Closing Bell: सेंसेक्स निचले स्तर से 1100 से अधिक अंक ऊपर बंद, निफ्टी 23650 के करीब क्लोज, निवेशकों के 3 लाख करोड़ डूबे
Closing Bell: सोमवार, 18 मई को प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी50 बढ़त के साथ बंद हुए. चुनिंदा दिग्गज शेयरों में खरीदारी के चलते इनमें दिन के निचले स्तरों से शानदार वापसी देखने को मिली. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने करेंसी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है.

Closing Bell: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह लुढ़क गए. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 1 फीसदी से अधिक गिर गए. इसकी वजह यह थी कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए, रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया, और कई मैक्रो चिंताओं ने दलाल स्ट्रीट पर ‘बियर्स’ (मंदी लाने वालों) की पकड़ और मजबूत कर दी. हालांकि, दिन के कारोबार बढ़ने के साथ बाजार ने वापसी की और हरे निशान में आ गया.
30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77 अंक या 0.10 फीसदी की बढ़त के साथ 75,315.04 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 6 अंक या 0.03 फीसदी की बढ़त के साथ 23,649.95 पर स्थिर हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स इंडेक्स में टेक महिंद्रा, इंफोसिस और भारती एयरटेल सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वाली कंपनियां रहीं, जबकि टाटा स्टील, पावर ग्रिड और NTPC इस इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियां रहीं.
सेक्टोरल इंडेक्स
सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Media में 2.24 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद Nifty PSU Bank (1.92% की गिरावट), Consumer Durables (1.80% की गिरावट) और Auto (1.71% की गिरावट) का स्थान रहा. Bank Nifty में 0.32% की गिरावट आई. दूसरी ओर, Nifty IT में 2.43% की उछाल देखने को मिली. Pharma सेक्टर में भी आधे प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई.
3 लाख करोड़ का नुकसान
बड़े इंडेक्स में गिरावट के कारण, BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन शुक्रवार को लगभग 461 रुपये लाख करोड़ से गिरकर 458 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जिससे निवेशकों को एक ही सेशन में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
रुपये में गिरावट और कच्चे तेल में तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये की कमजो के चलते, साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण, बाजार का रुख सतर्क बना रहा.
ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड करता रहा, जबकि PTI की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.33 (अस्थायी) के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने करेंसी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि आर्थिक मंदी की चिंताओं के बीच विदेशी निवेशक घरेलू इक्विटी से अपना पैसा निकालना जारी रखे हुए हैं. NSDL के डेटा के अनुसार, FPIs ने 2026 में अब तक 2.16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की भारतीय इक्विटी बेची है, जो पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 में बेची गई 1.66 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी से अधिक है.