AI का नया खतरा! हैकर्स आपके WhatsApp कॉन्टैक्ट्स को भेज सकते हैं स्पैम
रिसर्चर्स ने AI ब्राउजर एजेंट्स में सुरक्षा खामियों का पता लगाया है, जिनका फायदा उठाकर WhatsApp कॉन्टैक्ट्स को स्पैम मैसेज भेजे जा सकते हैं. हालांकि WhatsApp की एन्क्रिप्शन प्रभावित नहीं हुई, लेकिन AI एजेंट्स के गलत इस्तेमाल को लेकर खतरा बढ़ा है.
Highlights
- AI एजेंट WhatsApp कॉन्टैक्ट्स को स्पैम भेजे
- रिसर्च में AI ब्राउजर की खामियां मिलीं
- WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सुरक्षित रही
भारत में लाखों लोगों के लिए किसी अनजान नंबर से WhatsApp पर मैसेज आना अब आम बात हो गई है. कभी कोई विज्ञापन होता है, तो कभी सेल्स ऑफर या प्रमोशनल मैसेज. Meta के मालिकाना हक वाले WhatsApp ने स्पैम रोकने के लिए कई फीचर्स जरूर जोड़े हैं, लेकिन अब साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने एक नए खतरे की चेतावनी दी है.
रिसर्चर्स का कहना है कि भविष्य में हैकर्स AI एजेंट्स की मदद से WhatsApp पर स्पैम फैलाने का काम पूरी तरह ऑटोमेट कर सकते हैं. इसके लिए OpenAI, Google और Amazon जैसी कंपनियों के AI एजेंट्स का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.
OpenAI के AI ब्राउजर से WhatsApp स्पैम का खतरा
साइबर सिक्योरिटी कंपनी Zenity के रिसर्चर्स ने पाया कि OpenAI के Atlas AI ब्राउजर को कुछ खास तरीकों से गुमराह करके दर्जनों WhatsApp कॉन्टैक्ट्स को स्पैम मैसेज भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. रिसर्चर्स ने अपनी यह जानकारी 5 अगस्त को अमेरिका के लास वेगास में आयोजित Black Hat साइबर सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में पेश की.
हालांकि, इस टेस्ट में WhatsApp की किसी सुरक्षा खामी का फायदा नहीं उठाया गया. WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन भी सुरक्षित रही. रिसर्चर्स ने AI ब्राउजर की सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर यह प्रयोग किया.
AI ब्राउजर में मिलीं 20 से ज्यादा सुरक्षा खामियां
रिसर्च में OpenAI, Google, Anthropic, Microsoft और Perplexity के AI ब्राउजर और ब्राउजर एक्सटेंशन में 20 से ज्यादा सुरक्षा खामियां मिलीं. रिसर्चर्स के मुताबिक, इन कमजोरियों का फायदा उठाकर AI एजेंट को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके बाद वह कंप्यूटर में मौजूद फाइलों तक पहुंच बना सकता है, अंदर की फाइलें डाउनलोड कर सकता है, पासवर्ड मैनेजर पर कब्जा कर सकता है और Amazon पर बिना अनुमति खरीदारी तक कर सकता है. रिसर्चर्स का कहना है कि AI एजेंट्स के आने से इंटरनेट की पुरानी सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.
AI एजेंट ने WhatsApp कॉन्टैक्ट्स को कैसे किया टारगेट?
Zenity ने अपने प्रयोग में एक फर्जी न्यूजलेटर के जरिए हमला करने की कोशिश की. सबसे पहले उन्होंने ChatGPT Atlas को एक लिंक पर क्लिक करके न्यूजलेटर के लिए साइन अप करने को कहा. जिस वेबसाइट पर साइन-अप की प्रक्रिया थी, उसमें कुछ छिपे हुए और खतरनाक निर्देश भी मौजूद थे. इन निर्देशों में Atlas को कहा गया था कि वह यूजर के लॉग-इन WhatsApp Web अकाउंट पर जाए और सभी कॉन्टैक्ट्स को एक ही मैसेज भेज दे.
इसके बाद AI एजेंट ने एक-एक करके कॉन्टैक्ट्स को मैसेज भेजना शुरू कर दिया और उन्हें भी उसी न्यूजलेटर के लिए साइन अप करने को कहा. यानी यह हमला एक व्यक्ति से उसके दोस्तों और परिवार तक फैल सकता था.
