AI ट्रेड से दुनिया कमाई कर रही, भारत क्यों रह गया पीछे? पहले ताइवान अब दक्षिण कोरिया ने पछाड़ा
ताइवान का इंडेक्स करीब 55 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जबकि अमेरिका का टेक्नोलॉजी आधारित Nasdaq Composite लगभग 21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर चुका है. इसके विपरीत भारतीय शेयर बाजार में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई है और बाजार एक दशक बाद पहली बार वार्षिक आधार पर नेगेटिव रिटर्न देने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.
भारतीय शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शन के चलते भारत का शेयर बाजार ग्लोबल मार्केट में खिसकता जा रहा है. अब भारत रैंकिंग में सातवें स्थान पर खिसक गया है. AI थीम पर आधारित तेजी के दम पर दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ दिया है. इससे पहले पिछले सप्ताह ताइवान भी भारत को पछाड़कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया था. जहां दुनिया के प्रमुख शेयर बाजार AI-बेस्ड थीम का फायदा उठा रहे हैं, वहीं भारतीय बाजार इस ट्रेंड से कीफी दूर रहा है. इसका असर बाजार प्रदर्शन पर साफ दिखाई दे रहा है. इसका असर ये हुआ कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार को छोड़कर कोरिया और ताइवान के बाजारों में शिफ्ट हो गए. विदेशी निवेशकों की बिकवाली ऐसी रही कि इंडेक्स बुरी तरह पिट गया.
भारत का स्थना खिसका
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जबकि भारत के प्रमुख इंडेक्स NSE का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 4.85 ट्रिलियन डॉलर रह गया है. AI से जुड़ी कंपनियों में तेज़ खरीदारी के चलते कोरियाई बाजार के वैल्यूएशन में इस वर्ष लगभग 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
भारत AI थीम से बाहर कैसे?
जहां दुनिया के प्रमुख शेयर बाजार AI-बेस्ड थीम का फायदा उठा रहे हैं, वहीं भारतीय बाजार इस ट्रेंड से अपेक्षाकृत दूर रहा है. इसका असर बाजार प्रदर्शन पर साफ दिखाई दे रहा है. वर्ष 2026 में अब तक दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स लगभग 99 प्रतिशत चढ़ चुका है. ताइवान का इंडेक्स करीब 55 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जबकि अमेरिका का टेक्नोलॉजी आधारित Nasdaq Composite लगभग 21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर चुका है. इसके विपरीत भारतीय शेयर बाजार में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई है और बाजार एक दशक बाद पहली बार वार्षिक आधार पर नेगेटिव रिटर्न देने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.
महंगे कच्चे तेल और महंगाई की दोहरी चुनौती
भारत के लिए चिंता की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी हैं. तेल कीमतों में बढ़ोतरी के कारण चालू खाते का घाटा (CAD), भुगतान संतुलन (BoP), राजकोषीय घाटा, आर्थिक विकास दर और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
कमजोर मानसून का भी खतरा
भारत मौसम विभाग (IMD) द्वारा मानसून वर्षा का अनुमान दीर्घकालिक औसत (LPA) के 90 प्रतिशत रहने का अनुमान भी बाजार के लिए चिंता का विषय है. यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो इसका असर आर्थिक विकास, महंगाई और कॉरपोरेट आय पर पड़ सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजे अपेक्षाकृत बेहतर रहे, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1FY27) में कंपनियों की आय पर दबाव देखने को मिल सकता है.
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