Bull के ऊपर चढ़े Bear, इन 5 कारणों से भरभराकर गिरे निफ्टी-सेंसेक्स, स्वाहा हुए ₹3 लाख करोड़
मंगलवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी गई. सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी 25,460 के करीब आ गया. आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत, एआई से जुड़ी चिंताएं, टैरिफ अनिश्चितता और कमजोर रुपये ने बाजार पर दबाव बनाया. शुरुआती कारोबार में निवेशकों की संपत्ति ₹2.94 लाख करोड़ तक घटी.
मंगलवार (24 फरवरी) को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूटकर दिन के निचले स्तर 82,410 तक पहुंच गया जबकि निफ्टी 25,460.70 तक गिर गया. इस गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति करीब ₹2.94 लाख करोड़ घटकर बीएसई का मार्केट कैप करीब ₹466 लाख करोड़ रह गया. बाजार में आईटी और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली से दबाव बढ़ा. आइये जानते हैं कि इस गिरावट के पीछे की 5 बड़ी वजह क्या हैं?
गिरावट के प्रमुख कारण
आईटी शेयरों में बिकवाली सबसे बड़ा कारण
आईटी सेक्टर में जोरदार गिरावट देखने को मिली। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे शेयर 2-3% तक टूटे. एनिफ्टी आईटी इंडेक्स भी 2% से ज्यादा गिरा. इसकी वजह यह है कि दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर नई चिंताएं बढ़ना. अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने दावा किया है कि उसका क्लॉड कोड टूल पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को अपडेट करने की लागत और जटिलता को काफी कम कर सकता है. इससे पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर असर की आशंका बढ़ी है.
वहीं, RoDTEP लाभ में 50% कटौती के सरकारी फैसले से टेक्सटाइल शेयरों में गिरावट आई. Trident, Gokaldas Exports, Welspun Living और Kitex Garments जैसे शेयर दबाव में दिखे
ग्लोबल बाजारों से कमजोर संकेत और टैरिफ
अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा. डाओ जोंस 800 अंकों से ज्यादा टूटा, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 भी 1% से अधिक गिरे. एआई से जुड़ी चिंताएं और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों का मूड खराब किया. अमेरिका में नए टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयान ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई.
डेरिवेटिव्स एक्सपायरी
निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा. ट्रेडर्स की पोजिशन कटने और नई हेजिंग के चलते बिकवाली तेज हुई जिससे इंडेक्स पर अतिरिक्त दबाव बना.
कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली
रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 90.95 के आसपास पहुंच गया. कमजोर रुपये से विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है और आयात महंगा होने से कंपनियों की लागत पर असर पड़ता है, जिससे बाजार भावना कमजोर हुई.
जियो-पॉलिटिकल तनाव
अमेरिका-ईरान तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया। वैश्विक अनिश्चितता के बीच जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकलता दिखा.
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