बंगलादेश में बुरा हाल! 2 लीटर से ज्यादा नहीं खरीद सकते पेट्रोल, पाकिस्तान में पेट्रोल के लिए गोलीबारी
मिडिल ईस्ट में यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के मिसाइल और सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इसके बाद ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दिया. हालांकि लड़ाई अभी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट तक सीमित है, लेकिन ऊर्जा बाजार और व्यापार मार्गों पर इसका असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा. इसका असर हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण एशिया तक महसूस किया जा रहा है. बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देश, जो ऊर्जा आयात और क्षेत्रीय व्यापार पर काफी निर्भर हैं, अब ईंधन की कमी, बढ़ती कीमतों, घबराहट में खरीदारी और सामाजिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. जहां खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन की खबरें सुर्खियों में हैं, वहीं इन देशों में आम लोगों की जिंदगी पर इसका आर्थिक असर तेजी से दिखाई देने लगा है.
बांग्लादेश में पेट्रोल पर राशनिंग, पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें
बांग्लादेश की सरकार ने ईंधन संकट के डर से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर सीमाएं लगा दी हैं. लगभग 17 करोड़ आबादी वाले इस देश को अपनी करीब 95 प्रतिशत तेल और गैस की जरूरतें आयात से पूरी करनी पड़ती हैं, इसलिए ग्लोबल सप्लाई में थोड़ी भी बाधा बड़ा संकट बन सकती है. सरकार की कंपनी बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया है कि वे एक बार में सीमित मात्रा में ही ईंधन बेचें. मोटरसाइकिल चालकों को अब सिर्फ 2 लीटर पेट्रोल ही दिया जा रहा है. इस फैसले के बाद राजधानी ढाका समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं. ईंधन की पाबंदियों से पहले से महंगाई झेल रहे लोगों में नाराज़गी बढ़ गई है. कुछ जगहों पर हालात हिंसक भी हो गए.
ईंधन की जमाखोरी पर सरकार की कार्रवाई
सरकार को आशंका है कि कुछ व्यापारी इस संकट का फायदा उठाकर ईंधन छिपा रहे हैं और बाद में महंगे दामों पर बेचने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए ढाका समेत कई शहरों में मोबाइल कोर्ट और निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं. अधिकारियों ने कुछ पेट्रोल पंपों पर तय सीमा से ज्यादा स्टॉक मिलने की भी बात कही है. सरकार का कहना है कि यह कदम काला बाजारी, तस्करी रोकने के लिए जरूरी है.
गैस की कमी से खाद कारखाने बंद
ऊर्जा संकट का असर अब उद्योगों पर भी पड़ने लगा है. बांग्लादेश के छह में से पांच फर्टिलाइजर कारखाने अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं. यह गैस की आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही तो कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि खेती के लिए खाद बेहद जरूरी है.
कतर की जगह अमेरिका से LNG खरीद सकता है बांग्लादेश
बांग्लादेश फिलहाल कतर से LNG आयात करता है. ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी कंपनियों से गैस खरीदी जा सकती है, हालांकि इसकी कीमत ज्यादा होगी.
पाकिस्तान में भी पेट्रोल को लेकर अफरा-तफरी
ईंधन संकट का असर पाकिस्तान में भी दिखने लगा है. तेल की कीमतें बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने के डर से कई शहरों में घबराहट में पेट्रोल खरीदना शुरू हो गया है. पंजाब प्रांत के सियालकोट में पेट्रोल पंप पर हुए विवाद में गोलीबारी हो गई. पुलिस के अनुसार, कुछ लोग डिब्बों में पेट्रोल भरने की कोशिश कर रहे थे, जो सरकारी नियमों के खिलाफ है.
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा उछाल
सरकार ने हाल ही में पेट्रोल की कीमत 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी है. कीमत बढ़ने से पहले कई पेट्रोल पंप मालिकों ने अस्थायी रूप से पंप बंद कर दिए, जिससे लंबी कतारें लग गईं. जानकारों की मानें तो तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मतलब है कि खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी, परिवहन किराया बढ़ेगा और कंस्ट्रक्शन की चीजें और रोजमर्रा का सामान महंगा होगा. इसका सीधा बोझ आम लोगों पर पड़ेगा.
बलूचिस्तान में ईरान से व्यापार लगभग बंद
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हालात और भी कठिन हैं. यह इलाका ईरान के साथ सीमा व्यापार पर काफी निर्भर है. मकरान, ग्वादर, केच, पंजगुर और चागी जैसे इलाकों में करीब 80 प्रतिशत ईंधन और खाद्य सामान ईरान से आता है. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद यह व्यापार लगभग रुक गया है. ईरान ने कई खाद्य वस्तुओं और सामान के निर्यात पर भी पाबंदियां लगा दी हैं.
तटीय इलाकों में खाने-पीने की चीजों के दाम 40 फीसदी तक बढ़े
आपूर्ति घटने के कारण बलूचिस्तान के तटीय शहरों ग्वादर, पसनी, ओरमारा और जिवानी में कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. खाने-पीने की चीजों के दाम 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. एलपीजी गैस की कीमत दोगुनी होकर 600 रुपये प्रति किलो हो गई है. डीजल और खाना पकाने के तेल की कीमत 60-70 प्रतिशत तक बढ़ गई है.
दूर का युद्ध, लेकिन असर पूरी दुनिया पर
मिडिल ईस्ट में यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के मिसाइल और सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इसके बाद ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दिया. हालांकि लड़ाई अभी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट तक सीमित है, लेकिन ऊर्जा बाजार और व्यापार मार्गों पर इसका असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है. बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह संकट सिर्फ विदेश नीति का मुद्दा नहीं रहा. यह अब महंगाई, रोजगार और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का सवाल बन चुका है.
