AI से जॉब्स खत्म नहीं, पैदा हो रहे नए अवसर! टेक जॉब्स के साथ ब्लू-कॉलर वर्कर्स की भी बढ़ी डिमांड

अमेरिका में AI जॉब्स बूम तेजी से बढ़ रहा है. AI में बढ़ते इन्वेस्टमेंट से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे टेक जॉब्स की डिमांड बढ़ी है. इसके साथ ही डेटा सेंटर्स, पावर सिस्टम्स और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग और अन्य ब्लू-कॉलर वर्कर्स के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.

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AI Jobs Boom: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर अब तक यह आशंका जताई जाती रही है कि ऑटोमेशन के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म हो सकती हैं. हालांकि, अमेरिका के लेबर मार्केट की हालिया तस्वीर इससे अलग दिखाई दे रही है. AI में बढ़ते इन्वेस्टमेंट के कारण न केवल टेक्नोलॉजी से जुड़े स्पेशलाइज्ड प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ रही है, बल्कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और उसे ऑपरेट करने वाले वर्कर्स के लिए भी नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं.

BBVA Research के हेड ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस और University of Valencia के प्रोफेसर Rafael Domenech के मुताबिक, AI से जुड़े जॉब्स में तेजी देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि फिलहाल ‘जॉब्स एपोकैलिप्स’ टल गया है और AI जॉब्स बूम अब दिखाई दे रहा है.

टेक और डेटा से जुड़े जॉब्स की बढ़ी डिमांड

AI के विस्तार का सबसे सीधा असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मैथ्स, डेटा साइंस, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी एनालिसिस और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है. 2024 के बाद इन क्षेत्रों से जुड़े जॉब्स में बढ़ोतरी हुई है और 2025-26 के दौरान इसमें और तेजी आई है.

सॉफ्टवेयर डेवलपर्स AI इकोनॉमी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले प्रोफेशनल्स में शामिल हैं. इसके अलावा डेटा साइंटिस्ट्स, साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियर्स की डिमांड भी मजबूत बनी हुई है. कंपनियां AI सिस्टम को डेवलप और मैनेज करने के लिए स्पेशलाइज्ड स्किल्स वाले कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं.

AI सिर्फ टेक जॉब्स नहीं, ब्लू-कॉलर रोजगार भी बढ़ा रहा

AI बूम का असर सिर्फ व्हाइट-कॉलर जॉब्स तक सीमित नहीं है. AI सिस्टम को चलाने के लिए बड़े डेटा सेंटर्स, पावर सिस्टम्स, कूलिंग इक्विपमेंट और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है. इन सुविधाओं के निर्माण और संचालन से जुड़े कई ब्लू-कॉलर प्रोफेशनल्स के लिए भी डिमांड बढ़ रही है.

इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर्स, HVAC और प्लंबिंग वर्कर्स, यूटिलिटी-सिस्टम कंस्ट्रक्शन वर्कर्स और कमर्शियल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से फायदा मिल रहा है. इसके अलावा इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों में भी बढ़ती जरूरत के कारण रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं.

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण पैदा होने वाली अतिरिक्त नौकरियों की संख्या 2026 तक करीब 3 लाख तक पहुंचने के करीब है. इसका मतलब है कि AI इन्वेस्टमेंट का असर टेक इंडस्ट्री से निकलकर कंस्ट्रक्शन, एनर्जी और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स तक पहुंच रहा है.

हर नौकरी को AI से खतरा नहीं, लेकिन बदलाव जरूर आएगा

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI के कारण सभी तरह की नौकरियां सुरक्षित हैं. रूटीन और रिपीटेटिव काम करने वाले जॉब रोल्स पर दबाव बना हुआ है. एडमिनिस्ट्रेटिव, बैक-ऑफिस और कस्टमर-सर्विस से जुड़े कुछ रोल्स में आने वाले समय में डिमांड कम हो सकती है.

सबसे बड़ा बदलाव स्किल्स की डिमांड में

AI बूम का एक बड़ा असर यह भी हो सकता है कि कंपनियां कर्मचारियों से किस तरह की स्किल्स चाहती हैं, इसमें तेजी से बदलाव आए. AI के साथ काम करने की क्षमता, डेटा को समझने की स्किल, टेक्निकल नॉलेज और नए टूल्स को इस्तेमाल करने की क्षमता भविष्य के जॉब मार्केट में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है. ऐसे में रिस्किलिंग और अपस्किलिंग की भूमिका भी बढ़ने की उम्मीद है. जिन कर्मचारियों के मौजूदा जॉब रोल्स पर AI का दबाव बढ़ सकता है, उनके लिए नई स्किल्स सीखना जरूरी हो सकता है.

कुल मिलाकर, अमेरिका में AI का असर सिर्फ नौकरियां खत्म करने तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है. AI में बढ़ते इन्वेस्टमेंट से सॉफ्टवेयर, डेटा और साइबर सिक्योरिटी जैसे हाई-स्किल्ड जॉब्स के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े रोजगार भी बढ़ रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि AI का असर लेबर मार्केट में एक साथ जॉब क्रिएशन और जॉब डिस्प्लेसमेंट, दोनों रूपों में दिखाई दे सकता है.

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