पश्चिमी एशिया के तनाव ने ऑयल और पेंट कंपनियों के शेयरों को झकझोरा, जानें- एक्सपर्ट क्या दे रहे हैं संकेत

मार्केट एनालिस्ट ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव आया क्योंकि कच्चे तेल की अधिक कीमतों से उनके रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन पर असर पड़ने का खतरा है. पश्चिमी एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से इन्वेस्टर का सेंटीमेंट कमजोर रहा.

तेल कंपनियों के शेयर टूटे. Image Credit: Canva/ Money9

पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी के बीच सोमवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयर गिरकर बंद हुए. यह तनाव दूसरे हफ्ते में भी जारी है. मार्केट एनालिस्ट ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव आया क्योंकि कच्चे तेल की अधिक कीमतों से उनके रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन पर असर पड़ने का खतरा है.

तेल कंपनियों के शेयर टूटे

BSE पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का स्टॉक 6.12 फीसदी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का 5.05 फीसदी और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का 4.30 फीसदी टूटा.

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 14.17 फीसदी बढ़कर USD 105.9 प्रति बैरल पर पहुंच गया.

पेंट कंपनियों के शेयरों में गिरावट

शालीमार पेंट्स के शेयर 4.18 फीसदी, इंडिगो पेंट्स के 3.83 फीसदी, एशियन पेंट्स के 2.75 फीसदी, कंसाई नेरोलैक पेंट्स के 2.09 फीसदी और बर्जर पेंट्स के शेयर 1.88 फीसदी गिरे.

मार्जिन कम होने का खतरा

लाइवलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और फाउंडर हरिप्रसाद के ने कहा, ‘तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर एनर्जी से जुड़े सेक्टर पर पड़ा. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव पड़ा, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन कम होने का खतरा था.’

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर मिलिट्री हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए. मिलिट्री हमले के बाद, ईरान ने UAE, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में मुख्य रूप से इजरायली और अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं.

महंगाई और बाहरी बैलेंस को लेकर चिंताएं

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, ‘जियो-पॉलिटिकल रिस्क बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें USD 100 प्रति बैरल के निशान से ऊपर चली गईं और भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे महंगाई और बाहरी बैलेंस को लेकर चिंताएं बढ़ गईं.’

महंगाई और इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर टेंशन

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च के SVP अजीत मिश्रा ने कहा, ‘पश्चिमी एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से इन्वेस्टर का सेंटीमेंट कमजोर रहा, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया. इसकी वजह से महंगाई और इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर चिंताएं बढ़ गईं, तेल की कीमतों में तेजी, रुपये में कमजोरी और विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) की लगातार बिकवाली ने घरेलू इक्विटी में बिकवाली को और तेज कर दिया.’

यह भी पढ़ें: IPO की राह मे फ्लिपकार्ट ने पूरा किया एक और कदम, जानें- कब तक बाजार में लिस्ट हो सकती है कंपनी

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.