लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल’ पास, विदेशी निवेश को आकर्षित करने का प्लान

यह बिल इनकम-टैक्स एक्ट, 2025, फाइनेंस एक्ट, 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन करता है. यह कानून इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को रद्द करता है, साथ ही इसके तहत पहले से की गई कार्रवाइयों को मान्यता देता है.

लोकसभा टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल' पास. Image Credit: Lok Sabha

Highlights

  • 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाना का प्लान.
  • ग्लोबल फंड मैनेजर भारत में कामकाज शुरू करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
  • गलत इस्तेमाल और 'राउंड-ट्रिपिंग' को रोकने के उपाय बरकरार.

लोकसभा ने गुरुवार को ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास कर दिया. इस बिल का मकसद विदेशी निवेश को आकर्षित करना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, टैक्स से जुड़ी अधिक निश्चितता लाना और ‘इनकम-टैक्स (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026’ की जगह लेना है़.

क्यों किए गए बदलाव?

सरकार के मुताबिक, ये बदलाव बदलते जियो-पॉलिटिकल हालात और ग्लोबल ट्रेड व सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों को देखते हुए प्रस्तावित किए गए हैं. इन बदलावों का मकसद बाहरी आर्थिक झटकों को कम करना, ग्लोबल हालात से प्रभावित सेक्टर को सहारा देना, घरेलू आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार में आसानी) को बेहतर बनाना है.

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा था कि इन प्रस्तावों का मकसद भरोसेमंद पॉलिसी और प्रोसेस की निश्चितता देकर भारत को ग्लोबल कैपिटल, मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस के लिए ज्यादा आकर्षक और भरोसेमंद जगह बनाना है.

टैक्स सिस्टम को आसान बनाया गया

एक अहम बदलाव के तहत, योग्य ऑफशोर इन्वेस्टमेंट फंड और फंड मैनेजर के लिए टैक्स सिस्टम को आसान बनाया गया है. इसमें नियमों का पालन करने की जरूरतों को कम किया गया है, साथ ही गलत इस्तेमाल और ‘राउंड-ट्रिपिंग’ को रोकने के उपाय भी बरकरार रखे गए हैं. सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से ज्यादा ग्लोबल फंड मैनेजर भारत में अपना कामकाज शुरू करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

टैक्स छूट का प्रावधान

यह बिल विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के लिए सरकारी सिक्योरिटीज से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट का प्रावधान भी करता है, बशर्ते वे तय रिपोर्टिंग जरूरतों को पूरा करें.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए, यह कानून विदेशी कंपनियों को मिलने वाली टैक्स छूट को 31 मार्च 2041 तक बढ़ा देता है. यह छूट उन विदेशी कंपनियों के लिए है जो खास इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को कैपिटल गुड्स, इक्विपमेंट और टूलिंग सप्लाई करती हैं.

पहले यह छूट 2030-31 तक ही थी. खास इलेक्ट्रॉनिक सामानों की लिस्ट में लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, हियरेबल्स, वियरेबल्स और उनसे जुड़े एक्सेसरीज़ को भी शामिल किया गया है.

सप्लाई चेन को मजबूत करने का मकसद

यह बिल उन विदेशी कंपनियों को 15 साल की इनकम टैक्स छूट देता है जो भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने के लिए कस्टम्स-बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स रखती हैं. इस कदम का मकसद इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है.

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए एक और कदम के तहत, यह कानून भारतीय डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए मंजूरी की जरूरत को खत्म करता है और डेटा सेंटर्स को सीधे मालिकाना हक के बजाय लीज़ पर चलाने की इजाजत देता है.

ग्लोबल डायमंड ट्रेड

ग्लोबल डायमंड ट्रेड में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए, यह बिल योग्य विदेशी डायमंड माइनिंग कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और नीलामी करने वाली संस्थाओं की आय पर 31 मार्च, 2041 तक टैक्स छूट देता है. यह छूट नोटिफाइड स्पेशल जोन के जरिए बिना तराशे हीरों (रफ डायमंड्स) की बिक्री से होने वाली आय पर मिलेगी.

REITs और InvITs जैसे बिजनेस ट्रस्ट के लिए, यह कानून उस मौजूदा पाबंदी को हटाता है जिसके तहत यूनिट होल्डर्स को मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्स छूट नहीं मिलती थी, अगर स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) ने नई टैक्स व्यवस्था चुनी हो. साथ ही, इस उपाय को रेवेन्यू न्यूट्रल बनाए रखने के लिए SPV लेवल पर एक संबंधित लेवी भी शुरू की गई है.

पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट

यह बिल पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में भी संशोधन करता है, जिससे केंद्र सरकार को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों को नोटिफाई करने का अधिकार मिलता है जिन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स कोई चार्ज नहीं लगा सकते. यह इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों से जुड़े प्रावधानों से इनकम-टैक्स एक्ट के संदर्भों को भी हटाता है और उन पेमेंट तरीकों का दायरा बढ़ाता है जिन्हें नोटिफाई किया जा सकता है.

यह कानून इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को रद्द करता है, साथ ही इसके तहत पहले से की गई कार्रवाइयों को मान्यता देता है. सरकार ने कहा कि बिल में फाइनेंस एक्ट, 2026 के लागू होने के बाद स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के आधार पर जरूरी समझे गए अतिरिक्त टैक्स उपाय शामिल किए गए हैं.

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