ONGC और वेदांता आमने-सामने! गुजरात के तेल-गैस ब्लॉक पर छिड़ी कानूनी जंग, दिल्ली हाई कोर्ट में मामला
गुजरात के कैम्बे बेसिन स्थित CB-OS-02 तेल और गैस ब्लॉक को लेकर ONGC और वेदांता के बीच कानूनी विवाद तेज हो गया है. केंद्र सरकार ने ब्लॉक का कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने से इनकार करते हुए ONGC को टेकओवर का आदेश दिया था.

ONGC vs Vedanta Gujarat oil block dispute: गुजरात के कैम्बे बेसिन में स्थित एक महत्वपूर्ण तेल और गैस ब्लॉक (CB-OS-02) के मालिकाना हक को लेकर सरकारी कंपनी ONGC और निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता के बीच कानूनी जंग छिड़ गई है. भारत सरकार ने इस ब्लॉक के कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए ONGC को तुरंत इसका टेकओवर (नियंत्रण लेने) करने का आदेश दिया था. लेकिन सरकारी आदेश के महीनों बाद भी वेदांता ने इस ब्लॉक का ऑपरेशनल कंट्रोल ONGC को नहीं सौंपा है. मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट में है, जहां सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.
सरकार ने नामंजूर की कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की अर्जी
इस पूरे विवाद और ब्लॉक से जुड़े मुख्य आंकड़े नीचे दिए गए हैं:
- सरकार का कड़ा फैसला: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 19 सितंबर, 2025 को एक आदेश जारी कर इस ब्लॉक के प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) की अवधि बढ़ाने के आवेदन को खारिज कर दिया था. हालांकि, सरकार ने इसका कोई खास कारण नहीं बताया था.
- ब्लॉक में किसकी कितनी हिस्सेदारी?: इस ब्लॉक में सरकारी कंपनी ONGC की 50% हिस्सेदारी है. वहीं, वेदांता के पास 40% और इनवेनियर पेट्रोडाइन लिमिटेड (IPL) के पास 10% हिस्सेदारी है.
- हाई कोर्ट में यथास्थिति का आदेश: सरकार के फैसले के खिलाफ वेदांता ने 22 सितंबर, 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों को ‘यथास्थिति’ बनाए रखने का आदेश दिया था. 18 मई, 2026 को इस मामले की आखिरी सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब केवल अदालत के फैसले का इंतजार है.
ONGC तैयार, पर वेदांता का दावा क्यों?
वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के अपने अर्निंग स्टेटमेंट में ONGC ने साफ किया है कि सरकारी निर्देश मिलते ही उसने 20 सितंबर, 2025 को गुजरात के सुवाली में अपनी ऑपरेशनल टीम तैनात कर दी थी. लेकिन कानूनी दांवपेंच और कोर्ट status Quo (यथास्थिति) के आदेश के कारण वेदांता अब भी ब्लॉक के ऑपरेटर के रूप में काम कर रही है. ONGC ने कहा है कि जैसे ही कोर्ट या सरकार का अंतिम निर्देश आएगा, वह तुरंत कमान संभालने के लिए तैयार है.
दूसरी तरफ, वेदांता के प्रवक्ता का कहना है कि मामला अभी अदालत के अधीन (Sub-judice) है, इसलिए वे इस पर ‘यथास्थिति’ के अलावा कोई टिप्पणी नहीं कर सकते.
कितना अहम है यह ब्लॉक और क्या है इसका इतिहास?
- उत्पादन क्षमता: यह ब्लॉक रोजाना लगभग 3,400 बैरल तेल और 3.4 लाख मानक घन मीटर गैस का उत्पादन करता है. इसमें लक्ष्मी और गौरी नाम के दो प्रमुख फील्ड शामिल हैं.
- भंडार की स्थिति: साल 2019 की एक रिजर्व रिपोर्ट के मुताबिक, इस 3,314 वर्ग किलोमीटर के उथले पानी (Shallow Water) वाले ब्लॉक में कुल 13.6 मिलियन बैरल तेल और तेल-समतुल्य गैस का भंडार मौजूद है.
- 2011 की बड़ी डील: यह ब्लॉक उन तीन संपत्तियों में से एक था, जिसे अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल के ग्रुप ने 2011 में ‘केयर्न इंडिया’ को 8.67 बिलियन डॉलर में खरीदकर हासिल किया था. साल 2017 में केयर्न इंडिया का वेदांता लिमिटेड में विलय हो गया था.
वेदांता पर क्या होगा असर?
इस ब्लॉक का पुराना कॉन्ट्रैक्ट 30 अगस्त, 1998 को साइन हुआ था, जो 30 जून, 2023 को खत्म हो चुका है. इसके बाद से कंपनी एक्सटेंशन की उम्मीद में इसे चला रही थी. हालांकि, इस ब्लॉक के हाथ से निकलने पर वेदांता को वित्तीय रूप से कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा, क्योंकि कंपनी के मुताबिक यह ब्लॉक वेदांता के कुल कामकाजी मुनाफे (EBITDA) में 0.3% से भी कम का योगदान देता है.
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इससे पहले सरकार ने वेदांता के दो अन्य ब्लॉकों, राजस्थान ब्लॉक (RJ-ON-90/1) को साल 2030 तक और कृष्णा गोदावरी बेसिन के रव्वा फील्ड (Ravva Field) को साल 2029 तक के लिए, 10-10 साल का एक्सटेंशन दे दिया था. लेकिन गुजरात के इस ब्लॉक पर अब सरकार और वेदांता आमने-सामने हैं.