भारतीय कंपनियां इस साल 9.1% तक कर सकती हैं इंक्रीमेंट, जानें- किस सेक्टर में सबसे अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद

ऑटोमोटिव और व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर्स में भी औसत से थोड़ी ज्यादा सैलरी हाइक मिलने का अनुमान है. ये धीमी बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इंडिया इंक लेबर कोड लागू होने के असर से जूझ रहा है.

सैलरी Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

भारतीय कॉरपोरेट 2026 में अपने कर्मचारियों को 9.1 फीसदी सैलरी हाईक दे सकती है. कंसल्टिंग फर्म Aon की एक स्टडी के मुताबिक, फर्म के 32वें सालाना सैलरी इंक्रीज और टर्नओवर सर्वे 2025-26 इंडिया के मुताबिक, 2025 में असल सैलरी इंक्रीज 8.9% तक पहुंच गई, जो अनुमानित 9.2% से कम है. कंपनी ने 45 इंडस्ट्रीज में 1,400 से ज्यादा ऑर्गनाइजेशन्स का सर्वे किया.

किस सेक्टर में बढ़ सकती है सबसे अधिक सैलरी?

सैलरी इंक्रीज इंडस्ट्री के हिसाब से अलग-अलग होने का अनुमान है, जिसमें रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स के साथ-साथ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) में 2026 में सबसे अधिक सैलरी ग्रोथ होने की उम्मीद है. ऑटोमोटिव और व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर्स में भी औसत से थोड़ी ज्यादा सैलरी हाइक मिलने का अनुमान है.

जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता

Aon के लिए टैलेंट सॉल्यूशंस, इंडिया के पार्टनर और रिवॉर्ड्स कंसल्टिंग लीडर, रूपांक चौधरी ने कहा, ‘मजबूत घरेलू डिमांड, कम होती महंगाई और नए ट्रेड एग्रीमेंट, मीडियम टर्म के लिए पॉजिटिव नजरिए में मदद कर रहे हैं, भले ही कंपनियां जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता से जूझ रही हों.’

चौधरी ने कहा, ‘रियल एस्टेट, NBFC और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में मजबूत सैलरी ग्रोथ एम्प्लॉयर्स के जरूरी टैलेंट में इन्वेस्ट करने और ज्यादा सस्टेनेबल कम्पनसेशन स्ट्रेटेजी बनाने के इरादे को दिखाती है.’ पिछले 10 साल में सैलरी में बढ़ोतरी लगातार कम हुई है. उदाहरण के लिए, Aon के अनुसार, 2015 में, इंडिया इंक ने एवरेज 10.4 फीसदी की इंक्रीमेंट की थी.

लेबर कोड का असर

ये धीमी बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इंडिया इंक लेबर कोड लागू होने के असर से जूझ रहा है. फरवरी में छपी मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की टॉप 30 में से 25 कंपनियों को फिस्कल ईयर 2026 में तीसरी तिमाही के मुनाफे में करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. ऐसा इसलिए है, क्योंकि लेबर कोड में एम्प्लॉयर और एम्प्लॉई दोनों के लिए ज्यादा सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन जरूरी किया गया है, साथ ही रिटायरमेंट बेनिफिट्स को भी बढ़ावा दिया गया है.

टैरिफ रीस्ट्रक्चरिंग, ग्लोबल ट्रेड वॉर और IT सेक्टर में नौकरियों को खत्म करने वाले AI बूम जैसी चुनौतियों के बीच सैलरी में यह नरमी आई है. इससे पैदा हुई अनिश्चितता ने टेक्नोलॉजी स्टॉक्स को बिकवाली की ओर धकेल दिया है, जिससे कॉरपोरेट सेंटीमेंट और खराब हो गया है.

टॉप-परफॉर्मिंग सेक्टर्स

EY की फ्यूचर ऑफ पे 2026 रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में सैलरी 2026 में 9.1% बढ़ने की संभावना है. रिपोर्ट में फाइनेंशियल सर्विसेज, ई-कॉमर्स, और लाइफ साइंसेज और फार्मास्यूटिकल्स को टॉप-परफॉर्मिंग सेक्टर्स के तौर पर हाईलाइट किया गया है, जबकि इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर में और मामूली इंक्रीमेंट की उम्मीद है. इसने स्किल-बेस्ड सैलरी की ओर बढ़ते बदलाव को भी हाईलाइट किया, जिसमें AI और डिजिटल कैपेबिलिटीज़ को काफी प्रीमियम मिल रहा है.

Aon के लिए टैलेंट सॉल्यूशंस, इंडिया के एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी ने कहा, ‘भारत के लेबर कोड अब नोटिफाई हो गए हैं, इसलिए ऑर्गनाइजेशन दशकों में सबसे बड़े रेगुलेटरी बदलावों में से एक से गुजर रहे हैं.’

वर्कफोर्स का भरोसा

ओटवानी ने कहा, ‘वेतन की स्टैंडर्ड परिभाषा और बढ़े हुए सोशल सिक्योरिटी प्रोवीजन कई एम्प्लॉयर को सैलरी का फिर से आकलन करने और उसे रीस्ट्रक्चर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इन बदलावों के बारे में साफ बातचीत वर्कफोर्स का भरोसा और स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होगी.’

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