विदेशी निवेशकों को वापस लाने के लिए सरकार का बड़ा कदम, टैक्स में कटौती की तैयारी; अध्यादेश का रास्ता साफ
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में, इस छूट का रास्ता साफ करने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन करने वाले एक अध्यादेश को जारी करने की मंजूरी दे दी गई. सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स की दर कम करने के लिए अध्यादेश का ही रास्ता अपनाया था.
भारत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा सरकारी सिक्योरिटीज में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म करने की तैयारी में है. यह कदम देश में विदेशी कैपिटल के फ्लो को बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था पर ईरान युद्ध के प्रभावों को कम करने की कोशिश कर रही है.
कैबिनेट की बैठक में छूट का रास्ता साफ
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से ईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में, इस छूट का रास्ता साफ करने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन करने वाले एक अध्यादेश को जारी करने की मंजूरी दे दी गई. राष्ट्रपति की ओर से अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही एक नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है.
सरकार क्यों उठा रही यह कदम?
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए और कदम उठाए जाने की उम्मीद है. विदेशी निवेशकों को अभी लिस्टेड शेयरों और बॉन्ड पर, जिन्हें उन्होंने 12 महीने से अधिक समय तक अपने पास रखा है, 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना पड़ता है. उन्हें सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20 फीसदी विदहोल्डिंग टैक्स भी देना पड़ता है. सरकार ने 2023 में उनके लिए उपलब्ध 5 फीसदी की रियायती दर खत्म कर दी थी.
सरकार ने 2019 में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर कम करने के लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाया था.
डॉलर आकर्षित करने की तैयारी
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयकर अधिनियम (Income Tax Act) में संशोधन संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दी है।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को राहत
- वर्तमान में FPIs पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG Tax) लगता है.
- नए प्रावधानों के तहत कर बोझ कम करने की कोशिश की जा रही है.
- विदेशी निवेशकों के लिए भी राहत
- विदेशी निवेशकों द्वारा चुकाए जाने वाले ब्याज पर विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) में राहत दी जाएगी.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में गिरावट
- हाल के समय में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Flows) में तेज गिरावट देखने को मिली है.
- विदेशी निवेश प्रवाह का रुख नेगेटिव हो गया है.
इस वर्ष FPIs की बिकवाली
- चालू वर्ष में FPIs नेट सेलर रहे हैं.
- उन्होंने अब तक लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू के शेयरों की बिकवाली की है.
इंडस्ट्री की डिमांड
भारत से लगातार कैपिटल बाहर जाने के बीच, मार्केट के जानकार LTCG टैक्स और सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज पर विदहोल्डिंग टैक्स में कमी करने की मांग कर रहे हैं. यह ताजा कदम ऐसे समय में आया है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का फ्लो नेगेटिव हो गया है और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से कमजोर हुआ है.
इस संबंध में जानकारी रखने वाले ने बताया कि रेगुलेटरों से उम्मीद है कि वे भारतीय बाजारों को विदेशी पूंजी के लिए आकर्षक बनाने की सरकार की कोशिशों को पूरा करने के लिए और कदम उठाएंगे.
कैलेंडर ईयर में कितनी निकासी
इस कैलेंडर ईयर में अब तक, FPIs की निकासी कुल मिलाकर 2.47 लाख करोड़ रुपये रही है, जो 2025 कैलेंडर वर्ष में उनके द्वारा निकाले गए 1.04 लाख करोड़ रुपये से दोगुने से भी अधिक है. 20 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.965 पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद इसमें सुधार आया है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपना सपोर्ट बढ़ा दिया है और अमेरिका-ईरान के बीच शांति प्रयासों के फिर से शुरू होने के बाद तेल की कीमतें नरम पड़ी हैं.
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