डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी, इन 3 कंपनियों को हो सकता है फायदा; स्टॉक पर टिका लें नजर
डीजल में 15% तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की तैयारी से भारत के बायोफ्यूल सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है. नितिन गडकरी के संकेत के बाद कुछ स्टॉक निवेशकों के रडार पर आ गए हैं. जानिए इस नई नीति से किन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में संकेत दिया है कि केंद्र सरकार डीजल में 15% तक आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की अनुमति देने पर विचार कर रही है. सरकार का यह कदम कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करने की दिशा में अगला बड़ा चरण माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आइसोब्यूटेनॉल की एनर्जी डेंसिटी इथेनॉल से कहीं ज्यादा है, जिससे यह अधिक माइलेज देता है और इससे इंजन को नुकसान पहुंचने का खतरा भी कम होता है. सरकार के इस बड़े फैसले से डीजल से जुड़े इन 3 खास शेयरों की किस्मत चमक सकती है.
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आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग की खबर से जिस कंपनी को सबसे सीधा और बड़ा फायदा मिल सकता है, वह है ‘आंध्रा पेट्रोकेमिकल्स’. देश में आइसोब्यूटेनॉल बनाने वाली बहुत कम कंपनियां हैं, जिनमें इसका नाम सबसे ऊपर आता है. यह कंपनी अपने प्लांट में मिक्स्ड ब्यूटिराल्डिहाइड को एलपी हाइड्रोजनीकरण (LP Hydrogenation) प्रक्रिया के जरिए नॉर्मल ब्यूटेनॉल और आइसो-ब्यूटेनॉल में बदलती है.
वित्तीय सेहत और स्टॉक आउटलुक:
- फाइनेंशियल: कंपनी का हालिया तिमाही रेवेन्यू ₹793 मिलियन रहा, जबकि बीते साल की समान अवधि में यह ₹1,435 मिलियन था. हालांकि, कंपनी घाटे से उबरकर ₹14 मिलियन के नेट प्रॉफिट में आ गई है.
- पॉजिटिव: कंपनी का बैलेंस शीट कर्ज से मुक्त (Debt-light) है और यह एक बेहद खास (Niche) सेक्टर में काम करती है जहां लॉन्ग टर्म डिमांड बहुत मजबूत है.
- चुनौती: केमिकल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशों से होने वाले आयात के चलते फिलहाल इसके मुनाफे पर थोड़ा दबाव है.
- BPCL Share
देश की दिग्गज सरकारी तेल विपणन कंपनी (OMC) भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी आइसोब्यूटेनॉल की एक बड़ी उत्पादक है. कंपनी के पास कोच्चि में विश्व स्तरीय पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जहां प्रोपलीन के जरिए बड़े पैमाने पर नॉर्मल ब्यूटेनॉल और आइसो ब्यूटेनॉल का निर्माण किया जाता है.
वित्तीय सेहत और स्टॉक आउटलुक:
- फाइनेंशियल: मार्च 2026 तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर ₹13,49,479 मिलियन हो गया, जबकि इसका शुद्ध मुनाफा (Net Profit) जोरदार छलांग लगाते हुए ₹60,673 मिलियन पर पहुंच गया.
- पॉजिटिव: बीपीसीएल पेट्रोकेमिकल्स, रिफाइनिंग क्षमता और रिन्यूएबल एनर्जी में आक्रामक रूप से निवेश कर रही है. इसके बीना पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स आने वाले दशक में कंपनी की कमाई को कई गुना बढ़ा सकते हैं.
- चुनौती: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें और सरकारी नीतियां इसके मार्जिन को प्रभावित कर सकती हैं.
- Praj Industries Share
प्राज इंडस्ट्रीज सीधे तौर पर आइसोब्यूटेनॉल बेचती नहीं है, बल्कि यह इस सेक्टर की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर (EPC) प्रदाता है. कंपनी ने रिन्यूएबल आइसोब्यूटेनॉल तकनीक को कमर्शियल बनाने के लिए वैश्विक कंपनी ‘गेवो’ (Gevo) के साथ एक कंस्ट्रक्शन लाइसेंस एग्रीमेंट किया है. यानी जब भी कोई कंपनी भारत में आइसोब्यूटेनॉल का नया प्लांट लगाएगी, तो प्राज इंडस्ट्रीज को उसकी तकनीक और प्लांट बनाने का बड़ा ठेका मिलेगा.
वित्तीय सेहत और स्टॉक आउटलुक:
- फाइनेंशियल: वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी की समेकित शुद्ध बिक्री ₹8,446 मिलियन रही, जो पिछले साल के बराबर ही है. हालांकि, इस तिमाही में इसका शुद्ध मुनाफा घटकर ₹116 मिलियन रहा.
- पॉजिटिव: प्राज अब सिर्फ इथेनॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और बायो-मेथोनॉल जैसे भविष्य के ईंधनों की टेक लीडर बन रही है.
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निवेशकों के लिए काम की बात
फिलहाल भारत में आइसोब्यूटेनॉल का उत्पादन काफी सीमित स्तर पर होता है. अगर सरकार डीजल में इसकी ब्लेंडिंग को मंजूरी दे भी देती है, तो कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने में थोड़ा समय लगेगा. इसलिए, निवेशकों को केवल इस एक खबर के भरोसे नहीं, बल्कि इन कंपनियों के ओवरऑल बिजनेस परफॉर्मेंस को देखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.