Vedanta की 4 नई कंपनियों में कौन बनेगी सुपरस्टार? एल्युमिनियम बिजनेस पर बाजार की नजर; सोमवार को दिख सकती है हलचल
वेदांता के डीमर्जर के बाद 4 नई कंपनियां शेयर बाजार में कारोबार शुरू करने जा रही हैं, लेकिन निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड पर है. मजबूत बाजार हिस्सेदारी, कम लागत वाला उत्पादन मॉडल, बढ़ती वैश्विक मांग और 60 लाख टन क्षमता विस्तार के लक्ष्य ने इस बिजनेस को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

Vedanta Aluminium: उद्योगपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता समूह के लिए 15 जून यानि सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. कंपनी के डीमर्जर के बाद अलग हुई चार कंपनियां सोमवार से शेयर बाजार में कारोबार शुरू करने जा रही हैं. हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन चारों में सबसे ज्यादा निवेशकों का ध्यान वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड पर रहेगा.
क्यों खास है वेदांता एल्युमिनियम
विश्लेषकों के अनुसार, वेदांता एल्युमिनियम की सबसे बड़ी ताकत इसका मजबूत मार्केट डोमिनेंस, कम लागत वाला उत्पादन मॉडल और पूरी तरह इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन है. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक कंपनी की प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता 28.8 लाख टन प्रतिवर्ष थी. भारत एल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) की क्षमता को शामिल करने पर कंपनी की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 55 से 60 फीसदी के बीच पहुंच जाती है. कंपनी ने भविष्य में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60 लाख टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य भी रखा है.
बढ़ती मांग और सप्लाई संकट से मिलेगा फायदा
वैश्विक स्तर पर एल्युमिनियम की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं. मौजूदा जियो पॉलिटिकल टेंशन और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण एल्युमिनियम बाजार में सप्लाई डेफिसिट बढ़ सकता है. ऐसे माहौल में वेदांता एल्युमिनियम को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. आईसीआरए के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में एलएमई एल्युमिनियम की औसत कीमत 2,771 डॉलर प्रति टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 फीसदी अधिक थी. मजबूत कीमतों का असर कंपनी के प्रदर्शन पर भी देखने को मिला.
वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत
वित्त वर्ष 2026 में एल्युमिनियम कारोबार का OPBITDA करीब 25,500 करोड़ रुपये रहा. प्रति टन OPBITDA बढ़कर लगभग 1,158 डॉलर तक पहुंच गया. आईसीआरए का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में यह आंकड़ा 1,250 डॉलर प्रति टन से अधिक हो सकता है.
हालांकि, डीमर्जर के बाद एल्युमिनियम कंपनी पर चारों यूनिट में सबसे अधिक कर्ज होगा, लेकिन सबसे ज्यादा EBITDA भी इसी कारोबार से आने की उम्मीद है. कंपनी का नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो करीब 1.3 गुना रहने का अनुमान है, जिसे विशेषज्ञ संतुलित मान रहे हैं.
कैसा है शेयर का हाल
शुक्रवार को वेदांता का शेयर 1.56 फीसदी बढ़कर 309.65 रुपये पर पहुंच गया. पिछले एक सप्ताह में शेयर 0.50 फीसदी गिरा है. वहीं, बीते एक महीने में कंपनी का शेयर 8.69 फीसदी टूट चुका है. पिछले तीन महीनों में इसमें 54.99 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. अब सोमवार को एक बार फिर निवेशकों की नजर कंपनी और उसकी डीमर्ज हुई इकाइयों पर रहने वाली है.
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