गिरावट के बाद मौका? 51% तक चढ़ सकता है Suzlon, ICICI Securities ने दोहराई BUY रेटिंग; जानें टारगेट प्राइस
ICICI Securities ने Suzlon Energy पर BUY रेटिंग के साथ नया टारगेट दिया है, जो मौजूदा स्तर से 51 फीसदी अपसाइड दर्शाता है. 6.4 GW की ऑर्डर बुक, मजबूत बैलेंस शीट और ‘Suzlon 2.0’ रणनीति कंपनी के लिए बड़े ग्रोथ ट्रिगर माने जा रहे हैं, हालांकि एग्जीक्यूशन और ऑर्डर इनफ्लो से जुड़े जोखिम बने हुए हैं. जानें कैसा है शेयरों का प्रदर्शन.
Suzlon Share Target Price Brokerage Rating: ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities ने Suzlon Energy पर अपनी ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए शेयर के लिए 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. मौजूदा बाजार भाव 43 रुपये के आसपास है, ऐसे में ब्रोकरेज के मुताबिक इस स्टॉक में करीब 51 फीसदी तक की संभावित तेजी देखी जा सकती है. इसके लिए ब्रोकरेज फर्म ने कई वजहें भी बताई है. इसी के साथ कंपनी ने कुछ रिस्क फैक्टर भी बताए हैं. आइए विस्तार से सभी पहलुओं की जानकारी देते हैं.
विंड एनर्जी में मजबूत पकड़, ऑर्डर बुक 6.4 गीगावॉट
पिछले तीन साल में Suzlon ने भारत के विंड पावर सेक्टर में अपनी स्थिति काफी मजबूत की है. कंपनी एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड विंड एनर्जी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है और इसका मैन्युफैक्चरिंग बेस काफी हद तक घरेलू है. भारत में रिन्यूएबल एनर्जी (RE) पर बढ़ते फोकस, खासकर हाइब्रिड और FDRE (Firm and Dispatchable Renewable Energy) प्रोजेक्ट्स की मांग ने विंड पावर को नई रफ्तार दी है.
जनवरी 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक बढ़कर 6.4 गीगावॉट पर पहुंच गई है. यह FY25 के अनुमानित विंड टरबाइन डिलीवरी वॉल्यूम का करीब 4 गुना है. इससे कंपनी को अगले दो साल से ज्यादा की मजबूत एग्जीक्यूशन विजिबिलिटी मिलती है. ब्रोकरेज का मानना है कि मध्यम अवधि में विंड सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहेगी.
स्टॉक का हाल?
Suzlon Energy के शेयरों के प्रदर्शन की बात करें तो वह पिछले कुछ समय से काफी दबाव में नजर आए. शुक्रवार, 27 फरवरी को कंपनी के शेयर 1.39 फीसदी टूटकर 42.67 रुपये पर बंद हुए. इससे पहले यानी हफ्ते भर में स्टॉक का भाव 5 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. 6 महीने के दौरान शेयर में 25 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, लॉन्ग टर्म में स्थिति थोड़ी बेहतर होती हुई दिख रही. साल भर के दौरान स्टॉक का भाव 22 फीसदी टूटा है लेकिन 3 साल के दौरान इसमें 408 फीसदी की तेजी आई है. वहीं, 5 साल के दौरान सुजलॉन के शेयरों का भाव 680 फीसदी तक चढ़ चुका है. कंपनी का मार्केट कैप 58,866 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. स्टॉक अपने 52वीक लो (42.45 रुपये) स्तर के काफी करीब बंद हुआ.
‘Suzlon 2.0’ के साथ नई दिशा
Suzlon अब सिर्फ विंड टरबाइन कंपनी नहीं रहना चाहती. कंपनी ने ‘Suzlon 2.0’ विजन की घोषणा की है, जिसके तहत वह खुद को एक डाइवर्सिफाइड रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी में बदलना चाहती है. नई रणनीति के तहत कंपनी विंड के साथ-साथ सोलर और BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में भी उतरने की योजना बना रही है. हाल के समय में विंड प्रोजेक्ट्स में ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन अधिग्रहण और राइट ऑफ वे जैसी दिक्कतें सामने आई हैं. Suzlon का फोकस अब ऐसे प्रोजेक्ट डेवलपमेंट मॉडल पर है, जो ग्राहकों के लिए इन जोखिमों को पहले से कम कर सके. कंपनी एक्सपोर्ट अवसरों पर भी विचार कर रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ग्रोथ के नए रास्ते खुल सकते हैं.
मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव
‘Suzlon 2.0’ को सफल बनाने के लिए कंपनी ने लीडरशिप स्ट्रक्चर में अहम बदलाव किए हैं. एक नया स्ट्रैटेजिक बॉडी- Group Executive Council (GEC) बनाया गया है. इसमें चेयरमैन और MD विनोद टांटी, एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गिरीश टांटी और मौजूदा CEO जे. पी. चालासानी शामिल हैं. इसके अलावा अजय कपूर को नया CEO नियुक्त किया गया है, जो मौजूदा बिजनेस की ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे, जबकि GEC नई रणनीतियों और डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस करेगा. ब्रोकरेज का मानना है कि यह बदलाव कंपनी को अगले ग्रोथ फेज में ले जा सकता है.
कर्ज से उबरकर अब नेट कैश पोजीशन में
एक समय भारी कर्ज में डूबी Suzlon अब मजबूत वित्तीय स्थिति में लौट चुकी है. FY20 में कंपनी पर करीब 12,000 करोड़ रुपये (120 अरब रुपये) का कर्ज था, जिसे पिछले कुछ वर्षों में डेट-टू-इक्विटी कन्वर्जन और अन्य कदमों के जरिए काफी हद तक कम किया गया. Q2FY24 में 2,000 करोड़ रुपये के इक्विटी रेज के बाद कंपनी की बैलेंस शीट और मजबूत हुई. सितंबर 2024 तक कंपनी नेट कैश पॉजिटिव हो गई और उसके पास करीब 1,300 करोड़ रुपये का कैश रिजर्व था. इसके बाद भी नकदी स्थिति में और सुधार हुआ है.
सरकार की नीतियों से मिलेगा सपोर्ट
सरकार ने हर साल कम से कम 10 गीगावॉट विंड कैपेसिटी की टेंडर जारी करने का फैसला किया है. इसके साथ ही इंडस्ट्री की ओर से 24×7 बिजली सप्ताई की मांग भी बढ़ रही है. रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स अब सिर्फ सोलर या विंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाइब्रिड, RTC (Round the Clock) और FDRE मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं. ब्रोकरेज का मानना है कि ऐसे जटिल प्रोजेक्ट्स में विंड की भूमिका अहम होगी और Suzlon, जो पहले से मार्केट लीडर है, इसका बड़ा फायदा उठा सकती है.
वैल्यूएशन और रिस्क
ICICI Securities ने Suzlon पर BUY रेटिंग दोहराते हुए 65 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है. यह FY28 के अनुमानित EPS के 32 गुना वैल्यूएशन पर आधारित है. मजबूत ऑर्डर बुक, बेहतर बैलेंस शीट और रिन्यूएबल सेक्टर में सकारात्मक माहौल को देखते हुए ब्रोकरेज स्टॉक पर सकारात्मक नजरिया रखता है. हालांकि कुछ जोखिम भी बने हुए हैं. विंड टरबाइन एग्जीक्यूशन में किसी तरह की देरी, ऑर्डर इनफ्लो में कमी या प्रोजेक्ट डिले स्टॉक के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं.
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