घर खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! UP-RERA ने आसान किए प्रॉपर्टी ट्रांसफर नियम; बिल्डर्स की मनमानी पर लगेगी लगाम
UP-RERA के नए नियमों से उत्तर प्रदेश में होमबायर्स को बड़ी राहत मिली है. अब अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी, जिससे बिल्डर्स की मनमानी पर लगाम लगेगी. साथ ही प्रॉपर्टी ट्रांसफर प्रक्रिया को आसान और सस्ता बना दिया गया है, जहां फैमिली ट्रांसफर पर अधिकतम 1,000 रुपये और नॉन-फैमिली ट्रांसफर पर 25,000 रुपये की सीमा तय की गई है.
UP RERA Rules 2026: उत्तर प्रदेश में घर खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. UP-RERA ने प्रॉपर्टी से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं, जिससे अब होमबायर्स के अधिकार पहले से ज्यादा मजबूत हो गए हैं. खास बात यह है कि अब अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी और प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है. लंबे समय से निवेशकों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, उन्हें दूर करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स पर अब होगी कार्रवाई
अब तक अगर कोई बिल्डर प्रोजेक्ट को RERA में रजिस्टर नहीं करता था, तो घर खरीदने वालों के पास शिकायत करने का स्पष्ट रास्ता नहीं होता था. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों के तहत अब ऐसे मामलों में भी UP-RERA के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी. इसका मतलब है कि जो बिल्डर्स नियमों से बचने के लिए प्रोजेक्ट को रजिस्टर नहीं करते थे, अब वे सीधे नियामक के दायरे में आएंगे. इससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है.
नियम तोड़ने पर बिल्डर्स पर सख्ती
अगर कोई बिल्डर बिना रजिस्ट्रेशन के प्रोजेक्ट बेचता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो अब उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. UP-RERA यह जांच करेगा कि प्रोजेक्ट को कानून के तहत रजिस्टर होना चाहिए था या नहीं. अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो बिल्डर पर पेनल्टी लगाई जा सकती है या अन्य कार्रवाई की जा सकती है. यह कदम निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
प्रॉपर्टी ट्रांसफर हुआ आसान और सस्ता
नए नियमों के तहत प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है. पहले बिल्डर्स ट्रांसफर के नाम पर मनमाने चार्ज वसूलते थे, लेकिन अब इस पर सीमा तय कर दी गई है. अगर किसी प्रॉपर्टी के मालिक की मृत्यु हो जाती है और संपत्ति परिवार के सदस्य को ट्रांसफर की जाती है, तो बिल्डर अधिकतम 1,000 रुपये तक ही प्रोसेसिंग फीस ले सकता है. इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा.
नॉन-फैमिली ट्रांसफर पर भी सीमा तय
अगर प्रॉपर्टी किसी गैर-परिवार सदस्य को ट्रांसफर की जाती है, तो बिल्डर अधिकतम 25,000 रुपये तक ही चार्ज ले सकता है. पहले इस तरह के मामलों में बिल्डर्स प्रॉपर्टी की कीमत का प्रतिशत या भारी-भरकम फीस वसूलते थे. नए नियम से अब ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निश्चितता आएगी.
होमबायर्स के लिए बड़ा फायदा
UP-RERA के इन बदलावों से होमबायर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. अब उनके पास शिकायत दर्ज कराने का स्पष्ट अधिकार होगा, ट्रांसफर आसान होगा और बिल्डर्स की मनमानी पर भी लगाम लगेगी. कुल मिलाकर, यह बदलाव रियल एस्टेट सेक्टर को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और निवेशकों के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
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