वेदांता के 5 टुकड़े… क्या डीमर्जर के बाद बंद हो जाएगी डिविडेंड की बारिश? निवेशकों की बल्ले-बल्ले या बढ़ेगी टेंशन?
वेदांता ने कई बार अपने शेयरधारकों को मोटा डिविडेंड दिया है, जिसकी वजह से रिटेल निवेशकों के बीच इसकी खास पहचान बनी. लेकिन अब कंपनी पांच अलग-अलग कंपनियों में बंटने जा रही है. कंपनी के इस बड़े बदलाव के बाद निवेशकों की नजर अब नए ढांचे और भविष्य की कमाई पर है. डिविडेंड पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका तरीका जरूर बदल सकता है.
Vedanta: वेदांता लंबे समय से उन कंपनियों में शामिल रही है, जिन्हें निवेशक अच्छे डिविडेंड के लिए पसंद करते हैं. कंपनी ने कई बार अपने शेयरधारकों को मोटा डिविडेंड दिया है, जिसकी वजह से रिटेल निवेशकों के बीच इसकी खास पहचान बनी. लेकिन अब कंपनी पांच अलग-अलग कंपनियों में बंटने जा रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डिमर्जर यानी बंटवारे के बाद निवेशकों को पहले जितना डिविडेंड मिलता रहेगा या इसमें कमी आ सकती है.
कंपनी के इस बड़े बदलाव के बाद निवेशकों की नजर अब नए ढांचे और भविष्य की कमाई पर है. डिविडेंड पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका तरीका जरूर बदल सकता है. अब निवेशकों को एक कंपनी की जगह पांच अलग-अलग कंपनियों से डिविडेंड मिलने की संभावना होगी. आइए समझते हैं कि डिमर्जर के बाद वेदांता के शेयरधारकों के लिए क्या बदलने वाला है.
पांच कंपनियों में बंट रही है Vedanta
वेदांता के डिमर्जर के तहत मौजूदा शेयरधारकों को हर एक शेयर पर चार नई कंपनियों का एक-एक शेयर मिलेगा. इनमें Vedanta Aluminium Metal, Vedanta Power, Vedanta Oil and Gas और Vedanta Iron and Steel शामिल हैं. रिकॉर्ड डेट 1 मई 2026 तय की गई थी. हालांकि बाजार बंद होने के कारण शेयरों में डिमर्जर का असर 30 अप्रैल को ही दिखाई दिया था.
डिविडेंड को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
- वेदांता की पहचान हमेशा बड़े डिविडेंड देने वाली कंपनी के रूप में रही है.
- मार्च 2026 में कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 11 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया था.
- मौजूदा स्तर पर कंपनी का डिविडेंड यील्ड 10 प्रतिशत से अधिक है.
- इसी वजह से निवेशक यह जानना चाहते हैं कि कंपनी के बंटवारे के बाद यह मजबूत डिविडेंड जारी रहेगा या नहीं.
अब हर कंपनी की होगी अलग नीति
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक डिमर्जर के बाद सभी नई कंपनियां स्वतंत्र रूप से काम करेंगी. हर कंपनी का अपना कर्ज, निवेश योजना, विकास रणनीति और डिविडेंड नीति होगी. इसका मतलब है कि अब सभी कंपनियां एक जैसा डिविडेंड नहीं देंगी. कुछ कंपनियां कमाई का बड़ा हिस्सा कारोबार बढ़ाने में लगा सकती हैं, जबकि कुछ कंपनियां शेयरधारकों को नकद लाभ देती रह सकती हैं.
किन कारोबारों से मिल सकता है अच्छा डिविडेंड
- विशेषज्ञों का मानना है कि जिंक, ऑयल एंड गैस और आयरन ओर जैसे कारोबार आगे भी अच्छा कैश फ्लो पैदा कर सकते हैं.
- इसलिए इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियां निवेशकों को बेहतर डिविडेंड दे सकती हैं.
- वहीं एल्युमिनियम, पावर और स्टील कारोबार को विस्तार और कर्ज कम करने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ सकती है.
- ऐसे में ये कंपनियां निकट भविष्य में कम डिविडेंड दे सकती हैं.
क्या पूरी तरह खत्म हो जाएगा डिविडेंड?
मिंट कि रिपोर्ट के मुताबिक डिमर्जर के बाद कुल डिविडेंड में अचानक बड़ी गिरावट की संभावना कम है. लेकिन पहले की तरह एक ही कंपनी से बहुत बड़ा और नियमित डिविडेंड मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. अब भविष्य में डिविडेंड इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित कंपनी की कमाई कितनी है, उस पर कितना कर्ज है और वह अपने कारोबार में कितना निवेश करना चाहती है. इसलिए वेदांता के निवेशकों के लिए आगे का दौर पहले की तुलना में थोड़ा अलग रहने वाला है.
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