सुरक्षा को चकमा देने के लिए अपनाया खास तरीका
रिसर्चर्स ने Atlas की सुरक्षा को चकमा देने के लिए खतरनाक निर्देशों को हिब्रू भाषा में लिखा, क्योंकि उस समय सुरक्षा सिस्टम मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा को सपोर्ट करता था. इसके अलावा, उन्होंने यूजर के असली निर्देशों और वेबसाइट में छिपे खतरनाक निर्देशों को आपस में मिला दिया. इस तरह के हमले को ‘Intent Collision’ कहा जाता है.
रिसर्चर्स ने AI एजेंट से यह झूठ भी कहा कि वह WhatsApp Web के एक सुरक्षित टेस्ट वर्जन पर काम कर रहा है, जहां सभी यूजर नकली हैं.
Amazon पर भी किया गया प्रयोग
रिसर्चर्स ने Amazon पर भी इसी तरह का एक टेस्ट किया. उन्होंने Atlas से लॉग-इन Amazon अकाउंट में डिलीवरी एड्रेस जोड़ने और एक टैबलेट को कार्ट में डालने को कहा. हालांकि, जब AI एजेंट से उस सामान को खरीदने के लिए कहा गया तो OpenAI की सुरक्षा व्यवस्था ने उसे रोक दिया. इसके बाद रिसर्चर्स ने Atlas से Amazon के Rufus AI शॉपिंग असिस्टेंट को सामान खरीदने के लिए कहने को कहा. हैरानी की बात यह रही कि Rufus ने बिना किसी हैक या खतरनाक प्रॉम्प्ट के उन निर्देशों को मान लिया.
AI ब्राउजर एजेंट क्या होते हैं?
AI ब्राउजर एजेंट ऐसे AI टूल हैं जो यूजर की ओर से वेबसाइट खोल सकते हैं, वेब पेज पढ़ सकते हैं, जानकारी का सार निकाल सकते हैं और कई दूसरे ऑनलाइन काम खुद कर सकते हैं. लेकिन इन एजेंट्स की एक बड़ी कमजोरी यह है कि वे लगातार ऐसी वेबसाइटों की जानकारी पढ़ते हैं जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इन वेबसाइटों में छिपे खतरनाक निर्देश AI एजेंट को असली यूजर कमांड लग सकते हैं और वह उन्हें पूरा कर सकता है.
OpenAI Atlas को क्यों बंद कर रहा है?
OpenAI ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह अपने पहले AI ब्राउजर Atlas को बंद करने जा रहा है. कंपनी इसके बदले Chrome के लिए नया ChatGPT एक्सटेंशन ला रही है और ChatGPT डेस्कटॉप ऐप में ज्यादा बेहतर ब्राउजिंग फीचर्स जोड़ रही है.
Atlas को अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया था. इसका मकसद AI एजेंट की मदद से इंटरनेट ब्राउजिंग को ज्यादा ऑटोमेट करना था. हालांकि, AI ब्राउजर को उम्मीद के मुताबिक लोकप्रियता नहीं मिल पाई. इसकी एक वजह इन एजेंट्स की ज्यादा कंप्यूटिंग जरूरत भी है. ये एजेंट वेब पेज के कई स्क्रीनशॉट लेकर उन्हें AI मॉडल के पास भेजते हैं और फिर स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीजों के आधार पर कार्रवाई करते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है और AI से गलत कार्रवाई होने का खतरा भी रहता है.
रिसर्चर्स का सुझाव है कि AI ब्राउजर एजेंट्स को हैकर्स से बचाने के लिए ऐसी मजबूत और तय सुरक्षा व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसे सिर्फ एक AI सिस्टम के भरोसे न छोड़ा जाए.
यह भी पढ़ें- चांद पर गिरा SpaceX का पुराना रॉकेट, वैज्ञानिकों को मिला बड़ा मौका
Latest Stories
चांद पर गिरा SpaceX का पुराना रॉकेट, वैज्ञानिकों को मिला बड़ा मौका
Vi Plan: अनलिमिटेड 5G डेटा और 290 दिन की वैलिडिटी, लॉन्च हुआ ये नया रिचार्ज प्लान
WhatsApp: रोलआउट हुए ये 3 नए फीचर्स, अब ऐप इस्तेमाल करना होगा ज्यादा मजेदार
