क्लाइंट फंड का मिसयूज और गलत रिपोर्टिंग कर रहा था ये ब्रोकरेज, SEBI का कड़ा एक्शन; नया असाइमेंट लेने से किया बैन

SEBI ने नियमों के गंभीर उल्लंघन पर स्टॉक ब्रोकर Prabhudas Lilladher को कुछ दिन के लिए नए असाइनमेंट लेने से रोक दिया है. जांच में क्लाइंट फंड के दुरुपयोग, गलत मार्जिन रिपोर्टिंग, देर से सेटलमेंट और ब्रोकरेज में अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी.

SEBI Image Credit: tv9

बाजार नियामक SEBI ने नियमों के उल्लंघन पर स्टॉक ब्रोकिंग फर्म Prabhudas Lilladher Pvt Ltd के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. निवेशकों के फंड, मार्जिन रिपोर्टिंग और ब्रोकरेज नियमों में अनियमितता के गंभीर आरोपों के बीच SEBI ने कंपनी को 15 दिसंबर 2025 से एक हफ्ते तक कोई नया असाइनमेंट या कॉन्ट्रैक्ट लेने से रोक दिया है.

SEBI का आदेश, 15 दिसंबर से सात दिन की रोक

SEBI के मुख्य महाप्रबंधक एन. मुरुगन के जारी आदेश में कहा गया है कि Prabhudas Lilladher अगले सात दिनों तक नए असाइनमेंट या किसी नई स्कीम की शुरुआत नहीं कर सकेगा. यह कार्रवाई अप्रैल 2021 से अक्टूबर 2022 की अवधि में SEBI, NSE, BSE और MCX की संयुक्त जांच के बाद की गई है. जांच में पाया गया कि ब्रोकिंग फर्म ने कई मुख्य नियमों का पालन नहीं किया.

क्लाइंट फंड के दुरुपयोग के गंभीर आरोप

SEBI की जांच में सबसे बड़ा आरोप क्लाइंट फंड के गलत इस्तेमाल का रहा. जुलाई 2021 में तीन अलग-अलग तारीखों पर कंपनी के क्लाइंट बैंक बैलेंस और कुल क्लाइंट क्रेडिट के बीच लगभग ₹2.70 करोड़ का अंतर पाया गया, जिसे SEBI ने क्लाइंट मनी के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बताया. कंपनी ने दलील दी कि ये विसंगतियां COVID-19 के दौरान तकनीकी या सॉफ्टवेयर एरर की वजह से हुईं, लेकिन SEBI ने इन्हें अस्वीकार कर दिया. आदेश में कहा गया कि ऐसे अंतर को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सीधे क्लाइंट सुरक्षा के मूल नियमों का उल्लंघन है.

जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी ने हजारों ग्राहकों के खाते निर्धारित समय में सेटल नहीं किए.

SEBI ने कहा कि शिकायत न होने पर भी देरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि नियम का उद्देश्य क्लाइंट के निष्क्रिय फंड के संभावित दुरुपयोग को रोकना है.

मार्जिन रिपोर्टिंग और गलत शुल्क वसूली भी सामने आई

कई क्लाइंट्स के पीक और एंड-ऑफ-डे मार्जिन गलत रिपोर्ट किए गए. एक मामले में लगभग 55.46 लाख रुपये का पीक मार्जिन कम जमा किया गया. क्लियरिंग कॉरपोरेशनों द्वारा लगाए गए मार्जिन पेनल्टी को क्लाइंट्स से वसूला भी गया और कई मामलों में रिफंड नहीं किया गया, जबकि एक्सचेंज ने स्पष्ट रूप से ऐसा न करने का निर्देश दिया था.

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साथ ही, कई ग्राहकों की पूरी तरह भुगतान की गई सिक्योरिटीज को उनके डिमैट अकाउंट में ट्रांसफर करने की बजाय ‘Client Unpaid Securities Account’ में रखा गया. कुछ मामलों में एक्सपोजर रिपोर्टिंग, ब्रोकरेज कैप और KRA अपडेट में भी गलतियां मिलीं. SEBI ने माना कि कंपनी ने बाद में कुछ सुधार किए और आंशिक रिफंड भी दिया, लेकिन लगातार हुई गलतियों ने नियामक को यह कदम उठाने पर मजबूर किया. SEBI ने इसे “सुपरवाइजरी और डिटरेंट” कार्रवाई बताया, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोका जा सके.

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