घट गई प्रमोटर हिस्सेदारी, फिर भी इन 2 हेल्थकेयर शेयरों में डटे हैं दिग्गज निवेशक; कचोलिया-सिंघानिया ने लगा रखा है दांव

हेल्थकेयर सेक्टर की दो कम्पनियों बीटा ड्रग्स और सुवेन लाइफ साइंसेज में प्रमोटर हिस्सेदारी घटने के बावजूद दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया और सुनील सिंघानिया ने अपना निवेश बरकरार रखा है. जानिए प्रमोटर हिस्सेदारी में गिरावट की असली वजह क्या रही, Preferential Issue और Warrant Conversion ने कैसे बदला शेयरहोल्डिंग पैटर्न, दोनों कम्पनियों के कारोबार की स्थिति कैसी है.

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Highlights

  • बीटा ड्रग्स और सुवेन लाइफ साइंसेज में प्रमोटर हिस्सेदारी घटी.
  • दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया और सुनील सिंघानिया ने अपना निवेश बरकरार रखा.
  • बीटा ड्रग्स में प्रमोटर हिस्सेदारी घटने की बड़ी वजह Preferential Issue रही.

Healthcare Stocks: शेयर बाजार में किसी भी कंपनी की प्रमोटर हिस्सेदारी में गिरावट को आमतौर पर निवेशकों के लिए चेतावनी का संकेत माना जाता है. अक्सर यह धारणा बन जाती है कि यदि कंपनी के प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं, तो कारोबार में कोई समस्या हो सकती है. हालांकि, हर बार ऐसा नहीं होता. कई बार प्रमोटर हिस्सेदारी में कमी के पीछे पूंजी जुटाने या नए शेयर जारी करने जैसी कॉर्पोरेट एक्शन होती हैं, जिनका कंपनी के मूल कारोबार से नकारात्मक संबंध नहीं होता. हाल ही में हेल्थकेयर सेक्टर की दो कम्पनियों में ऐसा ही देखने को मिला. इन दोनों कम्पनियों में प्रमोटर हिस्सेदारी घटी, लेकिन दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया और सुनील सिंघानिया ने अपना निवेश बरकरार रखा है.

Beta Drugs Ltd

पहली कंपनी बीटा ड्रग्स लिमिटेड है, जो कैंसर की दवाइयों के निर्माण का काम करती है. Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी में आशीष कचोलिया की करीब 11 फीसदी (व्यक्तिगत पोर्टफोलियो में 4.9% और सूर्यवंशी कमोट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के तहत 6.2%) हिस्सेदारी है. पिछले एक साल में कंपनी की प्रमोटर हिस्सेदारी 66.73 फीसदी से घटकर 59.10 फीसदी रह गई.

पहली नजर में यह गिरावट चिंता पैदा कर सकती है, लेकिन इसकी बड़ी वजह कंपनी द्वारा Preferential Issue के जरिए पूंजी जुटाना रही. नए शेयर जारी होने से कुल शेयरों की संख्या बढ़ गई, जिसके कारण पुराने शेयरधारकों की प्रतिशत हिस्सेदारी अपने आप कम हो गई. इस दौरान कंपनी के कारोबार में लगातार मजबूती भी देखने को मिली. वित्त वर्ष 2021 से 2026 के बीच कंपनी की बिक्री में 27 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में 28 फीसदी की CAGR वृद्धि दर्ज की गई.

जून 2026 तिमाही में कंपनी की बिक्री 25 फीसदी बढ़कर 126 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि शुद्ध मुनाफा 35 फीसदी बढ़कर 16 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, क्षमता विस्तार के कारण कंपनी पर कर्ज बढ़ा है और वैल्यूएशन भी उद्योग के औसत की तुलना में ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है. बुधवार को कंपनी का शेयर 0.08 फीसदी बढ़कर 2,366.90 रुपये पर पहुंच गया.

Suven Life Sciences Ltd

दूसरी कंपनी सुवेन लाइफ साइंसेज लिमिटेड है, जिसमें सुनील सिंघानिया के अबैक्कस डायवर्सिफाइड अल्फा फंड की लगभग 1 फीसदी हिस्सेदारी है. जुलाई 2026 में कंपनी की प्रमोटर हिस्सेदारी 70.08 फीसदी से घटकर 65.47 फीसदी रह गई. हालांकि, यहां भी प्रमोटरों ने बड़े पैमाने पर शेयर नहीं बेचे.

कंपनी ने Warrant को Equity Share में बदलने की प्रक्रिया पूरी की, जिससे नए शेयर जारी हुए और कुल शेयर पूंजी बढ़ने के कारण प्रमोटरों की प्रतिशत हिस्सेदारी कम दिखाई देने लगी. सुवेन लाइफ साइंसेज एक Clinical Stage Biopharmaceutical कंपनी है, जो अल्जाइमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए नई दवाइयों पर शोध कर रही है.

कंपनी की मौजूदा आय बेहद सीमित है और पिछले कई वर्षों से उसे घाटा हो रहा है. इसके बावजूद कंपनी ने Warrant Conversion के जरिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाई है, ताकि रिसर्च और Clinical Trial को आगे बढ़ाया जा सके. कंपनी का भविष्य उसकी Drug Pipeline की सफलता पर निर्भर करेगा. बुधवार को कंपनी का शेयर 5.39 फीसदी बढ़कर 326.55 रुपये पर पहुंच गया.

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