Airtel के नए प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान पर TRAI की नजर, रेगुलेटर ने दी शुरुआती राहत; जानें पूरा मामला

Airtel के नए प्राइवोरिटी पोस्टपेड प्लान को लेकर TRAI की शुरुआती जांच में फिलहाल नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के उल्लंघन के संकेत नहीं मिले हैं. कंपनी 5G Network Slicing तकनीक के जरिए पोस्टपेड ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले समय में बेहतर नेटवर्क अनुभव देने का दावा कर रही है.

Airtel के नए प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान को लेकर चल रही बहस के बीच टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI की शुरुआती जांच में फिलहाल किसी नियम उल्लंघन के संकेत नहीं मिले हैं. यह प्लान 5G Network Slicing तकनीक पर आधारित है, जिसके जरिए कुछ पोस्टपेड ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले समय में बेहतर नेटवर्क अनुभव देने का दावा किया गया है. हालांकि TRAI इस मामले की विस्तार से जांच कर रहा है. रेगुलेटर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या कुछ ग्राहकों को प्राथमिकता देने से बाकी 5G कस्टमर की सर्विस क्वालिटी प्रभावित होती है या नहीं.

क्या है Airtel का प्राइवोरिटी पोस्टपेड प्लान

Airtel ने पिछले महीने प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान लॉन्च किया था. कंपनी का दावा है कि इस प्लान के तहत ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों और पीक ट्रैफिक के दौरान भी बेहतर इंटरनेट स्पीड और नेटवर्क अनुभव मिलेगा. इसके लिए 5G Network Slicing तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. इस तकनीक में नेटवर्क का एक हिस्सा विशेष ग्राहकों के लिए अलग किया जाता है ताकि उन्हें लगातार बेहतर सेवा मिल सके.

TRAI की शुरुआती जांच में क्या मिला

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI की शुरुआती समीक्षा में यह नहीं पाया गया कि Airtel का नया प्लान नेट न्यूट्रैलिटी नियमों का उल्लंघन करता है. कंपनी ने रेगुलेटर को बताया है कि यह सर्विस कंटेंट न्यूट्रल तरीके से लागू की गई है. इसका मतलब है कि किसी विशेष वेबसाइट, एप या सर्विस को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है. फिलहाल TRAI को तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत महसूस नहीं हुई है.

फिर भी क्यों जारी है जांच

हालांकि शुरुआती जांच में कोई बड़ी चिंता सामने नहीं आई है, लेकिन TRAI इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है. नियामक यह देखना चाहता है कि नेटवर्क का एक हिस्सा कुछ ग्राहकों को देने से बाकी कस्टमर की सर्विस क्वालिटी पर कोई नेगेटिव असर तो नहीं पड़ रहा. इसी वजह से Airtel से अतिरिक्त आंकडे़ और स्पष्टीकरण भी मांगे गए हैं. फिलहाल जांच पूरी करने की कोई तय समयसीमा नहीं है.

संसद की समिति ने भी उठाए सवाल

मई महीने में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई थी. समिति ने दूरसंचार विभाग और TRAI से 5G Network Slicing के प्रभावों की समीक्षा करने को कहा था. समिति का मानना था कि कुछ टेलीकॉम कंपनियों के ऐसे प्लान करोड़ों प्रीपेड कस्टमर की नेट न्यूट्रैलिटी को प्रभावित कर सकते हैं.

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Airtel और Jio के अलग -अलग रुख

Airtel ने संसदीय समिति के सामने अपने प्लान का बचाव करते हुए कहा कि इससे न तो नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन होता है और न ही प्रीपेड ग्राहकों की सर्विस क्वालिटी प्रभावित होती है. दूसरी तरफ Jio ने सुझाव दिया है कि ऐसी सर्विस को शुरू करने से पहले दूरसंचार विभाग और सरकार को नेट न्यूट्रैलिटी के मानकों के आधार पर विस्तृत जांच करनी चाहिए. कंपनी का मानना है कि इस तरह की सेवाओं पर स्पष्ट नियामकीय समीक्षा जरूरी है.

आगे क्या होगा

TRAI आने वाले समय में Airtel से प्राप्त आंकड़ों और सर्विस क्वालिटी से जुड़े डिटेल का अध्ययन करेगा. यदि जांच में यह पाया जाता है कि अन्य ग्राहकों की सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ रहा है तो ऐसे प्लान को आगे भी अनुमति मिल सकती है. हालांकि अंतिम फैसला विस्तृत समीक्षा और लगातार निगरानी के बाद ही लिया जाएगा.