SEBI का बड़ा फैसला! 1 अगस्त से फिर शुरू होगा ओपन मार्केट शेयर बायबैक; जानिए कौन बेच सकेगा?
SEBI ने 1 अगस्त से ओपन मार्केट शेयर बायबैक की सुविधा फिर से शुरू करने का फैसला किया है. अब लिस्टेड कंपनियां टेंडर ऑफर के साथ-साथ स्टॉक एक्सचेंज के जरिए भी अपने शेयर वापस खरीद सकेंगी. इस फैसले से कंपनियों को ज्यादा लचीलापन मिलेगा, जबकि निवेशकों के लिए भी शेयर बेचने का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा.
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने स्टॉक एक्सचेंज के जरिए होने वाले ‘ओपन मार्केट शेयर बायबैक’ को दोबारा मंजूरी दे दी है. यह नया नियम 1 अगस्त से लागू होने जा रहा है. सेबी का यह फैसला उसके पुराने रुख के बिल्कुल उलट है, जिसमें उसने इस रूट को धीरे-धीरे बंद करने की बात कही थी. इस फैसले से कंपनियों को अपने शेयर वापस खरीदने में आसानी होगी, वहीं आम निवेशकों को भी अपनी हिस्सेदारी बेचने का एक और बेहतरीन मौका मिलेगा.
सेबी ने अपना फैसला क्यों बदला?
इससे पहले ओपन मार्केट बायबैक के जरिए कंपनियां सीधे शेयर बाजार से धीरे-धीरे अपने शेयर खरीदती थीं. लेकिन टैक्स के अलग-अलग नियमों और निवेशकों के बीच असमानता की वजह से सेबी ने इसे बंद करने का फैसला किया था. अब टैक्स नियमों में सुधार (Uniform Taxation) होने के बाद, सेबी ने इसे ‘टेंडर ऑफर’ के साथ एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में दोबारा शुरू कर दिया है. इसका मकसद कंपनियों की लागत कम करना, प्रक्रिया को तेज करना और बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान शेयर की कीमतों को सहारा देना है.
क्या होता है शेयर बायबैक?
जब कोई लिस्टेड कंपनी अपने ही मौजूदा शेयरधारकों से खुद के शेयर वापस खरीदती है, तो उसे शेयर बायबैक कहते हैं. आमतौर पर कंपनी इन खरीदे गए शेयरों को रद्द (Cancel) कर देती है, जिससे बाजार में कंपनी के कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है.
कैसे काम करेगा ओपन मार्केट बायबैक?
आमतौर पर टेंडर ऑफर में कंपनियां एक तय कीमत पर शेयर वापस खरीदती हैं. लेकिन ओपन मार्केट बायबैक इससे अलग है. यह सामान्य शेयर बाजार की ट्रेडिंग की तरह काम करता है:
- सबसे पहले कंपनी बायबैक का ऐलान करती है.
- इसमें वह बताती है कि वह अधिकतम कितने शेयर खरीदेगी, कुल कितना पैसा खर्च करेगी और यह प्रोग्राम कितने समय तक चलेगा.
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कौन ले सकता है इसमें हिस्सा?
जिस किसी के पास भी उस कंपनी के शेयर हैं, वह इस ओपन मार्केट बायबैक में हिस्सा ले सकता है. हालांकि, इसमें इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि कंपनी आपके ही शेयर खरीदेगी. चूंकि यह पूरी प्रक्रिया सामान्य बाजार ट्रेडिंग की तरह होती है, इसलिए आपका सेल ऑर्डर तभी एग्जीक्यूट होगा जब वह कंपनी या बाजार के किसी अन्य खरीदार के बाय ऑर्डर से मैच करेगा.