Semicon 2.0 से इन 3 कंपनियों की खुल सकती है किस्मत, सरकार के 1.3 लाख करोड़ रुपये के दांव से मिलेगा फायदा! रखें नजर
Semicon 2.0 के लिए भारत सरकार ने 1.3 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है, जिसके बाद Gujarat Fluorochemicals, Navin Fluorine International और Stallion India Fluorochemicals जैसी कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं. ये कंपनियां सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले फ्लोरोपॉलिमर, हाई प्योरिटी केमिकल्स, स्पेशलिटी गैस और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराती हैं.
Semiconductor Stocks: भारत सरकार ने हाल ही में Semicon 2.0 कार्यक्रम को करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी है. इस घोषणा के बाद निवेशकों का ध्यान केवल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) लगाने वाली कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि उन कंपनियों पर भी केंद्रित हो गया है, जो चिप निर्माण के लिए जरूरी केमिकल्स, गैस, फ्लोरोपॉलिमर और अन्य विशेष सामग्री उपलब्ध कराती हैं. दरअसल, सेमीकंडक्टर फैक्ट्री केवल चिप बनाने वाली मशीनों से नहीं चलती. इसके लिए अल्ट्रा-हाई प्योरिटी केमिकल्स, स्पेशलिटी गैस, फ्लोरोपॉलिमर और एडवांस कूलिंग फ्लूड जैसी सामग्रियों की जरूरत होती है. ऐसे में कई कंपनियां इस अवसर का लाभ उठाने की तैयारी कर रही हैं.
Gujarat Fluorochemicals का सेमीकंडक्टर पर बड़ा दांव
Gujarat Fluorochemicals (GFL) खुद चिप नहीं बनाती, लेकिन कंपनी सेमीकंडक्टर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले फ्लोरोपॉलिमर और हाई-परफॉर्मेंस मटेरियल तैयार करती है. इसके उत्पादों में PTFE, PFA, PVDF, FEP और FKM जैसे विशेष मटेरियल शामिल हैं, जिनका उपयोग चिप निर्माण में किया जाता है. कंपनी ने सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए हाई-प्योरिटी इलेक्ट्रॉनिक स्पेशलिटी केमिकल्स के विकास पर 222 करोड़ रुपये और फ्लोरोपॉलिमर क्षमता विस्तार पर 250 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बनाई है.
यानी इस क्षेत्र में कुल 472 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. मैनेजमेंट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक मौजूदा क्षमता का लगभग पूरी तरह उपयोग होने लगेगा, इसलिए विस्तार जरूरी है. कंपनी को फ्लोरोपॉलिमर कारोबार में 15-20 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.50 फीसदी बढ़कर 4,144 रुपये पर पहुंच गया है.
Navin Fluorine का इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड केमिकल्स पर फोकस
Navin Fluorine International अब सेमीकंडक्टर और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स को अपने अगले ग्रोथ इंजन के रूप में देख रही है. कंपनी ने स्विट्जरलैंड की Buss ChemTech के साथ तकनीकी साझेदारी की है, ताकि चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अल्ट्रा-हाई प्योरिटी केमिकल्स का उत्पादन किया जा सके. कंपनी ने दहेज यूनिट में 450 करोड़ रुपये की लागत से नया Anhydrous Hydrofluoric Acid (AHF) प्लांट स्थापित किया है, जहां से Electronic Grade HF और Solar Grade HF का उत्पादन शुरू हो चुका है.
यही केमिकल सिलिकॉन वेफर की सफाई और एचिंग के लिए इस्तेमाल होता है, जो माइक्रोचिप निर्माण की अहम प्रक्रिया है. इसके अलावा, कंपनी ने Chemours के साथ 120 करोड़ रुपये की साझेदारी कर सेमीकंडक्टर हार्डवेयर कूलिंग फ्लूड बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.93 फीसदी गिरकर 7,579 रुपये पर पहुंच गया है.
Stallion India बना रही स्पेशलिटी गैस प्लेटफॉर्म
Stallion India Fluorochemicals रेफ्रिजरेंट और इंडस्ट्रियल गैस के कारोबार में सक्रिय है, लेकिन अब कंपनी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए हाई-प्योरिटी गैस बाजार में उतर रही है. कंपनी अपने Khalapur और Mambattu यूनिट में लिक्विड हीलियम और सेमीकंडक्टर गैस प्रोसेसिंग क्षमता विकसित कर रही है. कंपनी ने कतर के तेल क्षेत्रों से लिक्विड हीलियम की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए Sharjah Oxygen Company के साथ लॉन्गटर्म समझौता किया है.
मैनेजमेंट का अनुमान है कि इस विस्तार से कंपनी के मार्जिन में 3 से 4 फीसदी तक सुधार हो सकता है. कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 3,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 500 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल करना है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1.28 फीसदी बढ़कर 214 रुपये पर पहुंच गया है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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