Steve Jobs को पसंद थी छोटी स्क्रीन, लेकिन Tim Cook ने शुरू किया था बड़ी स्क्रीन वाले iPhone का दौर

जैसे-जैसे Apple ने स्मार्टफोन की बदलती पसंद पर ध्यान दिया, बड़े डिस्प्ले उसकी स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा बन गए. कंपनी की स्ट्रेटेजी में इस बदलाव से iPhone लाइनअप में बदलाव आया और ग्राहकों को स्क्रीन साइज में ज्यादा ऑप्शन्स मिले.

आईफोन स्क्रीन साइज Image Credit: Justin Sullivan/Getty Images

Highlights

  • टिम कुक ने बदली एपल की स्ट्रैटेजी.
  • iPhone 5 से शुरू हुआ बड़ा डिस्प्ले.
  • एंड्रॉयड को टक्कर देने के लिए आई थी बड़ी स्क्रीन.

Tim Cook के समय में Apple की iPhone स्ट्रैटेजी में काफी बदलाव आया, क्योंकि कंपनी ने छोटी स्क्रीन वाले तरीके से दूरी बना ली थी, जो स्टीव जॉब्स के समय में आईफोन लाइनअप की पहचान थी. यह बदलाव तब आया जब स्मार्टफोन मार्केट बदल रहा था और एंड्रॉयड कॉम्पिटिटर तेजी से बड़े डिस्प्ले वाले फोन मार्केट में उतार रहे थे.

एपल ने शुरू में थोड़ा बदलाव किया, लेकिन बाद में iPhone रेंज में कई स्क्रीन साइज लाए गए. इस कदम से कस्टमर्स को ज्यादा ऑप्शन मिले और Apple को मार्केट में सीधे मुकाबला करने का मौका मिला जहां बड़ी स्क्रीन वाले स्मार्टफोन तेजी से पॉपुलर हो रहे थे.

iPhone 5 में स्क्रीन साइज़ में पहला बदलाव आया

पहला बड़ा कदम आईफोन 5 के साथ आया, जिसे 4 इंच डिस्प्ले के साथ लाया गया था. पहले के आईफोन मॉडल्स में 3.5 इंच स्क्रीन आई थी, यह बदलाव कंपनी के लिए खास था जिसने कई जेनरेशन में आईफोन के डिस्प्ले साइज़ को एक जैसा रखा था. यह कदम तब उठाया गया जब एंड्रॉयड स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियां तेजी से बड़ी स्क्रीन वाले डिवाइस ला रही थीं, जिससे एपल पर कस्टमर्स की बदलती पसंद पर ध्यान देने का दबाव पड़ रहा था.

iPhone 6 के साथ फिर बदला स्क्रीन साइज

बिजनेस टुडे के मुताबिक, एपल ने 2014 में आईफोन 6 और आईफोन 6 प्लस के साथ स्क्रीन साइज में बड़ा बदला किया. iPhone 6 को 4.7 इंच डिस्प्ले तो वहीं iPhone 6 Plus को 5.5 इंच स्क्रीन साइज के साथ ग्राहकों के लिए उतारा गया था. यह एपल की पिछली स्ट्रेटेजी से काफी अलग था. आईफोन को असल में एक स्क्रीन साइज के साथ देने के बजाय, कंपनी ने कस्टमर्स को स्टैंडर्ड मॉडल और बड़े वर्जन के बीच चुनने का ऑप्शन देना शुरू किया था. बड़े डिस्प्ले ने एपल को उन एंड्रॉयड फोन से मुकाबला करने में भी मदद की, जिनकी स्क्रीन पहले से ही पॉपुलर थी.

प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी का हिस्सा बन गए बड़े डिस्प्ले

टिम कुक के समय में एपल ने अपनी डिस्प्ले टेक्नोलॉजी को बढ़ाना जारी रखा. कंपनी ने आखिरकार अपने प्रीमियम आईफोन को LCD से OLED स्क्रीन पर शिफ्ट कर दिया और iPhone X के साथ Face ID को पेश किया, जिसने टच आईडी सिस्टम की जगह ली. बड़े डिस्प्ले की तरफ बदलाव सिर्फ आईफोन तक ही सीमित नहीं था. 2015 में कंपनी ने पहला iPad Pro पेश किया, जिससे टैबलेट लाइनअप में एक बड़ी स्क्रीन का ऑप्शन जुड़ गया.

इन बदलावों ने Apple की हार्डवेयर स्ट्रेटेजी में एक बड़े बदलाव को दिखाया, अपने प्रोडक्ट फ़ॉर्मेट को बहुत कम रखने के बजाय, कंपनी ने कस्टमर की बदलती पसंद और कॉम्पिटिशन को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग साइज और कॉन्फिगरेशन पेश किए.

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