चांद पर गिरा SpaceX का पुराना रॉकेट, वैज्ञानिकों को मिला बड़ा मौका

SpaceX का Falcon 9 रॉकेट का 4,000 किलो का ऊपरी हिस्सा 18 महीने तक अंतरिक्ष में भटकने के बाद चांद से टकरा गया. करीब 8,690 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हुई इस टक्कर से वैज्ञानिकों को चंद्रमा और अंतरिक्ष मलबे पर शोध का मौका मिला.

SpaceX का Falcon 9 रॉकेट

Highlights

  • Falcon 9 रॉकेट 18 महीने बाद चांद से टकराया
  • टक्कर की रफ्तार करीब 8,690 किमी प्रति घंटा
  • वैज्ञानिकों को चंद्रमा पर शोध का मौका

SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का एक पुराना हिस्सा 18 महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में भटकने के बाद आखिरकार चांद की सतह से टकरा गया. वैज्ञानिकों के लिए यह घटना काफी खास है, क्योंकि इससे उन्हें चांद पर होने वाले ऐसे टकरावों को समझने और अंतरिक्ष में छोड़े गए पुराने उपकरणों से होने वाले खतरे का अध्ययन करने का दुर्लभ मौका मिला है.

करीब 4,000 किलोग्राम वजन वाला रॉकेट का यह हिस्सा लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद की सतह से टकराया. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस टक्कर की ताकत करीब तीन टन TNT के विस्फोट के बराबर थी. अनुमान है कि टक्कर से चांद की सतह पर करीब 20 से 30 मीटर चौड़ा गड्ढा बन सकता है और बड़ी मात्रा में चांद की धूल ऊपर तक उछली होगी.

टक्कर के समय क्या हुआ?

वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि यह टक्कर ब्रिटेन के समय के अनुसार सुबह करीब 7:35 बजे यानी भारतीय समय के अनुसार दोपहर 12:05 बजे हुई. कुछ वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि शक्तिशाली दूरबीनों से टक्कर के समय हल्की चमक दिखाई दे सकती है.

हालांकि, यह टक्कर चांद के उस हिस्से पर हुई जो उस समय सूर्य की रोशनी में था. इसलिए धरती से विस्फोट की चमक देख पाना मुश्किल था. इसके बावजूद टक्कर के बाद ऊपर उछली चांद की धूल और दूसरे पदार्थों को कुछ समय तक शक्तिशाली दूरबीनों से देखा जा सकता था.

जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ था रॉकेट

Falcon 9 का यह ऊपरी हिस्सा जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था. इस मिशन के जरिए दो निजी चांद पर उतरने वाले लैंडर—Blue Ghost और Resilience—को भेजा गया था.

Firefly Aerospace का Blue Ghost सफलतापूर्वक चांद पर उतर गया और अपना मिशन पूरा किया. वहीं Resilience लैंडिंग की कोशिश के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

Falcon 9 का पहला चरण दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसका ऊपरी चरण सिर्फ एक बार इस्तेमाल के लिए बनाया जाता है. आमतौर पर मिशन पूरा होने के बाद SpaceX ऐसे रॉकेट हिस्सों को अंतरिक्ष से हटाने की प्रक्रिया पूरी करता है.

इस बार चांद की ओर कैसे पहुंचा?

इस मिशन में चांद की ओर लैंडर भेजने के दौरान Falcon 9 के ऊपरी चरण का ईंधन खत्म हो गया. इसके बाद यह हिस्सा ऐसी कक्षा में चला गया, जो धरती के चारों ओर घूमते हुए चांद की कक्षा को भी पार करती थी.

SpaceX की NASA सैटेलाइट मिशनों की निदेशक जूलियाना शेमान के मुताबिक, कंपनी ने रॉकेट के निपटारे के लिए एक वैकल्पिक तरीका अपनाया था, जो उस समय लागू सुरक्षा नियमों के मुताबिक था.

उन्होंने बताया कि सूर्य की गतिविधियों और गुरुत्वाकर्षण बलों के संयुक्त असर से रॉकेट का यह हिस्सा धीरे-धीरे चांद की तरफ जाने वाले रास्ते पर आ गया.

वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह घटना?

भले ही रॉकेट का चांद से टकराना पहले से तय नहीं था, लेकिन वैज्ञानिक इस घटना को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं. इससे उन्हें चांद पर होने वाले टकरावों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी.

वैज्ञानिक इस घटना के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि टक्कर के दौरान पैदा होने वाली चमक को कैसे रिकॉर्ड किया जाए, टक्कर की जगह का पता भूकंपीय संकेतों से कैसे लगाया जाए और अंतरिक्ष में मौजूद कबाड़ से भविष्य के चंद्र मिशनों को कितना खतरा हो सकता है.

भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए अहम

यह घटना ऐसे समय हुई है जब NASA का Artemis कार्यक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी स्थापित करने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में अंतरिक्ष में छोड़े गए पुराने रॉकेट और दूसरे उपकरण भविष्य के मिशनों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं.

SpaceX का कहना है कि वह NASA और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर भविष्य के मिशनों के लिए रॉकेट के पुराने हिस्सों को सुरक्षित तरीके से हटाने की रणनीति पर काम कर रही है. इसका मकसद धरती और चांद के बीच के क्षेत्र में ऐसे अनचाहे टकरावों का खतरा कम करना है.

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