नकली APK फाइलों से सावधान, ‘Sturus’ वायरस बनकर खाली कर रहा खाते, बचाव के लिए उठाएं ये जरूरी कदम
साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और अब एक नया मोबाइल वायरस 'Sturus' इसे और खतरनाक बना रहा है. यह वायरस फोन में नकली ऐप बनाकर यूजर्स की बैंकिंग जानकारी चुरा सकता है और कुछ ही मिनटों में खाते खाली कर सकता है.
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधियों ने ठगी के नए हथकंडे ईजाद कर लिए हैं और अब ‘Sturus’ नाम का खतरनाक मोबाइल वायरस उनकी सबसे नई चाल बन गया है. यह वायरस नकली ऐप का रूप धारण कर यूजर्स के फोन में घुस जाता है और कुछ ही पलों में बैंकिंग डाटा चुराकर खाते खाली कर सकता है, जिससे ऑनलाइन सुरक्षा का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है.
APK फाइलों से बढ़ रहा खतरा
दैनिक भास्कर कि रिपोर्ट के अनुसार संदिग्ध या अनजान APK फाइलें इस वायरस को फैलाने का मुख्य जरिया बन रही हैं. बीते चार वर्षों में APK आधारित फ्रॉड के मामलों में दस गुना वृद्धि दर्ज की गई है. साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, यूजर्स अनजाने में इन फाइलों को डाउनलोड कर लेते हैं जिसके बाद वायरस फोन में सक्रिय हो जाता है.
इंस्टॉल होने के बाद हटाना मुश्किल
एक बार फोन में घुसपैठ होने के बाद यह वायरस अपने आप को सिस्टम ऐप की तरह दिखाता है. इसके चलते इसे डिलीट करना बेहद कठिन हो जाता है. वायरस फोन के अंदर मौजूद बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बना लेता है और बैकग्राउंड में फ्रॉड ऑपरेशन चलाता है.
साइबर फ्रॉड करने वाले अब व्हाट्सऐप वीडियो कॉल का सहारा ले रहे हैं. वे खुद को बैंक अधिकारी बताकर यूजर्स को किसी लिंक पर क्लिक करने या APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं. कॉल से भरोसा जमने के बाद यूजर के डाउनलोड करने पर वायरस मोबाइल में घुस जाता है.
बचाव के लिए जरूरी कदम
अनजान या संदिग्ध APK फाइलें बिल्कुल डाउनलोड न करें. आधिकारिक ऐप केवल Google Play Store या विश्वसनीय स्रोतों से ही इंस्टॉल करें. किसी भी बैंक संबंधी जानकारी वीडियो कॉल, मैसेज या लिंक के जरिए शेयर न करें. फोन में एंटीवायरस और सिक्योरिटी अपडेट समय पर इंस्टॉल करना भी जरूरी है.
ठगी के बाद क्या करें?
ऐसी साइबर ठगी का शिकार होने के बाद सबसे पहले अपने बैंक की कस्टमर केयर या नजदीकी शाखा को तुरंत सूचना दें ताकि खाते को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सके और लेनदेन रोके जा सकें. इसके बाद 1930 पर कॉल करके राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रिपोर्ट भी सबमिट करें. मोबाइल में मौजूद संदिग्ध ऐप्स को तुरंत हटाएं और फोन को फैक्टरी रीसेट करने पर विचार करें ताकि वायरस पूरी तरह मिट सके. पासवर्ड, UPI पिन और ईमेल लॉगिन सहित सभी महत्वपूर्ण क्रेडेंशियल तुरंत बदलें. साथ ही घटना के स्क्रीनशॉट और सबूत सुरक्षित रखें ताकि जांच में मदद मिल सके.