सबसे अहम, जिन लोगों के पास LIC की पॉलिसी है, क्या उन पर इसका कोई असर पड़ेगा? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
ऑफर-फॉर-सेल
सरकार ने 4 अगस्त को LIC में ‘ऑफर-फॉर-सेल’ (OFS) का ऐलान किया. इसके तहत सरकार 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी और ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ के तहत अतिरिक्त 4 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी होगा. यह इश्यू नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए मंगलवार को खुलेगा, जबकि रिटेल निवेशक बुधवार को बोली लगा सकेंगे.
सबसे पहले समझिए OFS क्या होता है?
ऑफर फॉर सेल (OFS) शेयर बेचने का एक ऐसा तरीका है, जिसमें कंपनी का मौजूदा प्रमोटर, LIC के मामले में भारत सरकार अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा शेयर बाजार के जरिए निवेशकों को बेचती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि OFS में कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती, बल्कि प्रमोटर अपने मौजूदा शेयर बेचता है. इसलिए कंपनी के पास कोई फ्रेश फंड नहीं आता, बल्कि बिक्री से मिलने वाली रकम सरकार को मिलती है.
सरकार LIC में हिस्सेदारी क्यों बेच रही है?
सरकार के पास LIC में अभी भी बहुत बड़ी हिस्सेदारी है. सेबी के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों के अनुसार लिस्टेड कंपनियों में सार्वजनिक हिस्सेदारी एक तय स्तर तक बढ़ानी होती है. साथ ही, सरकार विनिवेश के जरिए रेवेन्यू भी जुटाना चाहती है.
मौजूदा समय में LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग लगभग 3.5 फीसदी है. अगर सरकार पूरी 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेच देती है, तो बीमा कंपनी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10 फीसदी हो जाएगी.
सेबी का नियम कहता है कि हर लिस्टेड कंपनी में कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक शेयर होल्डर्स के पास होनी चाहिए. बड़ी कंपनियों को इसके लिए समय दिया जाता है. LIC के लिए यह डेडलाइन मई 2027 तय की गई है.
शेयरधारकों पर क्या असर होगा?
शॉर्ट टर्म में शेयर पर दबाव आ सकता है. जब बाजार में एक साथ बड़ी मात्रा में शेयर आते हैं, तो सप्लाई बढ़ जाती है. इससे कुछ समय के लिए शेयर की कीमत पर दबाव देखने को मिल सकता है.
लिक्विडिटी बढ़ेगी
बाजार में अधिक शेयर उपलब्ध होने से ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ सकता है. इससे शेयर में खरीद-बिक्री करना आसान हो जाता है.
लंबी अवधि की तस्वीर नहीं बदलती
OFS का मतलब यह नहीं है कि LIC का कारोबार कमजोर हो गया है. कंपनी का बिजनेस, मुनाफा, प्रीमियम कलेक्शन और निवेश रणनीति पहले की तरह ही रहती है. इसलिए लंबी अवधि में शेयर की दिशा कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी.
LIC पॉलिसीधारकों पर क्या असर पड़ेगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है और इसका जवाब है कि कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा.
- आपकी LIC पॉलिसी पूरी तरह वैध रहेगी.
- मैच्योरिटी, बोनस और क्लेम सेटलमेंट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
- प्रीमियम भरने के नियम नहीं बदलेंगे.
- पॉलिसी की शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी.
क्या सरकार का नियंत्रण कम हो जाएगा?
अगर OFS के बाद भी सरकार के पास मेजॉरिटी(50% से अधिक) हिस्सेदारी रहती है, तो कंपनी पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा. इसलिए LIC के ऑपरेशन या प्रबंधन में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है.
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अगर आप पहले से LIC के शेयरधारक हैं, तो केवल OFS की खबर से घबराकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के तिमाही नतीजों, एम्बेडेड वैल्यू (Embedded Value), VNB (Value of New Business), मुनाफे की वृद्धि और वैल्यूएशन पर नजर रखें.
अगर आप नए निवेशक हैं, तो OFS में मिलने वाले संभावित डिस्काउंट और कंपनी के लंबे समय के बिजनेस आउटलुक का आकलन करने के बाद ही निवेश का फैसला लें.
LIC का OFS मुख्य रूप से सरकार की हिस्सेदारी घटाने और बाजार में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने की प्रक्रिया है. इससे शेयर की कीमत में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव आ सकता है और निवेशकों को डिस्काउंट पर खरीदारी का मौका भी मिल सकता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
Latest Stories
बाजार में बिकवाली हावी! निफ्टी 24450 के करीब, सेंसेक्स भी फिसला; जानें किन वजहों से निवेशक अलर्ट?
एथेनॉल सेक्टर पर FIIs की नजर, इन 3 शेयरों में बढ़ाई हिस्सेदारी; क्या आपके पोर्टफोलियो में हैं?
100% से ज्यादा उछला प्रॉफिट, AI और पावर सेक्टर में काम करती है कंपनी , इन 2 स्मॉल कैप पर रखें नजर
