GPA या एग्रीमेंट पर ली है प्रॉपर्टी? जल्दी करा लें ये जरुरी काम वरना छिन सकता है आपका मालिकाना हक

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ GPA या एग्रीमेंट टू सेल के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक साबित नहीं होता. बिना रजिस्टर्ड सेल डीड के विवाद में अधिकार खो सकते हैं. विशेषज्ञों ने ऐसे खरीदारों को जल्द रजिस्टर्ड कंवेयंस डीड बनवाकर टाइटल नियमित करने और परिवारिक बंटवारे को भी औपचारिक रूप देने की सलाह दी है.

प्रॉपर्टी टाइटल, Image Credit: money9live.com

अगर आपने घर या जमीन सिर्फ GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) या एग्रीमेंट टू सेल के आधार पर खरीदी है तो आपको सावधान रहने की जरुरत है. दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले ने साफ कर दिया है कि ऐसे दस्तावेजों से कानूनी मालिकाना हक साबित नहीं होता. बिना रजिस्टर्ड सेल डीड के आप भविष्य में अपनी संपत्ति पर दावा खो सकते हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को दिए एक निर्णय में कहा कि वैध रजिस्टर्ड टाइटल डीड के बिना संपत्ति पर मालिकाना हक साबित नहीं किया जा सकता.

क्यों चर्चा में आया मामला

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक व्यक्ति अपनी पैतृक संपत्ति के बंटवारे का दावा कोर्ट में साबित नहीं कर पाया. उसने मालिकाना हक के सबूत के तौर पर सिर्फ एग्रीमेंट टू सेल, GPA और रसीद पेश की थी. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ये दस्तावेज भारतीय संपत्ति कानून के तहत स्वामित्व देने वाले वैध कंवेयंस दस्तावेज नहीं माने जाते. सुप्रीम कोर्ट भी पहले कई फैसलों में साफ कर चुका है कि रजिस्टर्ड सेल डीड के बिना एग्रीमेंट टू सेल से मालिकाना हक नहीं मिलता.

क्या करना जरुरी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के पास अभी भी सिर्फ GPA या एग्रीमेंट टू सेल के आधार पर संपत्ति है उन्हें जल्द से जल्द अपने टाइटल को नियमित कर लेना चाहिए. इसके लिए सबसे जरूरी है कि असली मालिक से विधिवत सेल डीड, गिफ्ट डीड, रिलिंक्विशमेंट डीड या पार्टिशन डीड जैसे कंवेयंस दस्तावेज बनवाकर रजिस्ट्रेशन कराया जाए. यदि विक्रेता रजिस्टर्ड डीड करने से मना कर दे, तो खरीदार कोर्ट में ‘स्पेसिफिक परफॉर्मेंस’ का मुकदमा दायर कर सकता है, ताकि विक्रेता को रजिस्टर्ड सेल डीड करने के लिए बाध्य किया जा सके.

पैतृक या कॉपार्सनरी संपत्तियों के मामले में भी सावधानी जरुरी

विशेषज्ञों ने पैतृक या कॉपार्सनरी संपत्तियों के मामलों में भी सावधानी बरतने की सलाह दी है. परिवार में मौखिक बंटवारा हुआ हो तो उसे भी रजिस्टर्ड पार्टिशन डीड के जरिए औपचारिक रूप देना जरूरी है. साथ ही राजस्व रिकॉर्ड, म्यूटेशन एंट्री और टाइटल की पूरी चेन सही और स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे समय तक किसी संपत्ति पर कब्जा या उपयोग करना अपने आप में मालिकाना हक साबित नहीं करता. मालिकाना हक सिर्फ कानूनी रूप से मान्य रजिस्टर्ड दस्तावेजों के आधार पर ही तय होता है.

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