दुनिया के बड़े देश हुए एक्टिव! होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए आगे आए ब्रिटेन-फ्रांस-जर्मनी समेत कई देश; जानें क्या कहा?

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान जैसे बड़े देशों ने बड़ा बयान दिया है. इन देशों ने कहा है कि वे इस अहम रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए योगदान देने को तैयार हैं. हालांकि उन्होंने साफ किया है कि यह कोई तुरंत सैन्य कार्रवाई नहीं होगी.

होर्मुज स्ट्रेट Image Credit: @AI

UK, France on Hormuz: वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर ग्लोबल चिंता का केंद्र बन गया है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है. अब हालात ऐसे हैं कि यह रास्ता लगभग बंद जैसा हो गया है, जिससे दुनियाभर में सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान जैसे बड़े देशों ने बड़ा बयान दिया है. इन देशों ने कहा है कि वे इस अहम रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए योगदान देने को तैयार हैं.

हालांकि उन्होंने साफ किया है कि यह कोई तुरंत सैन्य कार्रवाई नहीं होगी. दूसरी तरफ ईरान पर आरोप है कि उसने जहाजों पर हमले किए और रास्ता बाधित किया. इससे हालात और गंभीर हो गए हैं. अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं. आइए विस्तार से जानते है.

होर्मुज को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है. यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. इस समय हालात ऐसे हैं कि यह रास्ता लगभग बंद हो गया है. अब तक 23 जहाजों पर हमले या घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें 10 तेल टैंकर भी शामिल हैं.

यूरोप और जापान का बड़ा बयान

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. इसमें उन्होंने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है. साथ ही कहा कि वे इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं. उन्होंने ईरान से तुरंत हमले रोकने और रास्ता साफ करने की अपील की है. हालांकि इन देशों ने यह भी साफ कर दिया है कि फिलहाल कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी. France 24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इटली और जर्मनी के रक्षा मंत्रियों ने कहा कि किसी भी सैन्य कदम पर फैसला सीजफायर के बाद और अंतरराष्ट्रीय अनुमति के तहत ही लिया जाएगा.

    अमेरिका की अपील, लेकिन सीमित समर्थन

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अन्य देशों से इस रास्ते को खोलने में मदद मांगी है. लेकिन अभी तक कोई देश तुरंत सैन्य मदद के लिए आगे नहीं आया है. सभी देश पहले बातचीत और योजना बनाने पर जोर दे रहे हैं. इस संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतें बढ़ रही हैं. करीब 20,000 नाविक और हजारों जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं. ऐसे में अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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