84084 करोड़ रुपये के ‘समुद्र मंथन’ पर सरकार का बड़ा दांव, ONGC समेत इन 3 कंपनियों की बदल सकती है किस्मत! रखें नजर

केंद्र सरकार ने 84,084 करोड़ रुपये के समुद्र मंथन कार्यक्रम के तहत गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने का बड़ा फैसला लिया है. इस योजना से ONGC, Jindal Drilling & Industries और Engineers India जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है. सरकार पहली बार ऑफशोर एक्सप्लोरेशन में ड्रिलिंग लागत का हिस्सा वहन करेगी, जिससे कंपनियों का वित्तीय जोखिम घटेगा.

समुद्र मंथन योजना Image Credit: ai/canva

Highlights

  • 84,084 करोड़ रुपये की योजना से गहरे समुद्र में तेल खोज को मिलेगा बढ़ावा.
  • ड्रिलिंग लागत में सरकारी मदद से ONGC समेत कई कंपनियों का जोखिम घटेगा.
  • Jindal Drilling और Engineers India को नए प्रोजेक्ट मिलने की उम्मीद.

Samudra Manthan Programme: कच्चे तेल के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 84,084 करोड़ रुपये के समुद्र मंथन कार्यक्रम पर बड़ा दांव लगाया है. इस योजना का मकसद गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना है. सरकार पहली बार ऐसे हाई-रिस्क प्रोजेक्ट्स में ड्रिलिंग लागत का एक हिस्सा खुद वहन करेगी, जिससे तेल एवं गैस कंपनियों का वित्तीय जोखिम कम होगा और ऑफशोर एक्सप्लोरेशन में तेजी आने की उम्मीद है. इस नीति का फायदा केवल तेल उत्पादक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ड्रिलिंग, इंजीनियरिंग और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई कंपनियों को भी मिल सकता है.

भारत करता है 90 फीसदी आयात

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90% आयात करता है, जिस पर हर साल करीब 13 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की कमजोरी और चालू खाते के घाटे का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ता है. ऐसे में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना सरकार की रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है.

हालांकि, अब तक गहरे समुद्र में तेल की खोज बेहद महंगी और जोखिम भरी मानी जाती थी. एक एक्सप्लोरेटरी कुएं की ड्रिलिंग पर 800 से 1,000 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है और इसके सफल होने की कोई गारंटी नहीं होती. यही वजह है कि कई कंपनियां ऐसे प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाए रखती थीं.

Jindal Drilling & Industries को मिल सकता है बड़ा लाभ

इस योजना से सबसे अधिक फायदा उठाने वाली कंपनियों में Jindal Drilling & Industries का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. कंपनी भारत में ऑफशोर ड्रिलिंग सर्विसेज उपलब्ध कराती है और उसका लगभग पूरा कारोबार इसी क्षेत्र से आता है. उसका सबसे बड़ा ग्राहक ONGC है, जिससे उसे लगभग पूरी आय प्राप्त होती है. कंपनी के पास छह ऑफशोर जैक-अप रिग, आठ डायरेक्शनल ड्रिलिंग सेट और छह मड लॉगिंग सेट हैं, जो भारतीय समुद्री परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किए गए हैं.

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की आय 20.4 फीसदी बढ़कर 997 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 44.8% की वृद्धि दर्ज की गई. कंपनी पूरी तरह नेट-डेट फ्री है. इसके अलावा ONGC ने कंपनी को तीन वर्षों के लिए जिंदल पायनियर रिग की तैनाती का नया अनुबंध भी दिया है, जिससे भविष्य की आय को मजबूती मिल सकती है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर इंट्रा-डे कारोबार के दौरान 0.23 फीसदी गिरकर 613 रुपये पर पहुंच गया.

Engineers India को मिल सकते हैं नए प्रोजेक्ट

Engineers India Limited (EIL) भी इस योजना की बड़ी लाभार्थी कंपनियों में शामिल हो सकती है. कंपनी ऑफशोर ऑयल एवं गैस प्रोजेक्ट्स के लिए इंजीनियरिंग, कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सर्विस उपलब्ध कराती है. कंपनी अब तक 248 ऑफशोर प्रोजेक्ट पूरे कर चुकी है और ONGC के साथ उसका लंबा अनुभव रहा है.

financialexpress की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की कंसल्टेंसी आय लगातार बढ़ रही है और मार्च 2026 तक उसके पास 15,109 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक था. सरकार द्वारा नए ऑफशोर ब्लॉक्स की नीलामी और गहरे समुद्री प्रोजेक्ट्स में तेजी आने से Engineers India को डिजाइन, इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से जुड़े नए अनुबंध मिलने की संभावना है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.75 फीसदी गिरकर 240 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.

ONGC सबसे बड़ा लाभार्थी

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ONGC को मिलने की उम्मीद है. सरकार एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग लागत का बड़ा हिस्सा वहन करेगी, जिससे ONGC का वित्तीय जोखिम कम होगा. कंपनी ने 25 जुलाई 2026 को इस कार्यक्रम के तहत पहला डीपवॉटर एक्सप्लोरेटरी कुआं शुरू किया है, जिसके नतीजे सितंबर में आने की उम्मीद है. ONGC अगले सात वर्षों में 150 डीपवॉटर कुएं ड्रिल करने की योजना पर काम कर रही है.

कंपनी का मानना है कि कम ड्रिलिंग लागत के कारण अब वे परियोजनाएं भी आर्थिक रूप से व्यवहार्य बन जाएंगी, जिन्हें पहले महंगा होने की वजह से टाल दिया जाता था. इसके अलावा, सरकार ने OALP Round-X के तहत पहले प्रतिबंधित रहे कई ऑफशोर क्षेत्रों को भी एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है, जिससे ONGC को विस्तार का बड़ा अवसर मिल सकता है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1.14 फीसदी बढ़कर 240 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.

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