दिल्ली के कूड़े से बिजली बनाने वाली कंपनी पर NTPC का फुल कंट्रोल, खरीदी 26% हिस्सेदारी; फोकस में रहेगा शेयर
सरकारी बिजली कंपनी NTPC ने दिल्ली नगर निगम (MCD) की 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदकर NTPC EDMC Waste Solutions पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया है. इसके बाद यह कंपनी NTPC की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी बन गई है. बाजार को उम्मीद है कि यह कदम कंपनी के वेस्ट-टू-एनर्जी और ग्रीन बिजनेस विस्तार को नई रफ्तार देगा.

दिल्ली के कूड़े से बिजली बनाने के कारोबार पर अब सरकारी बिजली कंपनी NTPC का पूरा नियंत्रण हो गया है. कंपनी ने दिल्ली नगर निगम (MCD) की 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है, जिसके बाद NTPC EDMC Waste Solutions Private Limited अब NTPC की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी बन गई है. इस खबर के बाद शुक्रवार को NTPC के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. गुरुवार को कंपनी का शेयर करीब 2 फीसदी तक चढ़ा था, हालांकि आखिर में यह 400 रुपये के स्तर पर बंद हुआ.
MCD की हिस्सेदारी खरीदी
NTPC ने सेबी को दी जानकारी में बताया कि उसने MCD के साथ 11 जून 2019 के जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट को खत्म करने और MCD की हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है. अब तक इस जॉइंट वेंचर में NTPC की हिस्सेदारी 74 फीसदी और MCD की 26 फीसदी थी.
कंपनी ने MCD के पास मौजूद 52,000 इक्विटी शेयर खरीदे हैं. यह सौदा फेस वैल्यू पर किया गया है और इसकी कुल कीमत 5.20 लाख रुपये तय हुई है. NTPC बोर्ड और MCD के हाउस ऑफ कॉरपोरेशन दोनों ने इस अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है.
कूड़े से बिजली बनाने के कारोबार पर फोकस
NTPC EDMC Waste Solutions Private Limited की स्थापना 1 जून 2020 को की गई थी. कंपनी का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में वेस्ट मैनेजमेंट और उससे बिजली उत्पादन का कारोबार करना है. यह कंपनी राजधानी में बढ़ते कचरे की समस्या और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, दोनों पर काम कर रही है.
अब NTPC के पास कंपनी का 100 फीसदी नियंत्रण आ जाने से फैसले लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है. माना जा रहा है कि इससे कंपनी को अपने वेस्ट-टू-एनर्जी बिजनेस को विस्तार देने में मदद मिलेगी.
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शेयर पर रहेगी बाजार की नजर
बाजार जानकारों का मानना है कि यह कदम NTPC की ग्रीन और वैकल्पिक ऊर्जा रणनीति को मजबूत करने वाला है. कंपनी पहले से ही रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में आक्रामक विस्तार कर रही है. ऐसे में वेस्ट मैनेजमेंट बिजनेस पर पूरा नियंत्रण लेना लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
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