सरकारी कंपनियों का मेगा मर्जर! PFC-REC के विलय से निवेशकों को कितना फायदा-नुकसान, आप क्या करें?
पावर सेक्टर की दिग्गज सरकारी कंपनियां PFC और REC के विलय को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है. इस मर्जर के बाद ₹11 लाख करोड़ से ज्यादा की लोन बुक वाली देश की सबसे बड़ी पावर सेक्टर फाइनेंसिंग कंपनी बनेगी. REC शेयरधारकों को तय स्वैप रेशियो के तहत फायदा मिलने की उम्मीद है, जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से फंडिंग लागत घटेगी. शेयरों पर रखें नजर.
पावर सेक्टर की दो दिग्गज सरकारी कंपनियां, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और आरईसी (REC) जल्द ही एक होने जा रही हैं. इस मर्जर से देश की सबसे बड़ी पावर सेक्टर फाइनेंसिंग कंपनी वजूद में आएगी. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ दोनों कंपनियों की फंडिंग लागत कम होगी, बल्कि कामकाज की क्षमता बढ़ेगी और आने वाले समय में इनके शेयरों की री-रेटिंग भी हो सकती है.
बीते 30 जून को पीएफसी और आरईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने आरईसी के पीएफसी में विलय (Scheme of Merger) को मंजूरी दे दी है. PIB के मुताबिक, इस मर्जर के बाद बनने वाली नई इकाई की कुल लोन बुक (लोन एसेट) ₹11 लाख करोड़ से भी ज्यादा की हो जाएगी.
REC शेयरधारकों को मिलेगा बंपर फायदा
इस विलय के तहत आरईसी (REC) के शेयरधारकों को उनके हर 100 शेयरों के बदले पीएफसी (PFC) के 88 शेयर मिलेंगे.बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी (Macquarie) ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि यह स्वैप रेशियो आरईसी के निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद नजर आ रहा है.
घोषणा से पहले पीएफसी की क्लोजिंग कीमत के आधार पर, आरईसी के प्रति शेयर की वैल्यू करीब ₹381 बैठती है, जबकि आरईसी का क्लोजिंग भाव ₹364 था. इसका मतलब है कि आरईसी के शेयरधारकों को करीब 4.5% का सीधा फायदा (अपसाइड) मिल रहा है, जबकि पीएफसी के शेयरधारकों के लिए यह करीब 4.7% का नुकसान (डाउनसाइड) दिखा रहा है.
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वैल्यूएशन का अंतर होगा खत्म
बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों कंपनियों के वैल्यूएशन (मूल्यांकन) का अंतर भी आरईसी के पक्ष में जाता दिख रहा है. फिलहाल आरईसी का वन-यार फॉरवर्ड पीई (P/E) मल्टीपल 5.59 गुना है, जो इसके 10 साल के औसत (6.42 गुना) से कम है. दूसरी तरफ, पीएफसी 6.34 गुना फॉरवर्ड पीई पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके दशक भर के औसत (4.31 गुना) से काफी ज्यादा है.
इस मर्जर के बाद निवेशकों का नजरिया बदलेगा और दोनों कंपनियों के बीच वैल्यूएशन का यह बड़ा अंतर खत्म होने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा लॉन्ग टर्म में शेयरधारकों को मिलेगा.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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